आईएमए (IMA) बाबा रामदेव का नहीं, आयुर्वेद का विरोध कर रहा है : भवानजी


मुंबई : भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा मुंबई मनपा के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने कहा है कि आईएमए बाबा रामदेव का नहीं, आयुर्वेद का विरोध कर रहा है। 

आज एक बयान में श्री भवानजी ने कहाकि मेडिकल लॉबी नहीं चाहती  कि खरबों रुपये के साम्राज्य पर इतनी आसानी से वैद्य,धनवंतरी का कब्ज़ा  हो। यहां विरोध रामदेव का नही, आयुर्वेद का है।  क्योंकि अगर फिर से हिंदुस्तान को चरकसंहिता की आदत लग गई तो सर्दी बुखार में क्रोसिन की जगह गिलोय का काढ़ा पीने लगेंगे, चोट मोच में बैंडेज, इंजेक्शन की जगह हल्दीप्याज बांधने लगेंगे, डायबिटीज में महीने के 10 हजार की दवाई खाने वाले मेथी हरसिंगार पत्ते , जौ का आटा खाना शुरू कर देंगे। पूरा दिन टीवी पर 5000 बार मेडिकल प्रोडक्ट्स का प्रचार करने वाली कम्पनी ऐसा होने देगी क्या ?

उन्होंने  कहाकि देश की 60 प्रतिशत कमाई सिर्फ मेडिकल पर लुटा दी जाती है. 2  रुपये की टेबलेट 200 में बेच कर कमाने वाली कंपनियां सड़क पर कटोरा लेकर बैठ जाएंगी। बस इसी एक डर के वजह से इस आयुर्वेदिक फार्मूले की बदनामी की जाएगी,  सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जाएगा, मीडिया को खरीदा जाएगा, नेता, संतरी, मंत्री सब की बोली लगेगी। 

उन्होंने सवाल किया कि आईएमए की प्रयोगशाला कहां पर है?, 99% बेक्टेरिया फ्री विदेशी साबुन और टूथ पेस्ट घोषित करने में आईएमए ने क्या प्रक्रिया अपनाई है?, अपने  शोध को उन्होंने किस जर्नल में प्रकाशित किया है?, आईएमए को इस तरह के प्रमाणपत्र/अनुशंसा बांटने हेतु किसने अधिकृत किया है? और  धर्म परिवर्तन करने वाले NGO का मैडिकल असोसिएशन में क्या काम है ?

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