फिल्मों-विज्ञापनों की अश्लीलता पर शिकंजा कसे सरकार - भवानजी


मुंबई : भाजपा नेता तथा मुंबई मनपा के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर से मांग की है कि फिल्मों, धारावाहिकों तथा विज्ञापनों में दिखाई जा रही अश्लीलता तथा कुसंस्कृतियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाय। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में देश की युवापीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति के चंगुल में बुरी तरह से फंस चुकी है, जिसके लिए फ़िल्में, धारावाहिक तथा विज्ञापन काफी हद तक जिम्मेदार हैं।


भवानजी ने कहा कि दर्शकों को रिझाने तथा टीआरपी बटोरने के चक्कर में इनमें न सिर्फ अश्लीलता को खुलकर परोसा जा रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति तथा संस्कारों का बुरी तरह से हनन किया जा रहा है। हत्या, बलात्कार, संयुक्त परिवारों का विघटन, बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा, तलाक के बढ़ते यह सब इनकी ही देन हैं। भवानजी ने कहा कि इन पर रोक लगाने की शुरुआत सरकार को पहले खुद के टीवी चैनलों से करनी होगी, इसके बाद  सभी निजी टीवी चैनलों तथा सिनेमाघरों, बॉलीवुड, टॉलीवुड समेत फिल्मों के निर्माण स्थलों, विज्ञापन निर्माताओं पर शिकंजा कसा जा सकता है। भवानजी ने कहा कि वर्तमान दौर में विलुप्त होती भारतीय संस्कृति को बचाए रखना है, तो सरकार को यह सख्त कदम उठाने ही होंगे।


उन्होंने कहा कि उक्त प्रतिबंधों के साथ ही इन्हें सरकार इसी शर्त पर कारोबार की अनुमति दे कि वे भारतीय संस्कृति, संस्कारों को बढ़ावा देने वाली फिल्मों तथा विज्ञापनों का ही निर्माण करे, ताकि घर-परिवार बिखरने से बचें, भ्रष्टाचार तथा अपराधों पर रोक लगे, और भारत के भविष्य के रूप में देखी जाने वाली युवापीढ़ी संस्कारयुक्त होकर अपने परिवार तथा देश की समृद्धि एवं खुशहाली की अहम कड़ी बन सके। भवानजी ने कहा कि *पुरानी फिल्मों में जो अश्लीलता तथा संस्कृति पर कुठाराघात करने वाले सीन फिल्माए गए हैं, उन्हें भी सेंसर करके निकाला जाना चाहिए,* तथा नई फिल्मों में ऐसे दृश्यों के फिल्मांकन पर पूरी तरह से रोक लगानी चाहिए, चाहे इसके लिए सख्त से सख्त कानून ही क्यों न बनाना पड़े। यही कानून विज्ञापनों तथा सोशल मीडिया, वाट्सऐप, फेसबुक सभी के लिए लागू किया जाना चाहिए।


फिल्में तथा धारावाहिक ऐसे बनें, जिनमें फूहड़ता के बजाय नैतिकता, संस्कार की चाशनी हो, धार्मिक भावनाएं आहत न हों, और समूचा परिवार एक साथ बैठकर उसे देख सके, और उससे सकारात्मक संदेश ले सके। उन्होंने कहा कि मेरी सभी अभिभावकों से अपील है कि वह अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने की कोशिश करें। बच्चों को आधे-अधूरे कपड़े पहनाने से परहेज करें, और पूरे कपड़े पहनने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि उनमें संस्कार की भावना पैदा हो।


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