मुंबई : संताक्रूज़ के स्वामी मुक्तानंद पार्क में 25 दिसंबर को हुई दर्दनाक घटना में न्याय की गुहार

रिपोर्ट : रितेश वाघेला
मुंबई : 25 दिसंबर की सुबह 5 बजे मुंबई में स्थित सांताक्रुज में हुई दिल दहलाने वाली वारदात, ये घटना सान्त क्रूज़ में स्थित सारस्वत सोसायटी के महर्षि मुक्तानंद पार्क जो कि बीएमसी की जागीर है।

जिसमें नव निर्माण का कार्य हो रहा था, जहा 25 दिसंबर की सुबह 4 बजे शोर की अफरा तफरी मची , सैज्जाद मेहबूब खान ,उम्र 30 साल की थी उसे मुक्तानन्द पार्क में काम करने वाले कर्मचारियों ने बांध कर पिट पिट कर हत्या कर दी गई।

सज्जाद को हाथ पैर और लकड़ी द्वारा इस तरह मारा गया था कि उसे भाभा हॉस्पिटल में मृत घोषित किया गया।
जिसके बाद सज्जाद के पार्थिव शरीर को PM के लिए कूपर हॉस्पिटल में लाया गया था।

इस दौरान सज्जाद के बड़े भाई आज़ाद का कहना है कि मुंबई पुलिस हमें हमारे भाई के पार्थिव शरीर के छायाचित्र नहीं लेने दे रहे और कोई निष्पक्ष जानकारी भी नहीं दे रहे।

सज्जाद के पार्थिव शरीर को घर लाया जब से परिजनों सान्ता क्रूज़ पोलिस को फरियाद के लिए निवेदन कर रहे थे, पर स्थानिक पोलिस इस में विलंब कर रहे थे। बाद में सज्जाद के भाई आज़ाद ऑर उनके परिवार की महिला ने सान्ता क्रूज़ पोलिस से आक्रोश व्यक्त करते संता क्रूज़ पोलिस वरिष्ठ अधिकारी श्री राम कोर्गांवकर से बात कर के इस विषय में निष्पक्ष जांच की मांग की।

सांता क्रूज़ पुलिस अधिकारी महेश बोलकोटगी ने बताया की ये घटना सांताक्रुज पोलिस उप निरीक्षक दीपाली पाटिल को शाम 7 बजे माहिती मिली और रात में 11.30 तक गुनाह दाखिल किया गया,

उसके बाद सांताक्रुज पोलिस ठाणे के वरिष्ठ पोलिस निरीक्षक श्री राम कोरगांवकर सर ने आगे की जांच के लिए इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर महेश बोलकोतगी जी को सौंपा गया, उसके बाद महेश बलकोटगी जी ने स्वामी मुक्तानंद पार्क के सेक्युरी ऑर मुकादम कल्लु को बात करने पोलिस ठाणे लाया गया, जभी उन लोगो 5 मजदूर की जानकारी महेश जी को दी, मूकादम ओर सेक्योरी द्वारा दी गई जानकारी के चलते उन्हें हिरासत में लिया गया। 2 दिन बाद इन आरोपी ने ऑर दो लोगो की जानकारी दी। सभी से बात करने के लिए बांद्रा कोर्ट ने समय दिया है। PM की रिपोर्ट आगे की इस विषय में पूष्ठी करवाएगी?

आज़ाद मेबुब खान, ये सिज्जाद का बड़ा भाई हैं, और फरियाद की गुहार भी इस ने लगाई है, आजाद का कहाना है कि मेरे भाई को मार के चोर का नाम जोड़ा जा रहा है, वारदात के समय आज़ाद नहीं था पर जभी सैज्जाद को घर के पास लाया गया जब तक वो तड़प रहा था, उसके हाथ-पैर को बांधा लगता है, ओर हद से ज्यादा मारा है, जिसके कारण उसका मृत्यु हुआ।

यदि सज्जाद वहा कुछ करने आया था तो उन लोगो ने पुलिस को खबर क्यों नहीं की? क्यों खुद ही मारने लगे? सज्जाद को मारने कि प्रेरणा मजदूर को कैसे आयी? इस मुक्तानन्द पार्क में ऐसे कई अश्लील कार्य होते है तो उन्हें क्यों नहीं मारा? इस पार्क के कर्मचारी लोगो की दादागिरी के कई किस्से सामने आए हैं। ये बच्चो को पीटते हैं, रात के अंधेरे में कई गलत काम होते हैं, क्या उनका मालिक उनको उतनी छुट देता था?

इस पूरे प्रकरण में सांता क्रूज़ पोलिस ने मजदूर पे मुक़दमा दाखिल किया पर इनकी कंपनी का नाम या इनके मालिक का किसी का भी नाम नहीं जोड़ा। आज इस स्वामी मुक्तानंद पार्क एक संत के नाम पे हो रहे गलत काम की जगह बन गई हैंं। पैसे वालों को इस विषय से बाहर कर गरीब मजदूर को फसा कर विषय को दबा ने कि कोशिश का प्रकरण चल रहा है।

इस पूरे प्रकरण में गुने गार की निर्णय तो न्यायालय ही ले सकती हैं, पर जो घटना घटी है, ओर PM के जवाब पर ही पूरी बात की जा सकती हैं। देखने की बात ये है कि सांताक्रुज पोलिस इस विषय कि किस तरह जांच करती हैं? क्या पोलिस इस कॉन्ट्रैक्टर और BMC कर्मचारी को बात करने बुलाएगी? या इस कॉन्ट्रैक्टर के ऊपर रोक लगाएगी।

सज्जाद के परिवार ने हमारे सवांदाता रितेश वाघेला से बात करते बताया की इस विषय को प्रकाशित कर मुंबई पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह, गृह मंत्री अनिल देश मुख, महाराष्ट्र और हमारे देश की जनता तक इस बात को पहुंचाने की गुजारिश करते हुए न्याय दिलाने का अनुरोध किया है।

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