एम वी फाउंडेशन द्वारा मनाया जा रहा है "मातृका विवेक स्वराष्ट्र गौरवम", भव्य संस्कृत सप्ताह दिवस

19 अगस्त 2021 से लेकर 25 अगस्त 2021 तक निरंतर होगा यह आयोजन


दिल्ली :
एम वी फाउंडेशन द्वारा "मातृका विवेक स्वराष्ट्र गौरवम", भव्य संस्कृत सप्ताह दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रथम दिवस- प्रथम सत्र में सभी मुख्य अतिथि विशिष्ट अतिथि एवं अति विशिष्ट अतिथि सभी आमंत्रित वक्ता का परिचय एवं शंख नाद से प्रारंभ गणेश वंदना सरस्वती वंदना साथ उपस्थित सभी वक्ता ने अपने अपने विचार व्यक्त किए संस्कृत सप्ताह में उपस्थित सभी विद्वान विदुषियों ने अपने विचार व्यक्त किए और बहुत ही हर्ष के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ किया गयासभी बहुत ही प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।

इक्ष्वाकु वंश के राजा रघु की अतुल गौरव गाथा का बखान एम वी फाउंडेशन की परिचर्चा

द्वितीय दिवस-द्वितीय सत्र में रघुवंशम्: विस्तृत परिचर्चा भाग १(१-६ सर्ग )

20 अगस्त 21 को मातृका विवेक मंच की ओर से महाकवि कालिदास के महाकाव्य

'रघुवंशम्-विस्तृत परिचर्चा : अंत./राष्ट्रीय अध्यक्ष "प्रीति हर्ष जी" ने बताया इक्ष्वाकु वंश प्राचीन कौशल देश के राजा जिनकी राजधानी अयोध्या थी। राजा रघु अयोध्या के प्रसिद्ध पराक्रमी राजा हुए जिनके नाम पर रघुवंश की रचना हुई। ये राजा दिलीप के पुत्र थे तथा अपने कुल के सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं जिनके अतुल्य पराक्रम के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी भी अपने को रघुवंशी कहलाने में परम गर्व अनुभव करते हैं। पूरा सूर्यवंश इन्हीं के कारण रघुवंश कहलाने लगा। इन्हीं के नाम पर श्री रामचंद्र जी को राघव... रघुवर.. रघुराज आदि भी कहा जाता है। संस्कृत भाषा सप्ताह के आयोजन का आज द्वितीय दिवस जिसमें रघुवंशम पर परिचर्चा आरंभ की गई है, रेनू मिश्रा'दीपशिखा' के संयोजन-संचालन में सम्पन्न हुई।इस कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एम वी फाउंडेशन की संस्थापिका आरती तिवारी सनत जी की गरिमामयी उपस्थिति रही ।

आमंत्रित वक्ता में सर्वप्रथम डॉ. ऋचा त्रिपाठी ने रघुवंशम् के प्रथम-द्वितीय सर्ग में राजा दिलीप के चरित्र व गौ सेवा का अति सुन्दर व्याख्यान किया। 

डॉ .शरद कुमार ने तृतीय-चतुर्थ सर्ग में दिलीप के पुत्र रघु के जन्म व राजा रघु की दिग्विजय का उत्तम बखान किया।

डॉ. उपासना पांडेय ने पंचम-षष्ठ सर्ग में राजा रघु की दानशीलता व राजा रघु के जन्म एवं उसके स्वयंवर- विवाह का उत्कृष्ट वर्णन किया। संस्कृत के श्लोकों को विद्वान विदुषियों ने बहुत ही बेहतरीन और मधुर गायन के साथ उन्मुत्त कंठ से प्रस्तुत किया। सुनकर सभी आत्म विभोर हो उठे। सभी श्रोता वाह वाह करते रहे।

कार्यक्रम के अंत में निदेशक आरती तिवारी सनत जी ने अपना उद्बबोधन आभार ज्ञापित किया। मीडिया प्रभारी राजेश त्रिपाठी नीलू जी सतना, मुंबई रामेश्वर प्रसाद गुप्त है।

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