बाल विकास विभाग की कारगर योजनाओं से ही कुपोषण से मिला मुक्ति, 2668 केन्द्रों पर पौष्टिक आहार के लिए बच्चों, महिलाओं व किशोरियों में आ रही जागरूकता

जिले में तीन वर्षो में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों की सेहत में हो रही है सुधार

रिपोर्ट : आशुतोष गुप्ता

मीरजापुर, (उ0प्र0) : बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी पिछले तीन वर्षो से जब से जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में प्रमोद कुमार सिंह ने संभाला तब से आज तक जिले के सभी केन्द्रों पर कुपोषण से मुक्ति के लिए बच्चों, महिलाओं व किशोरियों को लगातार कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जागरूक कर जिले को कुपोषण मुक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हीं के प्रयासों का फल है कि आज जिले में मात्र केवल 13 बच्चे ही कुपोषण से जंग लड़ रहे है।

बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि जब मैंने जिले में इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को लिया तब यहां पर कुपोषण एक गम्भीर समस्या के रूप में मौजूद पाया। इसके मुक्ति के लिए विभाग की संचालित योजनाओं से लोगों को लाभान्वित कराने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पहुंचाने के लिए प्रयास किया। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत कुपोषण से मुक्ति के लिए केन्द्रों पर विभिन्न प्रकार के योजनाओं को समय-समय पर चलाया जाता रहा। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चे और महिलाये व किशोरियों को पौष्टिक आहार लेने के लिए कार्यकर्ताओं ने हमेशा सुझाव दिया जिससे लोग कुपोषण से जंग लड़ सके और नवजात शिशु भी कुपोषण से मुक्त रहे। इसके अलावा केन्द्रों पर बच्चों का बराबर वजन और लंम्बाई लिया गया और कुपोषण का लक्षण दिखने पर उनके उपचार के लिए मण्डलीय चिकित्सालय में स्थित एनआरसी सेन्टर में भर्ती कराया जाता रहा है जहां पर उनका उपचार डाक्टरों की देखरेख में किया जाता है। इनके कुपोषण से मुक्त होने के बाद ही उनको वहां से छ्ट्टी दिया जाता है। इस प्रयास से जिले में कुपोषण में काफी हद तक स्थिति काबू में लाया गया। जिले में गरीबी के साथ ही साथ शिक्षा व जागरूकता का भी काफी हद तक अभाव रहा है। इससे लोग अपने बच्चों का उपचार डाक्टरों से न कराकर झोला छाप डाक्टरों से कराने में विश्वास करते थे। इस कारण बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते थे। इस समय विभाग से संचालित योजनाओं के बारे में 2668 आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से विस्तारपूर्वक प्रचार प्रसार किया जा रहा है। विभाग की योजनाओं की वजह से अब ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाश लोग अपने बच्चों का अब अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर उपचार करा रहे है। कुपोषण के चलते बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी हद तक कम हो जाती है। इससे कई बीमारियों के ग्रसित होने की आशंका बनी रहती है। कुपोषण से मुक्ति में बाल विकास विभाग के अलावा स्वास्थ्य विभाग भी रात दिन इस क्षेत्र में कार्य कर रहा है। मेहनत का ही फल है कि आज जनपद में कुपोषण की संख्या पर काफी हद तक काबू पाया जा रहा है।

वर्तमान में 13 बच्चों का चल रहा है इलाज

मण्डलीय चिकित्सालय स्थित एनआरसी सेन्टर में बाल विकास विभाग ने 13 बच्चों को कुपोषण की स्थिति में भर्ती कराया है।  इन बच्चों व उनकी माताओं का समुचित तरीके से देखभाल इलाज तथा दवा पौष्टिक आहार की निशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है। एनआरसी में तैनात डाक्टर अशोक सोनकर ने बताया कि 14 दिनों तक बच्चों का उपचार किया जाएगा। स्वस्थ होने पर उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी ।

विकास खण्ड लालगंज निवासिनी रूपाली को जुडवां बच्चियां पैदा हुयी जिनको 6 फरवरी को आंगबाड़ी कार्यकर्ता और उनके क्षेत्र की आशा ने पैदा होने के बाद वजन किया तब वे अतिकुपोषित की श्रेणी में आ गई। तब एएनएम संगीता ने मण्डलीय चिकित्सालय स्थित एनआर0सी0 सेन्टर में भर्ती कराया गया जहां पर डाक्टरों की देख रेख में उनके सेहत में सुधार होने के बाद डाक्टरों ने 16 फरवरी को उनको छुट्टी दे दिया।

विकास खण्ड छानबे निवासिनी रीनू को 10 जनवरी को एक बच्ची को जन्म उसके बाद आंगनबाड़ी केन्द्र पर जब परिवार वालों ने उसका वजन कराया तब उसका वजन दो किलो से कम पाया गया तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शान्ति के कहने पर एनआरसी सेन्टर में भर्ती कराया जो अभी तक एनआरसी सेन्टर में डाक्टर की देख रेख में उनके वजन में सुधार होने के 12 फरवरी को डाक्टरों ने छुट्टी दे दिया।


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