केंद्रीय खाद्य-आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान का दिल व किडनी की बीमारी के चलते हुआ निधन


रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया 


दिल्ली : राजधानी दिल्ली में केंद्रीय खाद्य-आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान को गुरूवार फोर्टीस एस्कार्टस हार्ट-इंस्टीटयूट अस्पताल मे उनके दिल व कीडनी के सही से काम ना करने पर उन्हे एक्सट्रोकारपोरियल मेमब्रेंस-आक्सीजनेशन स्पोर्टस मशीन पर रखा गया था कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.अशोक सेठ की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था और कुछ दिनों बाद दोबारा फिर से ऑपरेशन होना था उनके निधन की जानकारी उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्विटर के जरिए दी । बता दे,(74) वर्षीय रामविलास पासवान काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और करीब एक महीने पहले उनकी हार्ट-सर्जरी हुई थी उसके बाद तीन अक्टूबर को उनकी दूसरी हार्ट की सर्जरी हुई थी।रामविलास पासवान का जन्म जुलाई 1946 में बिहार के जिला खगडिया मे हुआ वह (74) वर्ष के थे और दलित परिवार से थे ।


राजनीती के सियासत दौर उनकी खासियत एक मौसमी-वैज्ञानिक के तौर पर काम करने वालों में शुमार थी । वह सियासी समयानुसार हर तरह की सियासत के जर्रे में ढल जाने की काबिलियत रखते थे । यही वजह थी बिहार में अच्छी पकड़ होने के बावजूद बिहार की बजाय केंद्रीय-मंत्रालय का खास हिस्सा बने रहे । वह अपने सियासी दौर के जीवन में छह-प्रधानमंत्रियों की सरकार में केंद्रीय-मंत्री के रूप में कार्यरत रहे । 1989 मे वह पहली बार वी.पी सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने थे 1996 में देवी गौडा फिर आई.के गुजराल सरकार में रेल-मंत्री बने 1992 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में संचार-मंत्री पद पर तैनात थे और अभी वर्तमान सरकार में खाद्य-आपूर्ति मंत्री पद पर तैनात थे । साल 1975 में इमरजेंसी दौरान उन्होंने एक वर्ष से ज्यादा समय जेल में गुजारा 1977 में जेल से बाहर आने के बाद जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर उन्होंने चार लाख वोट के अंतर से वर्ल्ड-रिकॉर्ड तोड़ मतों से लोकसभा-सीट में जीत हासिल की,जिसके लिए गिनीज बुक-ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है। फिर 2000 में उन्होंने लोक जनशक्ति-पार्टी का गठन किया उसके बाद समता दल समता पार्टी मे सहयोगी के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने दिल्ली में अपनी (LJP)अलग पार्टी बना ली । उन्होंने अपने ग्यारह बार चुनावी दौर में नौ बार जीत हासिल की । 


आपको बता दें 2005 में सत्ता की चाबी पासवान की (LJP) लोक-जनशक्ति पार्टी के पास थी जिसमें उन्हें सम्मानजनक सीटें मिली थी और किसी भी दल की सरकार रामविलास पासवान की मदद के बिना नहीं बन सकती थी लेकिन उस समय पासवान मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग लेकर अड़े हुए थे । जिसके लिए जेडीयू और आरजेडी के तैयार ना होने के कारण 2005 में दोबारा से विधानसभा चुनाव हुआ,जिसमें उन्हें बुरी तरह से चुनावी हार का सामना करना पड़ा । पासवान नौ बार लोकसभा सदस्य और वर्तमान में राज्यसभा सदस्य थे पांच-दशक से संसदीय-राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी होने के बावजूद वह सोशल-मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे । उन्हें लाखों लोग फॉलो करते थे लंबे समय से बीमार रहने के कारण उनकी पार्टी को उनके बेटे चिराग पासवान संभाल रहे है ।


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय-मंत्रालय के सभी मंत्रियों और कांग्रेस की प्रियंका वाड्रा राहुल गांधी और अन्य विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ-नेताओ ने खाद्य-आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त कर श्रद्धांजलि-अर्पित करते हुए कहा,पांच दशक से भी ज्यादा समय की संसदीय राजनीति में उनके संघर्षमयी-जीवन को हमेशा याद रखा जाएगा ।आज उनके पार्थिव-शरीर को दोपहर दो बजे पटना के लोक जनशक्ति पार्टी कार्यालय में रखा जाएगा । उसके बाद उनका पटना में अंतिम-संस्कार किया जाएगा ।


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