मुंबइ के सरकारी फेरिफेरल अस्पतालों में आधुनिक मशीनों का अभवों के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की मार झेल रहे है झोपड़पट्टियों के गरीब मरीज

रिपोर्ट : यशपाल शर्मा

मुंबई : मनपा एम/पूर्व अंतर्गत आने वाले शिवाजीनगर मानखुर्द विधानसभा क्षेत्र में आने वाले दो सरकारी सेमी फेरिफेरल अस्पतालों में, पहले से ही शताब्दी और राजावाड़ी में आधुनिक मशीनों का अभाव के कारण विधंसकभ क्षेत्र के गरीब झोपड़पट्टियों में रहने वाले मरीजों को मुंबई के बड़े-बड़े अस्पतालों के सहारे रहना पड़ रहा है ।

परिणाम स्वरूप राज्य की महाविकास आघाडी सरकार सहित राज्य का स्वस्थ विभाग के मंत्री राजेश टोपे ने सुध लेने जरूरी नही समझा । इतना ही नही मनपा प्रशासन से लेकर ईशान्य मुंबइ भाजपा सांसद मनोज कोटक व सपा विधायक अबु आसीम आज़मी ने कभी अपने फण्ड से सरकारी अस्पतालों में आधुनिक मशीनों से जूझते राजावाड़ी,शताब्दी अस्पताल में अभी तक एक भी स्थापित नही करवाई ।हार्ट की चेक आप की ईसीजी से बड़ी मशीनें ,एमआरआई, पथरी के बगैर आपरेशन वाली दूरबीन वाली मशीन ,कान के मरीजों की मशीनें ऐसे अनगिनत मशीनों की कमी की मार झेल रहे है सरकारी अस्पताल ।

झोपड़पट्टियों बाहुल क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव  

वहीं अब दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है शिवाजीनगर मानखुर्द विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न झोपड़पट्टियों बहुल इलाका काबिल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है ।एमबीएबीएस व एमडी डॉक्टरों के अभवों में झोला छाप डॉक्टरों के हाथों जान गवाने को मजबूर है गरीब जनता ।

आखिर कब तक राज्य की उद्धाव सरकार व राज्य का स्वस्थ मंत्रालय के मंत्री राजेश टोपे मुंबइ महानगर के विभिन्न उपनगरों में स्थित सरकारी फेरिफेरल अस्पतालों को कब हाई-टेक करेगी ,चरमराई लाचार मुंबई के सरकारी अस्पतालों की स्वस्थ सुविधा को चुस्त दुरुस्त करेगी ।

झोला छाप डॉक्टरों के हवाले है झोपड़पट्टियों में इलाज की व्यवस्था -

जिसका खामियाजा  झोपड़पट्टियों में रहने वाली गरीब मरीजों को बीएचयूएमएस, बीएमयूएस जैसे यूनानी एलोपैथिक , होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक , एलोपैथिक जैसे डॉक्टरों के भरोसे रहना पड़ रहा है। कहा जाता है कि इस क्षेत्र के अधिकतर डॉक्टर कर्नाटक, हैदराबाद, बंगलुरू से डिग्री लाकर अपनी डिस्पेंसरी झुग्गियों में खोलकर बैठे हुए है। 

मामले में विशेषज्ञ डॉक्टरों का क्या कहना है -

चेंबूर के अंबेडकर गार्डन स्थित दास हॉस्पिटल के संचालक डॉ. दास से हिंदमाता के पत्रकार ने सरकारी अस्पतालों में मशीनों की कमी से लेकर झोपड़पट्टियों में काबिल डॉक्टरों की कमी को लेकर प्रतिक्रिया हेतु संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि सन 1994 में 220 एमबीएबीएस डॉक्टरों की लिस्ट हुआ करती थी वह आज भी आगे नही बढ़ी वहीं पर स्थिर है, तो भला एमडी डॉक्टरों की संख्या कैसे बढ़ेगी ।

हालांकि इस तरह की अवैध सीसीआईएम की नोटिफिकेशन खिचाड़ा फिकेशन मेडिकल की पढ़ाई और डॉक्टरों की प्रैक्टिस राष्ट्री शिक्षा नीति और नीति आयोग के विरोध में मिशन सेव हेल्थ केअर मुहिम चला चुके है लेकिन कोई फर्क नही देखने को मिला है ।

ऐसे हालात के लिये राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिये मेडिकल कॉलेज की सीट के लिये एडमिशन प्रोसेस क्राइटेरिया को थोड़ा लचीला बनाने की जरूरत है ताकि झोपड़पट्टियों में निवास करने वाली जनता को भी काबिल स्वस्थ विशेषज्ञ एमडी,एमबीएबीएस डॉक्टरों की सस्ते में सेवाएं उपलब्ध हो सके।

Comments