आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने भारत में लॉन्च किया “नर्चरिंग नेबरहुड्स चैलेंज” 



  • सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत इस पहल का लक्ष्य शिशुओं और छोटे बच्चों के विकास के लिए पड़ोस में बेहतर और मित्रतापूर्ण माहौल बनाने को समर्थन देना है

  • सभी शहरों से आवेदन आमंत्रित किए गए, जिसकी शुरुआत 4 नवंबर 2020 से होगी


नई दिल्ली : आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के स्मार्ट सिटीज मिशन ने नीदरलैंड स्थित बर्नाड वैन लीयर फाउंडेशन (BvLF) के सहयोग में नर्चरिंग नेबरहुड्स चैलेंज के लिए एक शुरुआती कार्यक्रम का आयोजन किया। इसे डब्ल्यूआरआई इंडिया का तकनीकी सहयोग मिला। इस पहल के तहत सार्वजनिक क्षेत्र में 0-5 वर्ष के शिशुओं और छोटे बच्चों और उनका पालन पोषण करने वाले लोगों की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह पहल भारतीय शहरों के स्थिर गति से समग्र विकास और शहरों में परिवारों के लिए मित्रतापूर्ण माहौल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम  है। यह प्रोग्राम देशभर में होने वाले चैलेंज को समर्थन देगा। इस चैलेंज के लिए 4 नवंबर 2020 से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सभी स्मार्ट सिटीज, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी और 5 लाख से अधिक की आबादी वाले शहर इस पहल में भागीदारी के योग्य हैं।


सबका साथ, सबका विकास के अपने मुख्य लक्ष्य के तहत  भारत सरकार शहरी क्षेत्रों में समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित सभी लोगों, खासतौर से शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए सुविधाएं और विकास के अवसरों में बढ़ोतरी के लिए प्रतिबद्ध है। नर्चरिंग नेबरहुड्स चैलेंज से भारतीय शहरों से सार्वजनिक क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाने, आवागमन के साधनों में सुधार और सेवाओं तक सभी की पहुंच बढ़ाने के साथ आंकड़ों के प्रबंधन के लिए प्रस्ताव देने और बच्चों और उनके पैरंट्स को घरों के आसपास स्वास्थ्य और रहनसहन की सुविधाओं के सुधार करने की खुली अपील की गई। यह पहल नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों और उनकी देखभाल करने वाले लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत को और दुरुस्त बनाएगी।


रिसर्च से पता चलता है कि शिशुओं और छोटे बच्चों की बेहतर देखभाल बढ़ती उम्र में बच्चों के संपूर्ण विकास और उनके पूरी क्षमता विकसित करने के लिए बहुत आवश्यक है। कोरोना वायरस के प्रकोप ने शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए उनके घरों के आसपास कुदरती रूप से हरे-भरे क्षेत्रों और जरूरी सेवाएं देने के साथ उन्हें खेलने के अवसर उपलब्ध कराने की अहमियत को उभारा है। गभर्वती महिलाओं, छोटे बच्चों और उनके परिवारों को दी जाने वाली सुविधाओं में सुधार कर शहर मजबूत समुदाय, आर्थिक विकास और सभी के लिए बेहतर माहौल को बढ़ावा दे सकते हैं।



नर्चरिंग नेबरहुड्स चैलेंज के माध्यम से शहरों को पार्क-बाग-बगीचों और खुली जगह बनाने पर दोबारा विचार करने के लिए आमंत्रित किया गया है। गलियों को छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने, नवजात शिशुओं के लिए जरूरी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने, जैसे आंगनबाड़ी और पब्लिक हेल्थ सेंटर बनाने और सार्वजनिक जगहों पर बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर फिर  मंथन करने की अपील की गई। इस दिशा में एकीकृत और पूरक हस्तक्षेप को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस चैलेंज के हिस्‍से के तौर पर किए गए सुधारों को मंत्रालय की हालिया पहलों का भी लाभ मिलेगा जोकि टहलने और साइकिल चलाने योग्‍य शहरों को बढ़ावा देती हैं।


इस 3 साल की पहल के तहत प्रस्ताव, तैयारी और प्रतिबद्धता के आधार पर चुने गए शहरों को बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए पायलट प्रोजेक्ट से लेकर व्यापक पैमाने पर परियोजना बनाने के लिए तकनीकी सहायता दी जाएगी और उनकी क्षमता का विस्तार किया जाएगा, जिससे नन्हे-मुन्नों के जीवनस्तर में सुधार आएगा। समय बीतने के साथ-साथ यह कार्यक्रम शहर के नेताओं, प्रबंधकों, स्टाफ, इंजीनियर, अर्बन प्लानर और आर्किटेक्ट्स को भारतीय शहरों  योजना और प्रबंधन को छोटे बच्चों के स्वस्थ विकास के पहलू पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाएगा।


हरदीप सिंह पुरी, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), ने कहा, ‘‘शहर का माहौल छोटे बच्चे के स्वास्थ्य और विकास को आकार देता है, खासकर जीवन के पहले पाँच महत्वपूर्ण और कमजोरी के वर्षों में। एक बच्चे के जीवन के शुरुआती 1000 दिनों के दौरान हर एक सेकंड में 1 मिलियन से ज्यादा नये न्यूरल कनेक्शंस बनते हैं। छोटे बच्चों और उनके परिवारों के प्राइमरी पब्लिक डोमैन को शुरूआती बचपन के लिये समृद्ध, सुरक्षित और स्फूर्ति वाला बनाकर नर्चरिंग नेबरहूड्स चैलेंज आने वाले दशकों के लिये भारत के शहरों में सामाजिक और आर्थिक विकास के ज्यादा मजबूत परिणामों का आधार बनाने में मदद कर सकता है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘परिवारों के सामने अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन, भोजन, हेल्‍थकेयर और बच्चों की देखभाल की ‘योग्यता’ की चुनौती है। विचारपूर्ण शहरी योजना और डिजाइन ऐसी चुनौतियों को दूर करने और बच्चों के जीवन की अच्छी शुरूआत में भी में बड़ी भूमिका निभा सकती है । इसमें वॉकेबल, मिक्स्ड-यूज नेबरहूड्स शामिल हैं, जो 15 मिनट की पैदल दूरी के भीतर एक युवा परिवार की मूलभूत जरूरतों की पूर्ति करें; घर के पास जीवंत और हरे-भरे सार्वजनिक स्थल, जो केयरगिवर्स को सुविधाएं देते हों और जहाँ छोटे बच्चे सुरक्षित तरीके से एक्सप्लोर कर सकते हों; सुरक्षित परिवहन मार्ग और ट्रांजिट सिस्टम्स, जो छोटे बच्चों वाले परिवारों की यात्रा को आसान, किफायती और आनंदमय बनाते हों; और वायु की सुरक्षित गुणवत्ता और कम ध्वनि प्रदूषण वाले स्वस्थ वातावरण; और अंत में, एक जोशीला सामुदायिक जीवन, जो परिवार के कल्याण में सहयोग देता हो।’’



आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा, ‘‘सभी लोगों के लिये जवाबदेह बनने के लिये एक शहर को सचेत होकर सबसे कमजोर वर्गों की जरूरतें समझनी होंगी। शहर की योजना में शुरूआती बचपन को शामिल करने से ज्यादा समग्र और लोगों पर केन्द्रित शहरी विकास को सहयोग मिलेगा।’’


बर्नार्ड वान लीयर फाउंडेशन में भारत की प्रतिनिधि रुश्दा मजीद ने कहा, हमारा विश्वास है कि नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों, पैरंट्स और बच्चों का पालन-पोषण करने वाले दूसरे लोगों को पड़ोस में बेहतर और अच्छा माहौल उपलब्ध कराना शहरों के संपूर्ण विकास के संबंध में विचार करने का स्थिर और समावेशी तरीका है। शहरों के विकास का आधार शानदार आधारपूर्ण ढांचे और छोटे बच्चों समेत सभी लोगों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना होना चाहिए। सार्वजनिक जगहों, आवागमन के साधनों, बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं तक पहुंच बनाने और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में समान पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। नवजात शिशुओं को बेहतर सुविधाएं देने वाले शहरों के सभी नागरिकों के कल्याण के लिए बेहतर कार्य करने की संभावना होती है। हम इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत के लिए स्वास्थ्य और शहरी मामलों के मंत्रालय के बेहद आभारी हैं। हम इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट इंडिया और भागीदारी करने वाले शहरों की साझेदारी में काम करेंगे।


डब्ल्यूआरआई इंडिया के सीईओ डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने कहा, भारत में शहरी विकास पर चर्चा करते समय जनकल्याण पर केंद्रित रवैये पर ही ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। नवजात शिशुओं और बच्चो के लिहाज से शहरों को सुरक्षित बनाना यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें पूर्ण रूप से सुरक्षा मिल रही है और वह आराम से है। हमें अपने शहरों की परिकल्पना ऐसी जगहों के रूप में दोबारा करने की जरूरत है, जहां बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ और प्रेरणादायक माहौल में पालनपोषण और विकास हो सके। हमें इस तरह के शहरों के विकास  के लिए ऐसे शहरों के निर्माण के मूल सिद्धांतों की ओर लौटना होगा,  जहां पैदल चलने वाले यात्री को सुरक्षित रहते हुए चलने में आनंद आए। इसके लिए शहरों, सार्वजनिक जगहों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सुविधाओं और जरूरी सेवाओं तक पहुंच में सुधार और शहरी लचीलापन लाना होगा। हम आवास और शहरी विकास मंत्रालय (एमओएचयूए) की ओर से चलाए गए इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर बेहद उत्साहित हैं। इस कार्यक्रम को बर्नार्ड वान लीयर फाउंडेशन ने अपना समर्थन दिया है। हम इस विजन को लागू करने के लिए भारतीय शहरों के साथ काम करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


आवेदन के लिए कृपया विजिट करें- https://smartnet.niua.org/itcn


 


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