पर्यावरण मंत्रालय व मनपा की लापरवाही के चलते विलुप्त होने की कगार पर मैंग्रोज

आदित्य ठाकरे से ईशान्य मुंबइ कांग्रेस पार्टी अल्पसंख्यक विभाग के जिला उपाध्यक्ष नाजिम सिद्दीकी ने किया मैंग्रोज की सुरक्षा को लेकर व्यापक कड़े कदम उठाने की मांग

रिपोर्ट : यशपाल शर्मा 

मुंबई : पर्यावरण की सुरक्षा करने और बाढ़ को काबू पाने में जहाँ एक तरफ मैंग्रोव नामक वनस्पति काफी हद तक मददगार सिद्ध होती रही है, वहीं दिनों दिन बढ़ती मुंबई की जनसंख्या के कारण मैंग्रोव विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उसके बाद भी पर्यावरण विभाग और मनपा हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। 

ज्ञात हो मुंबई में वर्सोवा, बांद्रा खाड़ी, धारावी, गोवंडी, शिवाजीनगर, लोटस कॉलोनी, रफ़ीक नगर, ट्रॉम्बे, मानखुर्द मंडाला, स्क्रैप, ट्रांजिट कैम्प, मालवणी, चेम्बूर माहुल गांव जैसे स्लम इलाके जो खाड़ी से सटे हुए हैं। दो दशक पूर्व जहां खाड़ी के किनारे मैंग्रोव का जंगल हुआ करता था। वहां वर्तमान समय में कांक्रीट का जंगल या अवैध अतिक्रमण हो जाने से मैंग्रोव के जंगल लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। जबकि समुद्र की आने वाली बाढ़ कटान से बचाने और पर्यावरण की सुरक्षा में मैंग्रोज काफी सहायक होते थे। 

ईशान्य मुंबई कांग्रेस के उपाध्यक्ष नाज़िम सिद्दीकी ने बताया की बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण लोगों ने स्वार्थ बस मैंग्रोज का कत्ल कर अपना घर बसाने  में लगे हैं। जबकि  मनपा और वनविभाग लुप्त होने की  कगार पर पहुंच चुके मैंग्रोज को बचाने में कभी भी पहल नहीं की है। श्री सिद्दीकी ने राज्य के पर्यावरण विभाग और वन विभाग को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये दोनों विभाग भी काफी हद तक मैंग्रोव के लुप्त होने के जिम्मेदार है।

देखने में यह भी आया है कि नागरिक बहुल्य इलाके जो खाड़ी के समीप बसे हैं वहां आज भी मिट्टी की भरनी करके नैसर्गिक बड़े बड़े नालों में मैंग्रोज को काटकर झोपड़पट्टियों को बसाने का कार्य शुरू है। जिसके कारण न सिर्फ विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके मैंग्रोव बल्कि बरसात में कभी भी खाड़ी किनारे बसे झोपड़पट्टियों डूबने के ख़तरा मंडराने लगा है। उल्लेखनीय तौर पर मुंबई कांग्रेस पार्टी के ईशान्य मुंबई अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष नाज़िम सिद्दीकी की ओर से महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे से मैंग्रोज का कत्ल करने वाले असमाजिक तत्वो को पूर्व कहाँ तक फैले हुए थे मैंग्रोज के जंगल और वर्तमान में कहां पर आकर सिमट चुके  है। 

इसका आकलन अंतरिक्ष के सैटेलाइट की तस्वीरों की मदद से मैंग्रोज को नष्ट करने वाले दोषियों पर पर्यवारण को नुकसान पहुंचाने वाले कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कड़ी करवाई करके मौजूदा बचे मैंग्रोज की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम करने की मांग किया है।

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