2021-22 : बजट से क्या हैं उम्मीदें ?

मुंबई : केंद्रीय बजट 2021 कुछ ही दिन दूर है। इस वर्ष, बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ बजट अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। निवेशकों ने या तो अपने संबंधित पोजिशन ले ली है या नित नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। इस वजह से इस बात का महत्व बढ़ जाता है कि डाइनामिक्स किस तरह बदल रहे हैं और इस वर्ष के बजट से शेयर बाजार क्या उम्मीद कर रहा है। इसलिए एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट-डीवीपी श्री ज्योति रॉय ने यहां कुछ कारक दिए गए हैं जो आपको तैयार रखेंगे।

राजकोषीय घाटे का उत्सुक मामला: वित्त वर्ष 2021 और यहां तक कि वित्त वर्ष 2022 में बजट का मुख्य फोकस राजकोषीय घाटे के आंकड़ों के आसपास रहने वाला है। भले ही सरकारी खर्च में कटौती हो या नहीं। स्पष्ट रूप से कहा जाए तो यह उम्मीद से काफी अधिक रहने वाला है। पिछले साल राजकोषीय घाटा 3.8% हो गया जबकि बाजार का अनुमान 3.6% था। यह बिना कहे माना जा सकता है कि इस साल यह 3.8% से ऊपर रहेगा। कुछ महीने पहले, बाजार इसे लगभग 8% होने की उम्मीद कर रहा था। शुक्र है कि यह आंकड़ा घटकर अब 6.5% से 7% पर आ गया है।

वित्त वर्ष 2021 में वृद्धि के संदर्भ में, नॉमिनल जीडीपी 14% से 15% तक बढ़ने की उम्मीद है, जबकि वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 9% से 10% होने का अनुमान है। मुद्रास्फीति का अनुमान लगभग 5% है। इसलिए, अगले साल अच्छी वृद्धि दर की उम्मीद है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2022 में भी राजकोषीय घाटा अधिक रहने वाला है। उम्मीद 4.5% से 5.0% के आसपास है। जब तक घाटा वित्त वर्ष 2021 में 7% और वित्त वर्ष 2022 में 5% रहेगा, तब तक बाजार सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा। चूंकि हम महामारी से बाहर आ रहे हैं, इसलिए सरकारी खर्च समय की जरूरत है। लोग इस मोर्चे पर किसी भी कटौती की उम्मीद नहीं करते हैं।

बाजार क्या उम्मीद कर रहे हैं?

इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार का पहला फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा। सरकार बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना जारी रख सकती है। हम वित्त वर्ष 2021 में पूंजी आवंटन पर कोई कटौती देखने नहीं जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2022 में, बुनियादी ढांचे पर महत्वपूर्ण खर्च होने की उम्मीद है। बजट में नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के लिए अतिरिक्त खर्च की व्यवस्था की भी संभावना है।

आवास: हम प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में अधिक से अधिक आवंटन देख सकते हैं और इसे लागू करने पर जोर रहेगा। इस पहल को बढ़ावा देने के लिए, सरकार अपने कब्जे वाली संपत्ति के लिए आवास ऋण पर ब्याज में छूट बढ़ा सकती है। इसे संभवतः वर्तमान 2 लाख रुपए की सीमा से बढ़ाया जा सकता है।

ग्रामीण और कृषि: ग्रामीण और कृषि क्षेत्र पर निरंतर जोर दिया जा रहा है। इसलिए, हम ग्रामीण क्षेत्र के लिए अधिक बजटीय आवंटन देख सकते हैं। कृषि क्षेत्र के लिए कुछ नए प्रावधान किए जा सकते हैं।

आयकर: व्यक्तिगत आयकर के मोर्चे पर, यह संभावना है कि सरकार धारा 80 सी में कर स्लैब और कटौती को रीस्ट्रक्चर कर सकती है। हालांकि, सरकार के पास ऐसा करने के लिए बहुत अधिक राजकोषीय स्थान नहीं है। यह खर्च पक्ष पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा।

विनिर्माण: विनिर्माण क्षेत्र में सरकार अधिक से अधिक क्षेत्रों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को जारी रख सकती है। यह पहले ही आत्मनिर्भर भारत अभियान 2.0 में हो चुका है। हम आयातित वस्तुओं जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, टायर आदि के लिए ड्यूटी बढ़ती देख सकते हैं। विभिन्न वस्तुएं भी बहुत कम आयात शुल्क को आकर्षित कर रही है। सरकार उन पर भी आयात शुल्क लगा सकती है। व्यापक फोकस घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर होगा।

सेस और सरचार्ज: दूसरी तरफ, सरकार अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपकर या अधिभार लगा सकती है। कोविड-19 के कारण काफी खर्च होने वाला है। कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के लिए रूपरेखा बनाई जाएगी। तो, यह सरचार्ज बढ़ सकता है या इस वर्ष के बजट में एक कोविड सेस शामिल हो सकता है। इस तरह के उपकर और अधिभार एक निश्चित सीमा सीमा से ऊपर कमाने वाले लोगों को टारगेट करेंगे। यदि इस तरह के सेस आते हैं तो वह एकवर्ष से दो वर्ष तक वसूले जा सकते हैं।

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