सन्त को अदृश्य बेटे से चित्त पर और अदृश्य बीमारी कोरोना से वित्त पर चोट ?

ईरानी बोध-कथा और चीनी व्यथा

तुर्की देश के सन्त थे मुल्ला मसरूद्दीन । उनकी शादी हुई । कुछ साल गुजर गए । उन्हें कोई संतान नहीं हुई । एक दिन शयन कक्ष में उनकी पत्नी ने कहा- ए जी, यदि हमें बेटा हुआ तो उसे कहाँ सुलाएँगे ।' मुल्ला पत्नी से कुछ दूरी बनाते हुए कहा-ये जो बीच मे जगह है, हम दोनों के बीच वहीं सुलाएँगे । पत्नी ने कहा 'यदि दूसरा हुआ तो ?' मुल्ला थोड़ा और पीछे हटे और बोले-'उसे भी हम दोनों के बीच ।' पत्नी बोली-'तीसरा हुआ तो ?' फिर मुल्ला और पीछे हुए कि बिस्तर से गिर पड़े और तेज चोट के कारण वे चीखने लगे ।

मुल्ला की तेज चीख पर पूरा मुहल्ला दौड़ कर आया और पूछने लगा कि क्या हुआ ?

अदृश्य बेटे की वजह से चोट !

मुहल्ले वालों को मुल्ला ने जवाब दिया-'मुझे अदृश्य बेटे ने गिरा दिया ।' बोले- 'सोचिए अभी वह पैदा नहीं हुआ तो इतना कष्ट दे रहा है और जब पैदा हो जाएगा तो कितना कष्ट देगा ।'

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