भय को मुक्त करती है भागवत : कौशलेंद्र शास्त्री जी महाराज

बस्ती, (उ.प्र.) : कप्तानगंज टिनिच रोड स्थिति नकटी देई बुजुर्ग ग्राम में करिया बाबा के द्वारा यज्ञाचार्य अतुल शास्त्री के सानिध्य में संगीतमय भागवत कथा का आयोजन किया गया है। भागवत कथा वाचक महाराज कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने कथा के दूसरे दिन परीक्षित का जन्म,कलियुग का प्रवेश, कर्दम ऋषि व देवाहुति के विवाह के बाद जन्मे कपिल भगवान की कथा का सारगर्भित वृतांत सुनाया। उन्होंने बताया कि कर्म के अनुसार मनुष्य जन्म मिलता है, तब जन्म से मृत्यु तक जीव सुख की तलाश में रहता है। उसे वह सुख केवल भगवत प्रेम से ही प्राप्त होता है.

कथा के प्रारम्भ में महाराज कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने प्रेमाभाव का विस्तार से वर्णन कर समझाया | कलयुग में भगवान का केवल मात्र सुमिरन करने से ही भवसागर को पार किया जा सकता है। कथा में परीक्षित जन्म का सविस्तार से वर्णिन किया। कथा के अंत में कपिल चरित्र का भी वर्णन किया गया | कपिल भगवान ने माता देवहूति से कहा कि ये आसक्ति ही सुख दुख का कारण है। यदि संसार में ये आसक्ति है, तो दु:ख का कारण बन जाती है। यही आसक्ति भगवान और उनमें भक्ति में हो जाए तो मोक्ष का द्वार खुल जाता है।ऋषभ देव के चरित्र वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को ऋषभ देव जी जैसा आदर्श पिता होना चाहिए। जिन्होंने अपने पुत्रों को समझाया कि इस मानव शरीर को पाकर दिव्य तप करना चाहिए, जिससे अंत:करण की शुद्धि हो तभी उसे अनंत सुख की प्राप्ति हो सकती है। भगवान को अर्पित भाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप है। कथा में अवध लोक गायक जिला द्विवेदी ने अपने मधुर स्वर से कई भजनों की प्रस्तुतियां दी, जिससे पंडाल में बैठे सभी श्रोतागण भक्ति सागर में डूब गए। आयोजक करिया बाबा ने बताया कि  25/26 नवंबर को बादल सांवरिया  द्वारा दिब्य झांकी का भी आयोजन किया गया है।

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