मुंबई के अधिकांश उद्यान/गार्डन है दुर्व्यवस्था के शिकार

उद्यान विभाग के टेंडर में 150 करोड़ रुपए की कमी, मुंबई महापालिका उद्यानों की देखभाल विकास को लेकर गंभीर नहीं


मुंबई :
कोरोना सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को स्वस्थ सुविधाओ का ज्ञान होने के बाद अधिक से अधिक खाली पड़े भूखंडों और उद्यानों की बहुत हद तक मुंबई करो को जरूरत है। जिसके कारण कहीं न कहीं मनपा ने बजट में इसके लिये टेंडर प्रक्रिया किया हुआ है। कहा जाता है कि मात्र उद्यान विभाग के लिये बजट में इस बार 160 करोड़ कमी किया गया है। कामो को प्रधानता देते हुए मनपा ने आर्थिक टेंडरिंग किया हुआ है। परिणाम स्वरूप उद्यान विभाग इस बार भी अनदेखा राह गया है। मौजदा समय के कोरोना महामारी समेत विभिन्न रोगों से ग्रस्त मरीजों के लिये शुद्ध हवा में सांस लेना प्रदूषण मुक्त वातावरण में कितना जरूरी है इसका अंदाज़ा वर्तमान हालतों को देख कर लगाया जा सकता है।  

मुंबईकरों के लिये उद्यान/गार्डन जिसकी बहुत हद तक जरूरत बढ़ चुकी है। जिसके लिये खाली पड़े भूखंडो का विकास व देखभाल करने के लिये मनपा आयुक्त इक़बाल सिंह चहल ने बजट में इसका उद्यानों के विकास व देखभाल करने के लिये 521.87 करोड़ रुपए का टेंडर तैयार किया है। जिसमे से 178 करोड़ रुपए बाज़ार मंडियों के सौंदर्य कारण के कार्यो के लिये है। चालू वर्ष में उद्यान विभाग तकरीबन 685 करोड़ है का बजट है। उद्यान विभाग का बजट कम करने से अधिकारियों ने भी माना है। 60 प्रतिशत बजट खर्च जोन के चलते आकरमान काटने की प्रतिक्रिया अधिकारियों की ओर से दी है। पिछले कुछ वर्षों से उद्यान विभाग की अनदेखी पैन के कारण काफी पिछड़ा विभाग बनकर रह गया है। पिछले तीन वर्षों से बजट में आकारमान कम करने के लिये उद्यान विभाग में टेंडरिंग में कैंची चली है।


कहा जाता है कि मात्र देखभाल के अभाव, उद्यानों की दुर्व्यवस्था हो चुकी है। बताया जाता है मुंबइ मनपा के 700 उद्यान है। जिसमे की देखभाल के अभाव में मुंबई के अनेक उद्यानों में से शिवाजीनगर गोवंडी के अधिकांश गार्डनों की हालत दयनीय है। जिसमे की माता रमई गार्डन की जालीयां पेड़ पौधे बेंचे टूटी फूटी है, दुर्व्यवस्था देखकर मुंबई के अधिकांश गार्डनों की हालत समझी जा सकती है। बच्चों के खेलने के लिये उपकरण टूटे हुए अवस्था मे देखे जा सकते है, बैंच टूटी हुई हालात में होते है। बकडे टूटे हुए मिलेंगे, पेड़ पौध सूखे उखड़े हुए हालात में दिखेंगे, जालीयां टूटी हुई जगह जगह से गायब हो चुकी है। गार्डन का सुरक्षा रक्षक जगह पर उपलब्ध न होने के कारण गार्डनों की दुर्व्यवस्था का शिकार हो चले है। बांद्रा के नगरसेवक आसिफ जकारिया ने गार्डन उद्यानों के बजट का पैसा अधिक से अधिक 40 प्रतिशत उपयोग में लाया जाता है। पिछले तीन वर्षो  में उद्यान विभाग के लिये 2021-22 में 521.87 करोड़, 2020-21 में 685.45 करोड़, 2019-20 में 717.17 करोड़ रुपए की बजट में व्यवस्था किया गया था।

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