पौराणिक कथा : धनतेरस की महत्ता

प्रस्तुति : कुणाल संगोई

दीपावली का पावन त्योहार आमतौर पर 5 दिनों का होता है और इसकी शुरुआत होती है धनतेरस से। हालांकि इस बार छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली का मुहूर्त एक ही दिन का है इसलिए 13 नवंबर 2020 को धनतेरस के साथ इस पर्व की शुरुआत होगी. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है. धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सोना, चांदी और पीतल की वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ माना जाता है.

ज्योतिषाचार्य पण्डित अतुल शास्त्री के अनुसार धनतेरस 2020 तिथि तथा शुभ मुहूर्त :

  • खरीदारी की तिथि- 12 नवंबर, 2020
  • धनतेरस तिथि- 13 नवंबर, 2020
  • धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 5:28 बजे से शाम 5:59 बजे तक
  • प्रदोष काल मुहूर्त- शाम 5:28 से रात 8:07 तक- 13 नवंबर, 2020
  • वृषभ काल मुहूर्त- शाम 5:32 से शाम 7:28 तक- 13 नवंबर, 2020

धनतेरस की पूजा करने की विधि

इस दिन प्रभु श्री गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान धनवंतरि और कुबेर जी की पूजा की जाती है. शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है.

जानिए पूजन विधि

  • पूजा करने से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
  • इसके बाद एक साफ चौकी पर गंगाजल छिड़क कर उस पर पीला या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं.
  • इस कपड़े पर प्रभु श्री गणेश, माता लक्ष्मी, मिट्टी का हाथी, भगवान धनवंतरि और भगवान कुबेर जी की मूर्तियां स्थापित करें.
  • सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें, उन्हें पुष्प और दूर्वा अर्पित करें.
  • इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर भगवान धनवंतरि का मनन करें.
  • अब भगवान धनवंतरि को पंचामृत से स्नान कराकर, रोली चंदन से तिलक कर उन्हें पीले रंग के फूल अर्पित करें.
  • फूल अर्पित करने के बाद फल और नैवेद्य अर्पित कर उन पर इत्र छिड़ककर भगवान धनवंतरि के मंत्रों का जाप कर उनके आगे तेल का दीपक जलाएं.
  • इसके बाद धनतेरस की कथा पढ़ें और आरती करें.
  • अब भगवान धनवंतरि को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाकर माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा भी करें.
  • पूजा समाप्त करने के बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों और तेल का दीपक जरूर जलाएं.

धनतेरस क्यों मनाया जाता है

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि जिस समय समुद्र मंथन हो रहा था, उसी समय भगवान धनवंतरि एक रत्न के रूप में समुद्र मंथन से बाहर आ गए थे. धनतेरस के शुभ अवसर पर धनवंतरि के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की आराधना भी की जाती है. 

धनतेरस की महत्ता

दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस के अवसर पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा के साथ होती है. पुराणों की मान्यता के अनुसार, जिस समय देवता और असुर समुद्र मंथन कर रहे थे, उसी समय समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे. इन्हीं में से एक भगवान धनवंतरि धनत्रयोदशी के दिन अपने हाथ में पीतल का अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. यही कारण है कि इस दिन पीतल की वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ फलदायी माना जाता है.

एक अन्य मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन घर में नई चीजें लाने से घर में धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता माने जाने वाले भगवान कुबेर का वास होता है. इस दिन नई झाड़ू खरीदना भी अच्छा माना जाता है. इस दिन झाड़ू खरीदने का कारण यह है कि झाड़ू में माता लक्ष्मी का वास माना गया है. अगर धनतेरस पर आप झाड़ू खरीदकर लाते हैं तो कहा जाता है कि घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. सोना, चांदी और पीतल की वस्तुओं को खरीदना बेहद शुभ माना गया है.

धनतेरस की पौराणिक कथा

एक बार भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने का विचार किया. यह बात उन्होंने माता लक्ष्मी को बताई तो माता लक्ष्मी ने भी भगवान विष्णु के साथ चलने को कहा. तब विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा कि आप मेरे साथ तभी चल सकती हैं, जब मेरी बात मानेंगी. लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को स्वीकृति दे दी. फिर वे दोनों पृथ्वी लोक पर विचरण के लिए निकल पड़े. पृथ्वी लोक पहुंचने पर विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा कि आप यहीं ठहरकर मेरी प्रतीक्षा करिए. साथ ही एक बात का ध्यान रखने के लिए भी कहा कि जिस दिशा में वे जा रहे थे, देवी लक्ष्मी उस ओर बिल्कुल न देखें. इतना कहकर विष्णु भगवान वहां से चल पड़े.

लक्ष्मी जी ने रुकने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उनका मन नहीं माना. वे विष्णु जी के पीछे चल दीं. थोड़ी दूरी पर जाने के बाद उन्होंने सरसों का एक खेत देखा. उस सरसों के खेत में जाकर माता लक्ष्मी ने फूल तोड़े और अपना श्रृंगार किया. तभी विष्णु जी की नजर उन पर पड़ गई और उन्होंने माता लक्ष्मी को श्राप दिया कि तुमने चोरी की है, इसलिए तुम्हें 12 साल तक इस किसान की सेवा करनी होगी.

इस श्राप के बाद माता लक्ष्मी किसान के घर चली गईं. वह किसान बहुत निर्धन था. जबलक्ष्मी माता वहां पहुंची तो उन्होंने किसान से कहा कि मैं अब आप ही के घर रहना चाहती हूं. तब किसान ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किए हुए माता लक्ष्मी को देखकर हां कह दिया. किसान के घर माता लक्ष्मी का वास हो गया और धीरे-धीरे धन से उसका घर परिपूर्ण हो गया. इस प्रकार 12 वर्ष व्यतीत हो गए.

12 वर्ष व्यतीत होने पर भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी को चलने के लिए कहा. तब किसान ने माता लक्ष्मी को विष्णु जी के साथ भेजने से इनकार कर दिया. तब माता लक्ष्मी ने किसान से कहा कि तेरस के दिन घर को अच्छी तरह से साफ करो. घर को साफ करने के बाद रात में घी का दीपक जलाओ. एक तांबे के कलश में रुपए और पैसे भर मेरी पूजा करो. ऐसा करने से मैं साल भर तुम्हारे समीप रहूंगी.

किसान ने ऐसा ही किया और उसके घर पर लक्ष्मी माता का आशीर्वाद बना रहा. तभी से मान्यता है कि तेरस के दिन धन की देवी की पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. तभी से यह धनतेरस का त्योहार मनाया जाने लगा.

ज्योतिषाचार्य पण्डित अतुल शास्त्री के अनुसार धनतेरस पर इन जगहों पर दीपक रखने से घर में माँ लक्ष्मी के साथ सम्पन्नता का वास होता है।

धनतेरस के खास अवसर पर घर के अलावा पीपल के पेड़ के नीचे और श्मशान के पास भी दीपक रखे जाते हैं.

आप भी जानिए इन जगहों पर दीपक रखने का महत्व

  • घर के मुख्य द्वार पर- धनतेरस के दिन अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है.
  • बाथरूम में- शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि माता लक्ष्मी आपके घर में कहीं से भी प्रवेश कर सकती हैं. इसलिए घर के बाथरूम में भी एक दीपक जरूर रखें.
  • पीपल के पेड़ के नीचे- धनतेरस पर्व के अवसर पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा आप पर बनी रहेगी. पीपल में समस्त देवी-देवताओं का वास माना गया है.
  • श्मशान के समीप- धनतेरस के अवसर पर श्मशान के समीप दीपक रखना भी बहुत शुभ फलकारी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि श्मशान के समीप इस दिन दीया जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहती है.
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