के.जे. सोमैया हॉस्पिटल और जेलनोवा लैब्स ने कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम कम करने के लिये टर्मजेल लॉज़ेंज का परीक्षण किया

कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम कम करने में टर्मजेल की भूमिका का अध्ययन करने के लिये शोध

मुंबई : के.जे. सोमैया हॉस्पिटल और जेलनोवा लैब्स ने स्वास्थ्यरक्षा कर्मियों में कोविड-19 के संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कदम बढ़ाया है। इन दोनों ने कोविड-19 के संक्रमण के जोखिम को कम करने में टर्मजेल की भूमिका का अध्ययन करने के लिये 303 स्वास्थ्यरक्षा कर्मियों के साथ एक महीने का अध्ययन किया। यह अध्ययन स्वास्थ्यरक्षा कर्मियों के बीच कोविड-19 के संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिये किया गया था।

टर्मजेल बाजार का एकमात्र वैश्विक पेटेंट वाला और मुँह में घुलने वाला लॉज़ेंज है। यह अमेज़न, जेलनोवा लैब्स की वेबसाइट और चयनित रिटेल स्टोर्स में 10 लॉज़ेंजेस के लिये 170 रुपये की किफायती कीमत पर उपलब्ध है। विश्व के कई देशों में इसका निर्यात भी किया जा रहा है। टर्मजेल का शुगर-फ्री फॉर्मूलेशन आंत से बायपास हो जाता है और इसमें बायोएक्टिव कम्पोनेन्ट्स का उच्च स्तर होता है, जो सलाइववेरी लोड में संक्रमण रोकता है और इम्युनिटी बढ़ाता है। 

कोविड-19 के लिये जिम्मेदार कोरोनावायरस (सार्स-कोव-2) अत्यंत संक्रामक वायरस है, जो मुख्य रूप से नाक और मुँह से शरीर में प्रवेश करता है और कुछ दिनों तक लार में रह सकता है। इस अवधि के दौरान अधिकांशतः रोगियों में रोग के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन वे संक्रमण फैला सकते हैं।

रोगियों का उपचार करते समय स्वास्थ्यरक्षा पेशेवरों को रोग होने का उच्च जोखिम होता है, क्योंकि वायरस रोगी के ड्रॉपलेट्स और एरोसोल्स द्वारा फैल सकता है। मास्क और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के उपयोग के बावजूद संक्रमण का जोखिम बहुत उच्च होता है। विश्वभर में रोगियों का इलाज करते समय 10 प्रतिशत से ज्यादा स्वास्थ्यरक्षा पेशेवरों को संक्रमण हुआ है। इसलिये, इस अध्ययन में सोमैया हॉस्पिटल ने टर्मजेल लॉज़ेंजेस के उपयोग का निर्णय लिया था, क्योंकि यह लार में घुल जाता है और सीधे खून में मिल जाता है। 

यह अध्ययन कोविड-19 वार्ड्स में काम कर रहे स्वास्थ्यरक्षा कर्मियों पर डॉ. निहारिका गिल और डॉ. प्रनौती मिस्त्री ने यह देखने के लिये किया था कि टर्मजेल के उपयोग से कोविड-19 संक्रमण होने का जोखिम कम होता है या नहीं। सभी स्वास्थ्यरक्षा कर्मियों को प्रतिदिन तीन बार टर्मजेल लॉज़ेंज दिया गया। अध्ययन में भाग लेने वालों ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुशंसित संक्रमण नियंत्रण के नियमों और बताई गई सुरक्षा का पालन किया और प्रपोजल को के.जे. सोमैया मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की संस्थागत नैतिकता समिति ने क्लीयर किया था। टर्मजेल को स्वास्थ्यरक्षा कर्मियों के बीच अच्छी स्वीकार्यता मिली और आगे का शोध चल रहा है। 

के.जे. सोमैया मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की डीन डॉ. वर्षा फडके ने कहा, ‘‘हम एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं और एक स्वस्थ समाज बनाने के लिये अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना भी हमारी जिम्मेदारी है। के.जे. सोमैया हॉस्पिटल में हमने हमेशा एक बेहतर और स्वस्थ समाज के लिये काम करने में विश्वास किया है। जेलनोवा लैब्स से सहयोग प्राप्त टर्मजेल स्टडी वायरस से लड़ने और लोगों के लिये एक ज्यादा सुरक्षित वातावरण बनाने के लिये हमारा प्रयास है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर यह अध्ययन सकारात्मक परिणाम देगा, जिससे समाज को फायदा होगा।’’

जेलनोवा लैबोरेटरीज (आई) प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री जतिन ठक्कर ने कहा, ‘‘हमारे कोविड योद्धाओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण है और संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिये सभी संभव प्रयास किये जाने चाहिये। इसके आगे कोविड-19 के रोगियों के उपचार में टर्मरिक लोज़ेंज की उपयोगिता का अध्ययन करने की योजना है। सोमैया हॉस्पिटल के योगदान से हम इसमें सफलता मिलने की उम्मीद करते हैं।’’

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