मनपा स्कूलों की शिक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के स्तर का बनना है : अध्यक्ष संध्या दोषी शिक्षण समिति

रिपोर्ट : यशपाल शर्मा

मुंबई : मनपा स्कूलों के विभिन्न भाषीय मराठी, उर्दू स्कूलों के पूर्व के दौर ने मनपा आयुक्त से लेकर महापौर शिक्षण समिति अध्यक्ष शिक्षण अधिकारियों तक को वर्ना कूलर माध्यम स्कूलों में घटती संख्या ने सबको सोचने में मजबूर कर दिया। पूर्व शिक्षण समिति अध्यक्ष मंगेश सतामकर के कार्यकाल से ही मनपा स्कूलों में बदलाव की बयार शुरू हुई।

शिक्षण विभाग के हर वो कमजोर कड़ी को ढूंढकर उस पर सुधार किया। पूर्व शिक्षण समिति अध्यक्ष अंजलि नाईक का कार्यकाल आते आते बहुत सी हाई टेक सुविधाओ से मनपा स्कूलों को सुसज्जित किया गया। जिसमें से ई-लाइब्रेरी, मनपा स्कूलों में टैब का वितरण, जो कारागार साबित न हुआ, मनपा स्कूलों का सौन्दर्यं कारण करके 7 मंजिला बनाकर कक्षा 8 वी तक कि शिक्षा को आगे बढ़ाकर 10 वी तक करने का कार्य किया गया।

उल्लेखनीय तौर पर उसकी मुख्य वजह बनी कक्षा 8वी तक मनपा स्कूल की पढ़ाई होने के कारण स्कूलों में ड्रॉप आउट की समस्या काफी संख्या में देखने को मिलती थी।  जिसमें 8वीं के बाद लड़कों से अधिक लड़कियों छात्राओं की संख्या अधिक होती थी, क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिये स्कूल मुंबई की झुग्गियों झोपड़ियों में रहने वालों के लिये बहुत दूर होते थे। बाद घर से स्कूलों की दूरी लंबी होने के कारण ड्रॉप आउट विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होता चला गया, जिसे मनपा ने सुधार कर के कक्षा 8वी से बढ़ाकर 10वी तक कर दिया है।

वहीं मनपा शिक्षण समिति का पदभार ग्रहण करने वाली संध्या दोशी के सामने मनपा को हाई टेक शिक्षा का स्तर सुधारने की सबसे बड़ी चुनौती है। जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए मीडिया से बातचीत में कहती है अगर हमारी सोंच बुलंद होगी तो हमारे हौसले बुलंदी पर होंगे। इस सर्वाच्च पद पर युवा सेना प्रमुख व शहर के पालक मंत्री की दूरदर्शी सोच ही है जो इतना कम समय मे मनपा स्कूलों को को आधुनिक बनाने का श्रेय उनको ही जाता है।

मौजदा समय मे शिक्षण समिति में अध्यक्ष के पद पर विराजमान होते ही 104 स्कूलों को अनुदान देने का कार्य किया है। मुफ्त शिक्षण सामग्री का वितरण मनपा विद्यार्थियों को हर वर्ष निरंतर शुरू ही है। मनपा स्कूलों को सीबीएससी बोर्ड से जोड़कर इंटरनेशनल स्कूलोँ की क्वालिटी दर्जेदार पढ़ाई की और मनपा स्कूलों के कदम बढ़ चले है। शिक्षण समिति के बजट में 2020-21 में 208 करोड़ रुपए रिजर्व करवा कर शिक्षा के क्षेत्र में मास्टर स्ट्रोक मारा है।
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