जिसकी मति मर जाती है वही प्रभु का नाम सुमिरन नही कर पाता : अरुण महाराज

रिपोर्ट : आशुतोष गुप्ता

मीरजापुर, (उ.प्र.) : महावीर मंदिर में चल रही पावन संगीतमय रामकथा के छठे दिन प्रयाग से आये कथा व्यास अरुण महाराज ने भक्तों को बताया कि प्रभु श्री राम लोक कल्याण के लिए ही जन्म लेते है जिसकी मति मर जाती है वही प्रभु का नाम सुमिरन नही कर पाता व्यक्ति के मरते समय बुद्धि हीन हो जाती है।  व्यक्ति के मरते समय जैसी बुद्धि या मति होती है। उसी प्रकार अगले जन्म में परमात्मा वैसी गति प्रदान करता है। महाराज ने बताया कि जैसे माँ सती ने मरते समय भगवान शिव को मांगा। उसी प्रकार उनका अगला जन्म हिमाचल के घर पार्वती के रूप में हुआ तथा शिव जी से विवाह हुआ एवम कैलाश पर्वत मे रहने लगी महाराज ने कहा कि बिना कारण के कोई भी कार्य सम्पन्न नही होता, भगवान श्री हरि को भी राक्षस का संघार करने के लिए लोक कल्याण के लिए भी बार बार पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। भगवान राम ने रावण जो प्रखंड विद्वान रूपी राक्षस जो कि पातकी का संघार करने के लिए प्रभु को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा भगवान अपने भक्तों का कल्याण चाहते है। कार्यक्रम आयोजक सुरेंद्र नाथ दुबे, राजकुमार दुबे, अर्चना दुबे, अनुराग दुबे, राजू शुक्ला, सन्तोष उपाध्याय, अन्य भक्त गण मौजूद रहे।

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