भाषा से रसीला हुआ उत्तर प्रदेश

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नोयडा : बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों की काव्यात्मक साधना की परिचायक ऑनलाइन काव्य संगोष्ठी परवाज़ का दसवाँ अंक आज संपादित हुआ। 4 अक्टूबर 2020 को लोक भाषा-बोलियों पर आधारित, परवाज़ की १०वीं काव्य संगोष्ठी का आयोजन बेसिक शिक्षा निदेशक आदरणीय डॉ सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह एवम SIET की निदेशक सुश्री ललिता प्रदीप के गरिमामयी संरक्षकीय सान्निध्य में हुआ। आयोजन को गरिमामय व ऊर्जावान बनाने में कार्यक्रम के संरक्षक श्री अब्दुल मुबीन सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा निदेशालय लखनऊ हमेशा की तरह इस बार भी पूरे समय तक उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में भोजपुरी रत्न सम्मान से सम्मानित श्री तारकेश्वर मिश्र "राही" जनपद बलिया की वरद भूमिका रही जिनकी उपस्थिति में अवधी, बुंदेली, ब्रज और भोजपुरी इत्यादि लोक बोलियों की मनमुग्धकारी रसधार से श्रोता भावविभोर होते रहे।


संयोजक मण्डल टीम 'परवाज़' के सप्तर्षि शिक्षकों, शायर जनाब अदील मंसूरी, लखनऊ (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित), श्रीमती मृदुला शुक्ला


गौतमबुद्ध नगर (लेखक एवं सम्पादक) श्री जनार्दन पाण्डेय 'नाचीज़' खीरी, डॉ. रेणु देवी हापुड़ (राज्य अध्यापक पुरस्कार हेतु चयनित शिक्षिका) श्री अखिलेश चन्द्र पांडेय 'अखिल' प्रतापगढ़ (राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त) श्री मंसूर अहमद लखनऊ (सूचना एवं संचार तकनीक पुरोधा एवं तकनीकी सहयोगी) व श्री शिवम सिंह,जौनपुर (तकनीकी सहयोगी व शिक्षा में सिकरारा मॉडल प्रणेता शिक्षक) के अथक प्रयासों से यह काव्योत्सव सभी को विमोहित करता, सफलता के चर्मोत्कर्ष के चिर स्मरणीय आयामों को पार करता चला गया।


आयोजन का शुभारम्भ माँ सरस्वती की वन्दना से श्री ओम प्रकाश यादव, स.अ. उच्च प्राथमिक विद्यालय महराजगंज जौनपुर द्वारा "मैया का सुघर सूरतिया न हो जोति बरै दिन रात" की पंक्तियों से मनोहारी ढंग से किया गया। तदनन्तर अवधी के प्रचार प्रसार में ख्यातिलब्ध रचनाकार, राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित व कई साहित्यिक विदेश यात्राएँ कर चुके श्री राम बहादुर मिसिर, प्रधानाध्यापक, जनपद बाराबंकी ने अपनी हृदस्पर्शी प्रस्तुति, "मनई कइ जीवन धन बिरवा" से सभी को मन्त्रमुग्ध कर दिया। तदुपरान्त श्री राकेश कुमार 'अकेला' अध्यापक,


प्राथमिक विद्यालय परसौनी, ब्रह्मपुर, गोरखपुर ने, "तोड़ नाता बिटिया अब तू चौक चूल से, जुड़ि जा स्कूल से ना" द्वारा बिटिया को पढ़ने और आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस हियहारी प्रस्तुति के बाद श्री राहुल बाजपेयी प्र0अ0, प्राथमिक विद्यालय अमघट, विकास क्षेत्र बेहजम जनपद लखीमपुर-खीरी से "फिर से अइहैं बहारें स्कूलम अपने" प्रस्तुत कर सबको भावुक कर दिया। अगले क्रम में प्रा वि कमासिन द्वितीय, कोन मिर्जापुर से उपस्थित श्री विवेक कुमार पाठक स0अ0, ने, "गाँव में का बा, " की सरस प्रस्तुति दी। प्रा वि- जलालपुर माफ़ी ब्लॉक- बीकापुर जनपद- अयोध्या से श्रीमती सीमा शुक्ला ने देशभक्ति लोक गीत "बलम लाओ तिरंगा चुनरिया, किनरिया पै भारत लिखा" से देशराग की सुमधुर तान छेड़ी। श्री गौरव शुक्ल प्रधानाध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेनपुर, विकास खंड-बिजुआ लखीमपुर खीरी ने, "जब यादि गाँव की आवति है,तब सहर न तनिकौ भावति है" से मर्ममयी प्रस्तुति दी। श्री देवेन्द्र कश्यप 'निडर', स अ, प्रा वि हरिहरपुर, वि क्षे - मछरेहटा जिला - सीतापुर ने, "बिटिया केरी इच्छा" के भाव माधुर्य से सबको मोह लिया। श्री विश्वनाथ तिवारी 'विश्व', स. अ. प्राथमिक विद्यालय, हमजापुर विकास क्षेत्र- सफीपुर, जनपद- उन्नाव ने, "चले जायो ये कोरोना हमारे गाँव से" द्वारा सामयिक परिस्थितियों पर प्रहार किया। श्री मनोज कुमार सिंह 'मयंक', सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय तिवारीपुरवा विकास खण्ड - महसी, जनपद -बहराइच ने, "ऑयल बा ई विपत्ती का काल इहै सगरो समझावल जाला" से भावपूरित प्रस्तुति दी। तदुपरान्त, श्री कुमार अभिनीत, स.अ., प्रा.वि. मछलीगांव-1, कैम्पियरगंज, गोरखपुर, ने अपने मनभावन पाठ से सबको आह्लादित कर दिया। श्री प्रेम नाथ मिश्र (स.अ.) प्रा.वि. इमलीडीह, वि.खं.-उरुवा, जनपद- गोरखपुर ने, "कवनो कहनिया सुनइत ए मितवा, जिनगी के रहिया देखइत ए मितवा" की मधुमय प्रस्तुति दी। श्री सत्येंद्र प्रताप सिंह, अध्यापक, सम्मिलित विद्यालय मान्धाता द्वितीय जनपद प्रतापगढ़ ने, "हमका मोह होइ गवा बा अपने स्कूल से" पढ़कर जीवन में स्कूल की महत्ता को उजागर किया। ततपश्चात श्रीमती अभिलाषा विनय सहायक अध्यापिका, उ. प्रा.वि. वाजिदपुर, ब्लॉक - बिसरख, जनपद - गौतमबुद्ध नगर, ने, "अम्मा पढ़ै जाय का हमका बस्ता मोहे मँगा दो ना" द्वारा एक बालमन की पढ़ने की ललक को, मोहक ढंग से प्रस्तुत किया। तदनन्तर, श्री ओम प्रकाश यादव उच्च प्राथमिक विद्यालय महराजगंज, जौनपुर ने, "जहाँ सुहागिन माँग लुटावैं" से श्रोताओं को बाँध लिया। फिर श्रीमती प्रियंका त्रिपाठी 'तरंग' अध्यापिका, जनपद- बाँदा ने, बहुत ही मोहक ब्रज भाषा सवैये से माहौल रससिक्त कर दिया।


आयोजन का सधा हुआ संचालन, डॉ रेणु देवी हापुड़, व श्री अखिलेश चंद्र पाण्डेय (अखिल) प्रतापगढ़ के द्वारा विभिन्न लोकभाषाओं में किया गया। आयोजन का समापन श्री अब्दुल मुबीन, सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा निदेशालय के संरक्षकीय वक्तव्य तथा मुख्य अतिथि के रूप में भोजपुरी रत्न सम्मान से सम्मानित, श्री तारकेश्वर मिश्र "राही" की अन्तस सरसाती भावज्योतित काव्य प्रस्तुति से हुआ। संचालन कर रहे अखिलेश अखिल ने अवधी विकास गीत पढ़ा कि- भाग्य अपनी कलम से लिखाई किहा जाय, चला चला मोरे बचवा पढ़ाई किहा जाय"। इसी क्रम में संचालक सदस्या डॉ रेणु देवी ने "जबसे करोना का संकट आवा है।जन जन का बहुत डरावा है" पढ़कर सदन को जीवंत बनाये रखा। कार्यक्रम का समापन परवाज़ की दसवीं कड़ी के सभाध्यक्ष मुहम्मद अदील मंसूरी लखनऊ के अध्यक्षीय कविता पाठ व आभार ज्ञापन से हुआ।


 


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