मिश्रित संकेतों से निवेशकों में अनिश्चितता आने से क्रूड ऑइल और मेटल्स में गिरावट

मुंबई : एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च एवीपी श्री प्रथमेश माल्या ने बताया कि मंगलवार को निवेशकों में अनिश्चितता का भाव रहा और मेटल्स व एनर्जी सेग्मेंट्स में गिरावट देखी गई। प्रमुख बाजार वैक्टरों में से एक अमेरिकी कांग्रेस की कार्यवाही थी जिसमें $ 900 बिलियन के कोरोनावायरस-राहत पैकेज पर डील होती नजर आई। हालांकि, मजबूत डॉलर और कोविड-19 मामलों की नई लहर, जिसने विशेष रूप से पूरे यूरोप में लॉकडाउन लगाने को मजबूर किया है, ने वैश्विक निवेशकों को अनिर्णय की स्थिति में छोड़ दिया है।  

क्रूड ऑइल: मंगलवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड 47 डॉलर प्रति बैरल या 1.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, क्योंकि कोरोना के नए स्ट्रेन की ताजा लहर ने बाजार की आशंकाओं को बढ़ावा दिया। मजबूत डॉलर ने भी कच्चे तेल की कीमतों को दबाव में रखा। यूरोप में कई अर्थव्यवस्थाओं और विशेष रूप से यूके में मूवमेंट्स पर प्रतिबंध लग गए हैं। यह नुकसान सीमित था क्योंकि अमेरिकी नीति निर्माता वायरस राहत बिल पर एक समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसके अलावा, घटते अमेरिकी कच्चे स्टॉक और आर्थिक परिदृश्य के सुधार पर आशावाद ने पिछले सप्ताह में कीमतों में वृद्धि की थी। एनर्जी इंफर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्टों के अनुसार पिछले हफ्ते अमेरिकी कच्चे माल की कीमत 3.1 मिलियन बैरल रही थी।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ते मामलों और ताजा लॉकडाउन की सीरीज का खामियाजा उठा सकती हैं।

बेस मेटल्स: एलएमई पर बेस मेटल की कीमतें कोरोनोवायरस मामलों और डॉलर में मजबूती के चलते लाल रंग में बंद हुईं। औद्योगिक धातुओं को उम्मीद की एक किरण अमेरिका की ओर से राजकोषीय प्रोत्साहन के साथ-साथ वैक्सीन डेटा से मिली।

इंटरनेशनल एल्युमीनियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2020 में ग्लोबल एल्युमीनियम प्रोडक्शन 4.1 प्रतिशत बढ़ा है और 5.471 मिलियन टन रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) ने आगे संकेत दिया कि नवंबर 2020 में चीनी औद्योगिक उत्पादन में 7 प्रतिशत (साल-दर-साल) की वृद्धि हुई थी। महामारी की वजह से लगाए गए प्रतिबंधों के कमजोर पड़ने और उपभोक्ता खर्च में सुधार ने चीन में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया था।

कॉपर: कॉपर 1.3 प्रतिशत गिरकर 7,746.5 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर में मजबूती औरआने वाले समय में डिमांड को लेकर आशंकाओं का असर लाल धातु पर पड़ा। सितंबर तक ग्लोबल रिफाइंड कॉपर मार्केट का घाटा इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप के अनुसार बढ़कर 155,000 टन हो गया है, जो अगस्त 2020 में 72,000 टन था। कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर रेड मेटल की संभावनाएं थोड़ी कम हैं।

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