मुंबई के दूसरे सबसे बड़े स्लम की सबसे लाचार प्रशासनिक व्यवस्था

भाजपा सांसद मनोज कोटक की संसादीय क्षेत्र की जनता नागरिक सुविधाओं के अभाव में पशुओं से बद्दतर जीवन बिताने को मजबूर

रिपोर्ट : यशपाल शर्मा 

मुंबई : माया नगरी के दूसरे सबसे बड़े स्लम की सबसे लाचार है प्रशासनिक व्यवस्था। संसाद मनोज कोटक पर स्थानिक शिवाजीनगर मानखुर्द विधानसभा की जनता को विकास का विजन दिखाया था, कहाँ गया विकास का विजन पूंछते नही थकती। जिससे संसाद के प्रति विधानसभा क्षेत्र की जनता में जनाक्रोश पनप रहा है। उल्लेखनीय तौर पर आगामी मनपा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार की जमानत जप्त करवाकर मानेगी।

मनपा प्रशासन का दोहरा मापदंड देखने को मिल रहा है। मुंबई के पॉश इलाके में रहने वाले नागरिको के लिये अलग नागरिक सुविधा तो वहीं  झोपड़पट्टियों की जनता के लिये अलग। कहा जाता है कि सिर्फ झोपड़पट्टियों में निवास करने वाली जनता को नागरिक सुविधा के नाम पर पशुओं से बदत्तर नारकीय जीवन देने में लगी है। एम/पूर्व मनपा वार्ड के विभिन्न  इलाकों में जहां आजादी के 72 वर्षो बीत जाने के बाद भी मुंबई का धारावी के बाद, पूर्वी उपनगर का दूसरे नंबर का स्लम कहलवाने वाला गोवंडी, मानखुर्द, चीता कैम्प ट्रैफिक जाम की भीषण समस्या की जद में आकर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में प्रशसान नाकाम हो चुका है। मंडाला क्षेत्र में तो लड़के-लड़कियों के पढ़ने के लिये एक मनपा स्कूल है, न तो कोई जूनियर डिग्री कॉलेज, गर्भवती महिलाओ के लिये मैटरनिटी अस्पताल, एम प्रभाग में जगह-जगह हेल्थ पोस्ट, युवाओं को नशे से दूर करने के लिये अधिक मात्रा जिम, व्यायामशाला, खुली हवा में सांस लेने के लिये गार्डन, सामाजिक हॉल का अभाव है।

रिहायसी इलाकों में स्ट्रीट लाइट का अभाव, जहरीला प्रदुषण फैलाकर पर्यवारण को प्रदुषित करने का कार्य लगतार कई वर्षो से मनपा प्रशसान अपनी कंपनियों के माध्यम से करते चले आ रही है। शौचालय का अभाव, प्रशासन शौचालय का निर्माण नही कर रहा है स्वच्छ भारत मुहिम अंतर्गत। मानखुर्द मंडाला 30 फिट रोड इंदिरानगर में खाली पड़े मैदान में आज तक मनपा प्रशासन ने सीआरजेड के नाम पर नागरिको को नागरिक सुविधा से वंचित कर रखा है। कहा जाता है कि मनपा प्रशसान ने अभी तक एक भी सुविधा नही दे पाया। परिणाम स्वरूप क्षेत्र की जनता शौचालय के अभाव में, खुले में शौच की समस्या से त्रस्त नागरिक महिलाओं व पुरुषों को खुले आसमान के नीचे शौच करने को जाते है। कहा जाता है कि आधे से अधिक मंडाला सीआरजेड में बसा हुआ है तो कैसे बाकी रहिवासिय इलाकों में जलवाहिनी, बिजली का केबल अंत तक बिछाया गया। क्या सिर्फ इंदिरानगर की 30 फिट रोड की जनता गणेश मंदिर से लेकर मैदान तक सीआरजेड की समस्या प्रशासनिक अधिकारियों के लिये विकास के रास्ते मे रोड़ा बन रही है। नागरिक सुविधा उपलब्ध करवाने के नाम पर, यह सिर्फ मालाई खाने की व्यवस्था की गई है।


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