ग्लोबल हॉस्पिटल में ‘टोटल लेप्रोस्कोपिक डोनर हेपेटेक्टोमी’ सर्जरी द्वारा एक साल के बच्चे को लिव्हर डोनेशन

पश्चिम भारत में इस तरह की यह पहली सर्जरी है

इस सर्जरी द्वारा लिव्हर का भाग कम से कम छिद्र से हटाने से भविष्य में डोनर को होने वाली जटिलताओं से जल्दी निजात पाने में मदद मिलती है – डॉ. मोहंका

मुंबई : परेल स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में पश्चिम भारत के पहले टोटल लेप्रोस्कोपिक डोनर हेपेटेक्टोमी सर्जरी द्वारा 32 वर्षीय व्यक्ति ने अपने लिव्हर के हिस्से का दान करके अपने एक साल के बच्चे की जान बचाई है। ग्लोबल अस्पताल के लिव्हर प्रत्यारोपण और एचपीबी सर्जरी विभाग के मुख्य सर्जन डॉ. रवी मोहंका के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सर्जरी की गई।

टोटल लेप्रोस्कोपिक डोनर हेपेटेक्टोमी सर्जरी नाभि के नीचे एक छोटा सा छेद करके यह सर्जरी की जाती है। लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT) सर्जरी अब ऑर्गन वेटिंग लिस्ट के मरीजों की मृत्यु दर को कम कर रही है। कई मरीजों को दाता से प्राप्त लिव्हर के कारण नया जीवन मिल रहा है।

नयूम खान एक साल का लड़का हैजो जन्म से ही एक दुर्लभ लिव्हर की बीमारी से पिडित है। दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल में लड़के की सर्जरी हुई। लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआउन्हें आगे के उपचार के लिए ग्लोबल अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि यहां मेडिकल टेस्ट के बाद लिव्हर प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प है। तदनुसार 32 वर्षीय वजीन खान इनोने बच्चे की लिव्हर दान करने का फैसला किया। उसके बाद इस बच्चे पर लिव्हर प्रत्यारोपण सर्जन की गई। हर 10,000 नवजात शिशुओं में से एक बच्चे को यह बीमारी होती है। इसपर ट्रांसप्लांट के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल के लिव्हर प्रत्यारोपण और एचपीबी सर्जरी विभाग के मुख्य सर्जन डॉ. रवी मोहंका ने कहॉं की, लड़के को बिलीअरी अट्रेसिया नामक एक दुर्लभ बीमारी के लिए सर्जरी की गई थी। हालांकिउन्हें इलाज के लिए मुंबई लाया गया क्योंकि उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मेडिकल टेस्ट के बाद बच्चे की जान बचाने के लिए लिव्हर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। तदनुसारपिता ने लिव्हर दान करने की इच्छा व्यक्त की। लेप्रोस्कोपिक सर्जिकल तकनीक का उपयोग करके हेपेटोक्टोमी करने का निर्णय लिया गया। इसमें एक दूरबीन के माध्यम से यकृत के हिस्से को निकाल दिया जाता है। टोटल लेप्रोस्कोपिक डोनर हेपेटेक्टोमी सर्जरी एक सुरक्षित विकल्प है। यह दर्द को कम करता हैरक्तस्राव को कम करता है और जटिलताओं की संभावना को कम करता है। यह विकल्प युवा दाताओं के लिए बहुत फायदेमंद है।”

ग्लोबल हॉस्पिटल कैडवेरिक लीवर ट्रांसप्लांट के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. प्रशांथा राव कहॉं की, लिव्हर डोनेशन (लगभग 15-20 सेमी) की प्रक्रिया के दौरान एक छेद बनाना पड़ता है। इस सर्जरी से दाता को 2-3 साल तक दर्द महसूस हो सकता है। हालांकिटोटल लेप्रोस्कोपिक डोनर हेपेटेक्टोमी सर्जरी से दाता को कोई दर्द नहीं होता हैशरीर पर कोई निशान नहीं होते हैं और जटिलताओं के विकास की संभावना बहुत कम होती है। ”

बाल रोग लिव्हर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉं अनुराग श्रीमाल ने कहा, “सभी दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए यकृत प्रत्यारोपण की सफल सर्जरी की है। बच्चे की हालत में सुधार होने पर परिवार जल्द ही दक्षिण अफ्रीका लौटेगा। ”

हमारे अस्पताल में लिव्हर सर्जरी के लिए डॉक्टरों की टीम मरीजों को उच्च गुणवत्ता की सुविधा प्रदान कर रही है। कुछ ही केंद्रों में लेप्रोस्कोपिक डोनर हेप्टेक्टॉमी सर्जरी की जाती है। हमें खुशी है कि हमारे अस्पताल में इस तरह की सर्जरी की गई। सर्जरी लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया द्वारा की जाती है और यकृत का हिस्सा दाता से लिया जाता है। यह प्रक्रिया बहुत आसान है और कई लोगों को यकृत के लिए इंतजार कर रहे लोगों को लिव्हर दान करने के लिए प्रोत्साहित करेगी”ग्लोबल हॉस्पिटल (मुंबई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विवेक तलौलीकर ने कहॉं।

मरीज वज़ीर खान ने कहा, "मैं ग्लोबल अस्पताल में डॉक्टरों की टीम द्वारा किए गए उपचार के लिए आभारी हूं। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि बच्चा अब रो नहीं रहा हैलेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान है। यह मेरे लिए बहुत खास है। मुझे सर्जरी के बाद बहुत दर्द नहीं हुआ। हमने इलाज के लिए भारत आने का जो फैसला कियावह सही था।"

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