गरीब मुंबईकरो को राज्य की ठाकरे सरकरा ने स्वस्थ सुविधा, आर्थिक, खाद्य सामग्री की मदद के नाम पर ठेंगा दिखाकर छोड़ा लावारिस

मुंबई : मुंबईकरी जनता को देश भर के विभिन्न राज्यों में तबाही कोहराम मचाने वाले कोरोना महामारी की दूसरी लहर के लॉक डाउन ने पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। राज्य की ठाकरे सरकार की जनता की स्वस्थ सुविधाओं से लेकर गरीबों की लॉक डाउन में की जाने वाली मदद को लेकर दावे की हावा निकल कर रहे गई है। मुंबई के सरकारी अस्पतालों में बढ़ती अव्यवस्था के आलम के कारण कोरोना मरीजों की कोरोना संक्रमण से ग्रस्त होकर ठीक होने का एवरेज बढ़ती कोरोना मरीजों की मौतों के आगे बहुत कम है। वहीं दूसरी और अगर मुंबई करो कि माने तो राज्य की ठाकरे सरकार व मनपा प्रशासन ने गरीब माध्यम वर्गीय मुंबई करो से लेकर सड़क किनारे पड़े गरीबो को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है। सड़क किनारे पड़े गरीबों को दो वक्त का खाना नसीब नही हो पा रहा है मुंबई करो को, पूर्व की तरह मुंबई के सामाजिक संस्थानों ने मुंबई भर में खाना वितरण करने के लिये जिस प्रकार से मोर्चा संभाला था वो अब दूसरे कोरोना महामारी की लहर में देखने को नही मिल रहा है।

मुंबई करो कि हमदर्द, हितैषी बनने वाली मनपा प्रशासन, महापौर किशोरी पेडणेकर की दूसरे लॉक डाउन की खाद्य सामग्री, राशन मुंबई से गायब दिखाई पड़ रही है। आर्थिक सहायता के नाम पर 8 लाख राज्य के घरेलू कामगारों से लेकर रिक्शा टैक्सी, कॉन्ट्रैक्ट लेबर कुछ प्रतिशत रजिस्ट्रेशन है, बकाया 90 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन नहीं है, रिन्यूअल नही करवाये, बैंक के खाते अपडेट न होने के कारण राज्य सरकार की आर्थिक मदद सीधे गरीबों को न जाकर प्रशासन के भ्रष्ट अधिकार से लेकर नेताओं की मलाई बनेगी, जिसे सब मिल बांटकर खायेंगे।

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