सलाम बॉम्बे फाउंडेशन की वर्चुअल जोन प्रतियोगिता में स्टूडेंट्स और टीचर्स ने हिस्सा लेकर तंबाकू नियंत्रण और पोषण के महत्‍व पर जोर दिया

कोविड-19 महामारी के बीच आयोजित इस वर्चुअल इवेंट में गरीब घरों के संसाधन विहीन बच्चों को पुरस्कार के रूप में डेटा पैक दिए गए, ताकि उनकी इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरतों को पूरा किया जा सके

मुंबई : अगर लोग केवल यही जानते कि मैं कला में महारत हासिल करने के लिए कितनी मेहनत करता हूं तो यह उतना अच्छा नहीं लगता!” माइकल एंजेलो ने दुनिया भर में मशहूर अपनी कृतियों के बारे में यह कहा था। सलाम बॉम्बे फाउंडेशन ने कला को एक माध्यम के रूप में प्रयोग करते  हुए भव्य पैमाने पर एक वर्चुअल इवेंट आयोजित किया, जिसका शीर्षक  कोविड-19 महामारी के बीच तंबाकू नियंत्रण और पोषण के लिए स्टूडेंट्स और टीचर द्वारा की गई खोजपरक पहलें था। यह सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए स्वस्थ रहन-सहन पर अपने विचारों को प्रकट करने के लिए सबसे बड़े प्लेटफॉर्मों से से एक था। लगातार बदलती लाइफस्टाइल के इस युग में यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इस साल इस जोनल इवेंट के 15वें संस्करण का आयोजन वर्चुअल रूप में किया गया। इस कार्यक्रम में छात्रों ने अपने अध्यापकों की मदद और मार्गदर्शन से शिल्पकारी, चित्रकारी, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता में भाग लिया। इसके अलावा उन्होंने अभिनय, गाना गाने और प्रजेंटेशन के सोलो वीडियो बनाए। इस बार टीचर्स भी इस प्रतियोगिता का हिस्सा बने, जिनका मूल्यांकन इस महामारी के दौरान ऑनलाइन टीचिंग के नए-नए आइडियाज पेश करने के आधार पर किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन और प्रबंधन पूरी तरह से सलाम बॉम्बे फाउंडेशन के प्रिवेंटिव हेल्थ प्रोग्राम से जुड़े युवा छात्रों ने किया। यह बच्चों द्वारा बच्चों के लिए आयोजित किए गए वर्चुअल इवेंट की शानदार मिसाल थी। इस इवेंट के फिनाले में शनिवार को सभी चार श्रेणियों में 120 स्कूलों के 300 बच्चों और 40 टीचर्स से एंट्रीज आईं। इस वर्चुअल इवेंट के जजों में बीएमसी के स्कूली बच्चों के क्राफ्ट टीचर श्री योगेश कुराडे, मराठी और हिंदी ड्रामा के एक्‍टर और निर्देशक श्री धम्मरक्षित रांडीव, मुंबई महानगर पालिका में एनएसटी विभाग में आर्ट सेंटर हेड श्री प्रमोद रघुनाथ महाजन और ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) में म्यूजिक और आर्ट्स डिपार्टमेंट की हेड सुवर्णा घाईसास शामिल थीं।

इस इवेंट ने जोखिम के दायरे में आने वाले गरीब और संसाधन विहीन बच्चों को कला के विभिन्न रूपों में अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का बड़े पैमाने पर अवसर दिया। स्टूडेंट्स ने तंबाकू नियंत्रण और खान-पान की स्वस्थ आदतों पर बल देते हुए अपने विचारों को अभिव्यक्त कर उनका प्रसार किया। किशोरों में स्वस्थ बर्ताव से जुड़े सकारात्मक नतीजों को बच्चों ने अपनी सोलो स्किट, गानों, प्रजेंटेशन, पोस्टर और क्राफ्ट के माध्यम से पेश कर समाज को संदेश दिया। कोविड के कारण उनके सामने आई चुनौतियों के बावजूद नई-नई चीजें सीखने का उत्साह और बच्चों के मन में आने वाले नए-नए विचार उन्हें शानदार कलाकारी और परफॉर्मेंस के साथ सामने आने से नहीं रोक सके।

सलाम बॉम्बे फांडेशन में प्रिवेंटिव हेल्थ और न्यूट्रिशन की वाइस प्रेसिडेंट सुश्री त्शेरिंग डी. भूटिया ने कहा, बीएमसी के बच्चों को सालाना आधार पर दिया जाने वाला एक एक्‍सपेरिएंशल मंच है। इस पर वह तंबाकू नियंत्रण और तंबाकू से मुक्त माहौल में रहने के अपने अधिकारों के संबंध में अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकते हैं। इस वर्ष महामारी इस इवेंट को ऑनलाइन आयोजित किए जाने में मुख्य उत्प्रेरक रही। हालांकि इस इवेंट का फोकस पोषण पर भी था, जिसकी महामारी के दिनों में प्रासंगिकता काफी बढ़ गई है। खराब पोषण मिलने से कई नकारात्मक नतीजे सामने आते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई के परिणाम तो खराब होने के साथ ही उनके शारीरिक और भावनात्मक विकास पर भी बुरा असर देखने को मिलता है। अपर्याप्त पोषण मिलने से कमजोरी के कारण बच्चों का मन किसी गतिविधि में नहीं लगता। हमारे बच्चे इस बारे में जागरूक हैं। इस मुद्दे पर वह दूसरे लोगों को संवेदनशील बनाने की जरूरत को भी समझते हैं। यह जोनल इवेंट उनका प्लेटफॉर्म है, जहां उनकी आवाज सुनी जाएगी।” 

समय की सबसे बड़ी मांग को ध्यान में रखते हुए प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में डेटा पैक दिए गए, जिससे उनकी इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। ऑनलाइन क्लासेज या लर्निंग सेशन में शामिल होने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल आज के समय में बच्चों की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इस समय कई स्‍टूडेंट्स इंटरनेट की सुविधा या पर्याप्त मात्रा में डेटा पैक की उपलब्धता न होने के कारण अपनी ऑनलाइन क्लासेज नहीं कर पा रहे हैं। इन प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार एक साल का डेटा पैक था। दूसरा 6 महीने का डेटा पैक, जबकि तीसरा पुरस्कार 3 महीने का डेटा पैक था। सलाम बॉम्बे फाउंडेशन ने इस पहल के तहत #ब्रिज द गैप (#BridgeTheGap) कैंपेन की भी शुरुआत की। इस अभियान की शुरुआत मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत को ध्यान में रखकर की गई। जहां इंटरनेट का उपभोग बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है। इस अभियान के तहत फाउंडेशन ने 3 लाख रुपये एकत्र किए हैं। यह रकम 1200 डेटा पैक्‍स के लिए पर्याप्त है।

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