बेस्ट निजीकरण की ओर अग्रसर, चालक, कंडेक्टर व 400 बसे ठेके पर लेगी बेस्ट

निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में रोष, सुनील गण चर्या ने सरकार पर लगाया बेस्ट उपक्रम के निजीकरण करने की साज़िश रचने का आरोप 

मुंबई : मुंबईकरो कि सेवा करने के लिये चालक, कंडेक्टर व निजी ठेके पर और 400 बिना ऐसी की बसों को बेस्ट के बेड़े में शामिल किया जाने के प्रस्ताव को बेस्ट कमिटि ने हरी झंडी दिखा दी है। कांट्रेक्ट पर चालक, कंडेक्टर, बसे उपलब्ध करके देने को लेकर बेस्ट कर्मचारियों में रोष चरम पर पहुंचने के कारण उफान पर पहुंच चुका है। भविष्य में निजीकारण के विरोध में बेस्ट कर्मीय सडको पर आंदोलन को भी उतर सकते है। कहा जाता है कि मौजूदा समय मे जहां बेस्ट के पास 3600 बसो की संख्या है। जिसमें से 1,100 किराये की बसो का समावेश है। वहीं उल्लेखनीय तौर पर बेस्ट समिति ने बगैर ऐसी की और 400 गाडियों को बेस्ट के बेड़े में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिया है। आगामी आने वाले दो से तीन वर्षो के बीच बेस्ट के बेड़े में 6 हजार के करीब तकरीबन बसों की संख्या पहुंच जायेगी।

बताया जाता है कि एक कंपनी को प्रति किलोमीटर 89 रुपए, 91 पैसे के हिसाब से 10 वर्ष का कॉन्ट्रैक्ट भाड़े में इन बसों को लिया जायेगा। परिमाण स्वरूप बेस्ट प्रशासन जिसके के लिये 942 करोड़ रुपए खर्च करेगा। वहीँ बेस्ट प्रशासन घाटे में चलने की जानकारी किसी से छिपी नही है। वही दूसरी और लॉक डाउन में बेस्ट बसो के प्रवासियों की घटती संख्या को देखते हुए, घटता बेस्ट बस का मुनाफा कम होने के कारण। उसके बाद इतनी बड़ी रकम खर्च करके ठेके पर बस खरीदने को लेकर बेवकूफी भरे कदम के तौर पर मुंबई के राजनीतिक गलियारों में चर्चा छिड़ चुकी है। भाजपा नगरसेवक सुनील गणचर्या ने बेस्ट समिति की मीटिंग में आये इस प्रस्ताव का तुरंत विरोध किया।

सुनील गण चर्या के अनुसार इसके पूर्व भी कॉन्ट्रैक्ट ठेके पर ली गई बसो में भी ठेके पर बस ड्राइवरो, कडेक्टरों की नियुक्ति की जा चुकी थी। भविष्य में बेस्ट को निजीकरण की और ले जाने की महाविकास आघाडी सरकार की साज़िश के तौर पर देखा जा रहा है। जिससे बेस्ट कर्मियों का निजी कारण कर के अस्तित्व खत्म हो जायेगा। सुनील गण चर्या के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट पर 1,942 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे जिसके लिये बेस्ट प्रशासन निधि खर्च करने के लिये लायेगा कहाँ से ? ऐसा सवाल प्रशासन से सुनील गण चर्या कालम 63 के अनुसार बेस्ट, पालिका बसों को चलाने की जवाबदारी होते हुए भी उसका खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। उपरोक्त मामले में बेस्ट महाप्रबंधक सुरेश कुमार बंगड़े ने चुप्पी साध लिया है। कहा जाता है कि आजतक विभिन्न महानगरपालिकाओं ने बसों को ठेके पर लेकर चलाया है, परंतु उसमें ड्राइवर व बस कंडेक्टर को कभी ठेके पर नही नियुक्त किया गया। तो फिर बेस्ट प्रशासन ने कैसे कांट्रेक्ट दरों की नियुक्ति करने का निर्णय किया है, ऐसा सदस्यों के आरोपों की चर्चा गूंजती रही।


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