गरीब फेरीवालों वालों के साथ अन्याय नही होने दूंगी - आशा मराठे


प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का वर्गीय कारण करके पौने चार लाख फेरीवालों को योजना से वंचित कर रही है  शिवसेना


स्वनिधि योजना को अनदेखा करने से शिवसेना की बढ़ती किरकिरी 


रिपोर्ट : यशपाल शर्मा


मुंबई : गरीब फेरीवालों के लिये केंद्र सरकार की स्वनिधि योजना का वर्गीकरण की आड़ में,पौने चार लाख फेरीवालों का रोजगार छीनने में लगी है शिवसेना। मुंबई के फेरीवालों के साथ अन्य नही होने देगी बीजेपी, फेरीवालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेगी भाजपा।


केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वनिधि योजना, केंद्र सरकार की गरीब फेरीवालों के लिये लागू की गई कर्ज योजना को देश भर में मिलते प्रतिसाद के कारण मनपा की सत्ताधारी शिवसेना सरकार की फेरीवालों की योजना को अनदेखा करने के रवैये से अब  धीरे-धीरे गाले की हड्डी बनती जा  रही है, राजनीतिक गलियारों में शिवसेना की रोजाना किरकिरी बढ़ते जा रही है।


कौन कौन होंगे स्वनिधि योजना की लाभार्थी


वही अब केंद्र सरकार की स्वनिधि योजना को देश भर के विभिन्न राज्यों में निवास करने वाली जनता फेरी करने वाले, घरो में काम करने वाली महिलाओं सहित सड़क किनारे बैठकर जुते सीने वालों से लेकर, सड़को पर धंधा लगाकर अपने परिवार का पेट भरते चले आ रहे है।


कितने फेरीवालों का हुआ है सर्वे


उल्लेखनीय तौर पर 2014 के सर्वे के पहले 9 हजार परवाना धारक फेरीवाले मुंबई में हुआ करते थे। मनपा द्वारा किये गये 2014 के फेरीवालों के सर्वे अनुसार 99,430 फेरीवालों में से सिर्फ 17 हजार व 2014 क पूर्व के 9 हजार दोंनो को मिलाकर कुल मिलाकर सिर्फ 23 हजार फेरीवालों को योजना का लाभ देगी। परंतु अ ब क ड वर्गीय काऱण करके बकाया पौने चार लाख मुंबईकरो को स्वनिधि योजना से वंचित क्यों रख रही है मनपा।


क्या कहना है मुंबई घरेलु कामगार संघटन अध्यक्ष सुभाष मराठे का


सुभाष मराठे के अनुसार स्वनिधि योजना को खत्म करने की साज़िश रच रही है। बकाया वर्गीय कारण के अंतर्गत अ, ब, क  श्रेणी में आने वाले परवाना धारक फेरीवाले है जबकि ड श्रेणी में आने वाले फेरीवाले जिनका फॉर्म ही नही भरा गया है। जिसके पास परवाना नही है, जिनका धंधा सड़कों से अतिक्रमण के नाम पर मनपा उठाकर करवाई करती है। ऐसे फेरीवालों को बाद में देने को कहकर मनपा टाल रही है। गरीब फेरीवालों के घरों में दीवाली के खुशियों की दिवाली नही होने देना चाहती है शिवसेना ताकि चार पैसे आयेंगे तो त्योहार मनायेंगे।


क्या कहना है बीजेपी नगरसेविका आशा मराठे


उल्लेखनीय तौर पर पूर्व प्रभाग समिति अध्यक्ष व वर्तमान स्थायी समिति सदस्य आशा मराठे ने फेरीवालों पर मनपा की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना द्वारा वर्गीय कारण कर के प्रधानमंत्री योजना को खत्म करने की साजिश को बेनकाब करते हुए कहा है, सड़क से लेकर मनपा सभा ग्रह तक आवाज उठाउंगी। मामले में मनपा आयुक्त इक़बाल सिंह चहल से लेकर मुंबई भाजपा अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा को पत्र के माध्यम से फेरीवालों के साथ किया जा रहा शिवसेना का अन्य को बेनकाब करने की कोशिश किया है। इतना ही नही, शिवसेना की मनमानी पर रोक लगाने की मांग किया है। वही मामले में मनपा महापौर किशोरी पेडनेकर से प्रतिक्रिया हेतु संपर्क करने पर नही हों सका ।


आशा मराठे ने मनपा से कई सवाल पूंछे है -



  • आख़िर क्यों नही मनपा दे रही है शिफारिश पत्र लेटर ऑफ रिकमेंडडेशन ।पौने 3 लाख मुंबई करो के पेट मे क्यों लात मार रही है शिवसेना ।

  • क्यों गरीब फेरीवालों के लिये केंद्र कि बीजेपी सरकार द्वारा देश भर के फेरीवालों को कोविड-19 में आर्थिक तौर पर कमजोर हो चुके है उन्हें समृद्ध बनाने के लिये क्यों नही जुलाई में लागू की गई योजना को मनपा ने 6 महीनो से लटका कर रखा है ।


योजना पर क्या कहना है प्रभाग समिति अध्यक्ष का -


वही मामले में मनपा एम/पश्चिमी के नवनिर्वाचित प्रभाग समिति अध्यक्ष शिवगण महादेव शंकर ने पत्रकार से बात करते हुए कहा कि बीजेपी फेरीवालों के साथ अन्य नही होने देगी। हमारे भी वार्ड से तकरीबन 1 हजार के करीब योजना का लाभ गरीब फेरीवालों को मिले इसके लिये भरवाये है।


क्या है प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना -


उनके लिये कोरोना लॉक डाउन के दौरान पिछले 6 महीनों से घरों में बैठकर भुखमरी के कगार पर पहुंच चुकी जनता के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वनिधि योजना के जरिये मुंबई के सभी फेरीवालों को एक बार फिर से दुबारा से आर्थिक तौर पर कमजोर हो चुके फेरीवालों को नई संजीवनी योजना के अंतर्गत 10 हजार रुपए का कर्ज देकर आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास कर रही है। तय समय सीमा पर अगर फेरीवाले अपने कर्ज का भुगतान निरंतर करते चले आयेंगे तो तीन किस्तों में 50 हजार रुपए मिलेंगे।


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