दलित समाज के उथान को लेकर संघर्ष निरंतर जारी रहेगा : पूर्व मंत्री चंद्रकांत हंडोरे

- रिपोर्ट : यशपाल शर्मा

मुंबइ : राज्य भर में 2004 से लेकर 2009 के दरम्यान आघाडी सरकार में सामाझ कल्याण मंत्री रहे चुके पूर्व मंत्री चंद्रकांत हंडोरे ने अंबेडकरी विचारों के वसा को अपने मजबूत कंधे पर लेकर अपने युवा अवस्था मे एक नवजवान दलित युवक पैंथर लेकर चला था। फिर चाहे वह मराठवाड़ा विद्यापीठ का नाम बदलने काआंदोलन हो या टिडल्स प्रकरण हो न भूतों न भविष्यत ऐसा हुतात्मा चौक पर निकाला गया मोर्चा हो, इन सभी भूमिका को बड़ी ही बखूबी से इस दलित पैंथर ने पूरी की थी। राजकरण में सक्रिय होने की इच्छा शक्ति के कारण रिपब्लिक पार्टी के नगरसेवक व उसके बाद सीधा मुंबइ के महापौर के तौर पर अपनी राजनीतिक भूमिका अदा किया। महापौर बनते ही सरकारी अस्पतालों के केस पेपर की फीस तक माफ कर दिया। चैत्यभूमि परिसर का सुशोभीकरण करवाया , इतना ही नही मुंबइ के पहले कैंसर अस्पताल के निर्माण में अहम भूमिका अदा किया। कहा जाता है सन 2000 में कांग्रेस पार्टी में पक्ष प्रवेश कर 2004 में हुई विधानसभा चुनावों में पहेली बार विधायक बने व इसके साथ मंत्रिमंडल में सामाजिक न्याय मंत्री बनने की लॉटरी लगी।

बताया जाता है कि सामाजिक विभाग क्या होता है ,यह दलित समाज के उथान को लेकर जामिन पर उतारी गई लोक कल्याणकारी योजनाओं से महाराष्ट्र राज्य को दिखा दिया ।आज राज्य के प्रयतेक जिले में दिखने वाला सामाजिक न्याय भवन यह चंद्रकांत हंडोरे की ही देन है। राज्य के गरीब दलित बच्चों के 100 झोपड़पट्टियों ग्रामीण भागो में स्कूल शुरू किये गये। विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप तक बढ़ा दिया। भूमिहीनों को जामिनो का वितरण कर खेती कर के परिवार का पेट भरने के लिये आर्थीक तौर पर समृद्ध किया। अनेक लोगो को उद्योग स्थापित करने के लिये भाग भांडवल की व्यवस्था किया। चंद्रकांत हंडोरे ने अधिकतर अपने  कार्यकाल में दलित समाज ,पिछड़ा वर्ग को के उथान को लेकर अनेक कल्याण कारी योजनाओं को जामिन पर उतारकर समाज  के लिये लागू करवाया था।

2009 में भीमशक्ति संघटना के जरिये राज्य के मराठ वाड़ा ,पलटन व पश्चिम महाराष्ट्र में इस संघटना ने अपनी जेड मजबूत किया है चंद्रकांत हंडोरे के नेतृत में ,आज जामिनि स्तर के एक बड़े दलित लोक नेता के तौर पर अपना राजनीतिक कद तब्दील किया है । कहा जाता है कि वर्तमान समय मे उनके कार्य काल मे लागू किया गया दलित समाज की योजनाएं ठीक तरह से क्रियविंत नही कर पा रही है वर्तमान सहित पूर्व की राज्य सरकारे । उल्लेखनीय तौर पर मध्यकाल के दौरान बीजेपी की सरकार राज्य में बनी लेकिन  सामज की  योजनाओं की लगु करने के लिये अपेक्षा नही किया था ।लेकिन उसके बाद फिर से आघाडी की सरकार राज्य में अस्तित्व में आई है एक वर्ष से लेकिन इन्होंने भी अभी तक दलित समाज के उथान के बारे में कोई ठोंस कदम उठाते नही दिखाई पड़ रहे है ।उल्लेखनीय तौर पर राज्य में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की 6 दिसंबर की जयंती के अवसर पर मीडिया से बोलते हुए पूर्व मंत्री चकन्द्रकांत हंडोरे ने कहा कि परेल में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की स्मारक बनाने का कार्य हो, दलित समाज के उथान की बात हो , भिमा कोरेगांव में एट्रोसिटी संभाजी भिड़े जैसे नेताओं को बेड़िया ठोंकने का कार्य अभी तक  क्यों नही किया रानी सरकार ने सामाझ में द्वेष फैलाने वाले को अभी तक क्यों नही  गिरफ्तार किया गया।

कहा जाता है कि  भीम शक्ति संगठन के कार्यकर्ता जो पिछले बीस वर्षों से कांग्रेस पार्टी की हर चुनवों चाहे वो लोकसभा, विधायक,महानगर पालिका का ही क्यों न हो कांग्रेस पार्टी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे है ,फिर चाहे वो कांग्रेस पार्टी का आंदोलन, मोर्चा ही क्यों न रहा हो ।ऐसे दलित समाज के निष्ठावान कार्यकर्ताओ का कम से कम कांग्रेस पार्टी में सम्मान तो मिलना चाहिये ।दलित समाज का कार्यकर्ता कोई पद की लालसा नही रखता। कांग्रेस पार्टी मागस्वर्गीय सामाझ के लिये महामंडल की विभिन्न कमिटियों में बेरोजगार दलित युवकों को लेना चाहिए। हाल ही में मुंबई कांग्रेस अध्क्षय एकनाथ राव गायकवाड़ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चर्चा में आये चंद्रकांत हंडोरे  कांग्रेस पार्टी को जय महाराष्ट्र करने की घोषण मात्र से ही महाराष्ट्र राज्य की  राजनीतिक से लेकर दिल्ली तक कि राजनीतिक भूकंप लाकर पत्रकारो के सवालों का बड़े ही  बेबाकी से जवाब देते हुए  विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के भीतर घात करने वाले कार्यकर्ता को कैसे मुंबइ कांग्रेस अध्क्षय एकनाथ राव गायकवाड़ परदे के पीछे से समर्थन करते रहे,कैसे उस गद्दार कार्यकर्ता को  बहुजन आघाडी का विधानसभा चुनावों का टिकट दिलाकर विरोध में  उतारकर खुद हारा मुझे भी हराया।

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