लॉकडाउन में ज्यादातर लोग गैस्ट्रिक विकारों से पीड़ित

 मार्च से सितंबर के बीच १२२ मरीजों पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी

मिरारोड वॉकहार्ट अस्पताल में हुई सर्जरी

मिरारोड, (मुंबई) : कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन जारी किया गया था। लॉकडाउन की इस अवधि के दौरान, कई लोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों से पीड़ित थे। कोरोना संक्रमण के कारण बहुत से लोग अपने घर से बाहर निकलने से डरते थे। पेट में दर्द, मतली,  संक्रमण और रक्तस्राव के कारण हालत बिगड़ने पर मरीज को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऐसे मामलों में, सर्जरी करना जरूरी था। तदनुसार मार्च से सितंबर के बीच १२२ मरीजों पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी की गई। मिरारोड वॉक्हार्ट अस्पतालद्वारा किए गए सर्वेक्षण में यह सामने आया है।

कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारत में तालाबंदी की घोषणा की गई थी। जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता गया। कोविद -१९ से संक्रमित होने के डर से लोग इलाज के लिए डॉक्टर के पास आने से डरते थे। समय रहते इलाज न मिला तो मरीज की बिमारी बढ सकती है। इसे देखकर लॉकडाउन के दौरान वॉकहार्ट अस्पताल ने सभी प्रकार के कैंसर, सौम्य बीमारियों और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को जारी रखा था। उसके कारण, लॉकडाउन के दौरान गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से पीड़ित रोगियों का इलाज करना संभव हो गया है।

मिरारोड के वॉकहार्ट अस्पताल में सलाहकार सर्जिकल गैस्ट्रो और जीआई ऑन्कोसर्जरी इमरान शेख ने कहॉं की, “अस्पताल द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, २२ मार्च से ३० सितंबर के बीच १२२ मरीजों की गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी हुई है। सर्जरी करने वाले ५२ मरीज ५० से ७० वर्ष की आयु के थे। ३० से ४० की उम्र के बीच २५ मरीजों पर सर्जरी की गई है। यह मरीज पेद दर्द से पिडित थे। सर्जरी कराने वाले कुल मरीजों में से ६९ महिलाएं थीं। ६५ लोगों की ओपन सर्जरी हुई और ५७ लोगों की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी हुई। पांच जीआई कैंसर मरीजों की भी सर्जरी हुई। ”

"अगर मरीज जल्दी इलाज के लिए नहीं आते हैं तो बिमारी बढ सकती है। इसलिए यदि आपको कोई समस्या है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि समय पर इलाज से मरीज जल्दी ठीक हो सकता है, ” डॉ. शेख ने कहा।

डॉ शेख ने आगे कहा, "जठरांत्र संबंधी समस्याओं के मरीजों का इलाज करते हुए कोविद -१९ प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर व्यक्ति का थर्मल परीक्षण किया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रोगी के साथ एक रिश्तेदार को रहने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा, ओपीडी विभाग के लिए नियमों को भी लागू किया गया था। लिफ्ट में लोगों की संख्या भी सीमित रखी गई है। अस्पताल को हर घंटे साफ किया जा रहा है। ”

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