एएससीआई ने गुमराह करने वाले गेमिंग विज्ञापनों के लिए जारी किए दिशा-निर्देश

मुंबई : एडवरटाइजिंग स्टैंडडर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) ने रियल मनी गेमिंग के विज्ञापनों को सुरक्षित और ज्यादा जिम्मेदार बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन गाइडलाइंस को तैयार करने के पीछे यह उद्देश्य है कि ऑनलाइन गेमिंग से पैसे जीतने के तरह-तरह के विज्ञापनों से जुड़े वित्तीय और अन्य खतरों के संबंध में उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा सके।

हाल ही में की गई केपीएमजी स्टडी के अनुसार वित्त वर्ष 2020 में ऑनलाइन गेमिंग में 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। मार्च 2020 तक मोबाइल पर ऑनलाइन रियल मनी गेम्स (आरएमजी) खेलने वाले यूजर्स की संख्या 365 मिलियन के पार हो गई। कार्ड बेस्ड और फैंटेंसी सेग्मेंट दोनों ने यूजर्स को अपनी ओर काफी आकर्षित किया। मोबाइल फर्स्ट कंट्री होने के नाते यहां 90 फीसदी से ज्यादा ऑनलाइन गेमर्स अपने मोबाइल पर गेम्स खेलते हैं। मौजूदा समय में ऑनलाइन गेमिंग मार्केट 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का है, जो 2021 में 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। 2019 में करीब 5.6 बिलियन मोबाइल गेमिंग ऐप्स भारत में डाउनलोड किए गए हैं, जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक है। यह विश्व की करीब 13 फीसदी गेमिंग ऐप्स का प्रतिनिधित्व करती है। भारत में इंटरनेट तक 31 फीसदी लोगों की पहुंच है। केपीएमपीजी को उम्मीद है कि 2021 तक भारत में 53 फीसदी लोगों तक इंटरनेट की पहुंच होगी। इससे 700 मिलियन से ज्यादा लोगों को इंटरनेट और गेमिंग विकल्पों से पैसे जीतने के ऑफर तक पहुंच मिलेगी।

आरएमजी विज्ञापनों में तेज बढ़ोतरी और इसके नकारात्मक प्रभावों के असल खतरे ने एएससीआई को विज्ञापन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने के लिए प्रेरित किया। इससे यूजर्स में वित्तीय और गेम्स के आदी बनने से जुड़े खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना सुनिश्चित किया गया। सरकार ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों के विभाग और इलेक्ट्रॉनिक और सूचना तकनीक मंत्रालय के माध्यम से एएससीआई गाइडलाइंस को अपना पूरा समर्थन दिया है। सरकार इस क्षेत्र के संभावित रूप से गुमराह करने वाले हानिकारक विज्ञापनों से संबंधित लगातार बढ़ती चिंताओं का पूरी तरह समाधान करने के लिए सहयोग दे रही है।

यह दिशा-निर्देश 15 दिसंबर 2020 से प्रभावी होंगे और उन विज्ञापनों पर लागू होंगे, जिन्हें कानूनी रूप से मंजूरी प्रदान की गई है। 

दिशा-निर्देश :

गेमिंग से संबंधित किसी भी विज्ञापन में 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को पैसे जीतने के लिए ऑनलाइन गेम्स खेलते हुए नहीं दिखाया जा सकता। न ही यह सुझाव दिया जा सकता है कि इस आयु से कम उम्र के लोग गेम खेल सकते हैं। 

गेमिंग के इन सभी ऐसे विज्ञापनों में निम्नलि​खित डिस्क्लेमर का जरूर होना चाहिए

प्रिंट/स्थिर: इस गेम में वित्तीय जोखिम का तत्व शामिल है और इसके आदत बन जाने का खतरा है। कृपया अपने ​रिस्क पर जिम्मेदारी से खेलिए 

I. इस तरह के डिस्क्लेमर को विज्ञापन की जगह पर 20 फीसदी से कम जगह नहीं देनी चाहिए।  

II. डिस्क्लेमर को एएससीआई कोड में 4 (i) (ii) (iv) और (viii) के तहत दिए डिस्क्लेमर दिशा-निर्देशों के मानकों को भी विशेष रूप से पूरा करना चाहिए 

(ब) ऑडियो/वीडियो : “इस गेम में वित्तीय जोखिम का तत्व शामिल है और इसके खेलने से इसके आदी बन जाने का खतरा है। कृपया इसे अपने जोखिम पर जिम्मेदारी से खेलिए।“ 

इस तरह के डिस्क्लेमर को विज्ञापन के अंत में उस स्थान पर रखना चाहिए जहां लोग इसे स्पष्ट रूप से और आसानी से सुन सकें।

डिस्क्लेमर उसी भाषा में होना चाहिए, जिस भाषा में विज्ञापन है

ऑडियो-विजुअल मीडियम के लिए डिस्क्लेमर को आडियो और विजुअल दोनों फॉर्मेट में होना चाहिए

विज्ञापनों को “ऑनलाइन गेमिंग फॉर रियल मनी विनिंग्स” को पैसे कमाने के मौके या आय के वैकल्पिक साधन के रूप में पेश नहीं करना चाहिए

विज्ञापनों में यह सुझाव नहीं देना चाहिए कि ऑनलाइन गेम खेल रहा कोई व्यक्ति दूसरे लोगों की तुलना में गेम में किसी तरह से ज्यादा सफल रहा है। 

एएससीआई की सेक्रेटरी जनरल मनीषा कपूर ने कहा, “हमने देखा है कि ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापन देने वाले लोगों का लक्ष्य युवा वर्ग और परिवार होते हैं। इन्हें ऐड में सुझाव दिया जाता है कि यह ऑनलाइन गेम्स उनके लिए आजीविका या आय का स्रोत बन सकते हैं। हमने इस तरह के विज्ञापनों पर उपभोक्ताओं के साथ सरकार की चिंताओं पर भी गौर किया है। अधिकतर विज्ञापनों में यह तथ्य पूरी तरह से दबा दिया जाता है कि असल में ऑनलाइन गेम्स खेलने से पैसे गंवाने की पूरी संभावना है। इस तरह के अधिकतर विज्ञापनों में सेलेब्रिटीज के लगातार इस्तेमाल से उपभोक्ता इनकी ओर ज्यादा से ज्यादा आकर्षित होते हैं क्योंकि उपभोक्ता अपने हीरोज और रोल मॉडल पर आंख मूंदकर पूरी तरह विश्वास करते हैं। इसके साथ ही यह भी सच है कि इस तरह के गेम्स खेलने से इनकी आदत पड़ जाने का खतरा है। इस तरह के विज्ञापन न केवल गुमराह करते हैं, बल्कि व्यक्ति और समाज के लिए भी हनिकारक बनते हैं। इस तरह यह विज्ञापन एएससीआई के कोड का उल्लंघन करते हैं।”

इस तरह के गेम्स के विज्ञापनों के लिए दिशा-निर्देश तय करने का मुख्य कारण विज्ञापनदाताओं के साथ साधारण जनता को भी यह बताना है कि हम उपभोक्ताओं से मिलने वाली विज्ञापन संबंधी शिकायतों की जांच के लिए क्या मानदंड अपनाते हैं। इस क्षेत्र से जुड़े कानूनी मुद्दों पर सरकार फैसला करेगी। हमारा मानना है कि विज्ञापन संबंधी ये दिशा-निर्देश पैसे जीतने के लिए खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाएंगे। इन दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए एएससीआई को सरकार के पूर्ण सहयोग और समर्थन से हम खासतौर पर खुश हैं। यह आत्मनियंत्रण की ताकत में विश्वास का एक और प्रदर्शन है। हमें विश्वास है कि इन दिशा-निर्देशों से जिम्मेदार और वास्तविक जानकारी देने वाले विज्ञापनों के युग का सूत्रपात होगा।”

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