नमक में आयोडीन की मात्रा के लिए किया जायेगा जागरूक 


विश्व आयोडीन अल्पता दिवस आज  


रिपोर्ट : टी.सी.विश्वकर्मा


मीरजापुर, (उ.प्र.) :  कोरोना काल में जिलेवासियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार जागरूकता पैदा की जा रही है। इसी के मद्देनजर स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत बुधवार को विश्व आयोडीन अल्पता (आईडीडी) दिवस मनाया जाएगा।


जिला कार्यक्रम प्रबन्धक अजय सिंह ने सीएमओ कार्यालय स्थित विवेकानन्द सभागार में सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों की बैठक में अवगत कराया कि प्रदेश के 24 जिलों में एन0आई0डी0डी0सी0पी0 कार्यक्रम को संचालित किया जा रहा है जिसके तहत जिले में बुधवार को सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों समेत 186 सबसेन्टरों पर ग्लोबल आई0डी0डी0 दिवस मनाया जायेगा। केन्द्र पर आने वाले सभी मरीजों व अभिभावकों समेत गर्भवती महिलाओं को खाने में नमक के प्रयोग में आयोडीन की उचित मात्रा के बारे में जागरूक करने का कार्य किया जायेगा। इसके अलावा उनको पम्पलेट व पोस्टरों के माध्यम से भी समझाया जायेगा। इसके लिए जिले के 2043 आशाओं को लगाया जा रहा है, जिसके लिए उनको पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। जिले के सभी आशा घर-घर जाकर लोगों को नमक में आयोडीन की मात्रा को लेकर जागरूक करने का काम करेगी, जिससे उनको आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से बचाया जा सके।


क्या है आयोडीन :  आयोडीन एक रासायनिक तत्व है। यह सबसे भारी आवश्यक खनिज पोषक तत्व है और बौद्धिक अक्षमता का प्रमुख रोग है। आयोडीन और इसके यौगिकों का उपयोग मुख्य रूप से पोषण में किया जाता है। मानव शरीर द्वारा इसके उत्थान की विशिष्टता के कारण, आयोडीन के रेडियोधर्मी समस्थानिक का उपयोग थायराइड कैंसर के इलाज के लिए भी किया जा सकता है।


आयोडीन का महत्व : आयोडीन सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो कि मानव वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। आयोडीन बढ़ते शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड प्रक्रिया के लिए अनिवार्य एक माइक्रोपोशक तत्व है, आयोडीन हमारे शरीर के तापमान को भी विनियमित करता है, विकास में सहायक है और भ्रूण के पोशक तत्वों का एक अनिवार्य घटक है।


आयोडीन की कमी से होने वाली परेशानी



  • थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना।

  • मानसिक बीमारी, मंदबुद्धि, मानसिक मंदता, बच्चों में संज्ञानात्मक विकास की गड़बड़ी और मस्तिष्क की क्षति। मृत जन्म और गर्भवती महिलाओं में स्वतः गर्भपात।

  • जन्मजात असामान्यता जैसे कि बहरा, गूंगापन, बात करने में असमर्थताद्ध और बौनापन।

  • देखने, सुनने और बोलने में दोष।


आयोडीन युक्त खाद्य प्रदार्थ : आयोडीन का सबसे सामान्य स्रोत नमक है। आयोडीन युक्त कुछ अन्य खाद्य प्रदार्थ दूध, अंडा, समुद्री शैवाल, शेल्फिश, समुद्री मछली, समुद्री भोजन, मांस, दालें.अनाज है।


आयोडीन की कमी से होने वाले रोग : आयोडीन की कमी से होने वाले विभिन्न रोग निम्नलिखित है 



  • आयोडीन की कमी से मुख्य रुप से घेंघा रोग होता है।

  • आयोडीन की कमी से चेहरे पर सूजन। गले में सूजन ; गले के अगले हिस्से में थाइराइड ग्रंथि में सूजनद्ध।

  • थाइराइड की कमी ;जब थाइराइड हार्मोन का बनना सामान्य से कम हो जाए।

  • गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवज़ात शिशुओं का वज़न कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि होते हैं।


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