बढ़ती जनसंख्या, घटते संसाधन 


रिपोर्ट : अंकुर सिंह


दिल्ली : जनसंख्या वृद्धि कही न कही हमें आने वाले समय में भयंकर दुष्परिणाम की तरफ ले जा रही है,  इसपर हम आज न सचेत हुए तो आने वाले समय में संसाधनों के लिए महायुद्ध जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता हैं । क्योंकि दैनिक उपयोग के संसाधन जैसे की पेट्रोल, डीजल, पेयजल, निवास और खेती हेतु भू-भाग इत्यादि सीमित मात्रा है।


जनसंख्या नियंत्रण कानून यदि तत्काल में प्रभावी नहीं किया गया तो आने वाले निकट भविष्य में संसाधनों के लिए देश में गृह-युद्ध का सामना करना पड़ेगा । जब सीमित संसाधन के लिए उपयोगकर्ता ज्यादा होंगे तो उन संसाधनों पर अधिकार के लिए भ्रष्टाचार और अपराध भी बढ़ेंगे।


जैसा की हमारे देश में कृषि योग्य भूमि विश्व का 2.4% है , पेय-जल विश्व का 4% है और जनसंख्या  विश्व का 20% हैं जो कहीं न कहीं ये इंगित करती है कि भविष्य में हालात रोटी एक और खाने वाले दस जैसे होने वाली हैं। जनसंख्या नियंत्रण पर हमें अपने पड़ोसी देश चीन से सबक लेनी चाहिए चीन 96 लाख वर्ग किलोमीटर में पसरा है और  भारत 33 लाख वर्ग किलोमीटर से भी कम में है, इस तरह आंकड़ों के हिसाब से भारत की आबादी चीन से कम है, लेकिन क्षेत्रफल की तुलना से देखें तो यहां जनसंख्या घनत्व में हम पहले से ही चीन से आगे निकल चुके है। आज के समय में चीन में प्रति मिनट जन्म-दर 11 बच्चें का और हिंदुस्तान में 33 बच्चों का, इस आकड़ों के आधार पर हम कह सकते हैं की यदि जनसंख्या नियत्रंण के लिए जल्द को कठोर दंडात्मक कानून नहीं बनाया गया तो आने वाले 5-7 साल में चीन  को पछाड़ नंबर एक पर काबिज होंगे, जो कि विकास में बाधक होगा क्योंकि संसाधन उतने ही रहेंगे और उपयोगकर्ताओं की संख्या ज्यादा होने से भुखमरी, बेरोज़गारी, आपराधिक गतिविधि, और बीमारी जिसे संकट का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि सबके इलाज के लिए उतने अस्पताल ना होंगे, सृजित उतने रोज़गार ना होंगे, खेतों में पैदावार अन्न से सबकी भूख ना मिटेगी और सबको अच्छी और सस्ती शिक्षा ना होने से अशिक्षितों के वजह से लोग तनाव ग्रस्त होकर आपराधिक प्रवृत्ति के तरफ रुख करेंगे और पर्यावरण ज्ञातों के अनुसार भू-भाग पर 33% पेड़ - पौधे भी होना चाहिए संतुलित पर्यावरण के लिए।


भविष्य में संसाधन के संकट और आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम पर अंकुश रखना चाहते हैं तो मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में जन्मे बालकवि वैरागी जी के नारे हम दो हमारे दो पर अध्यादेश लाना होगा। जहाँ तक मेरा मानना है हम दो हमारे दो  के जगह हम दो हमारे एक का कानून लाना चाहिए, इसके लिए पहले लड़के-लड़कियों में  लिंग के आधार पर भेदभाव मिटाना होगा (हाँ मानता एक संतान में एक डर हैं असमय संतान की मृत्यु का, उस अवस्था में हम देश में संचालित विभिन्न अनाथालयों से किसी बच्चे को गोद लेकर उसे सुखद भविष्य भी दें सकते हैं)। आंध्रा, गुजरात महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात जैसे कुछ राज्यों में परिवार नियोजन जैसे प्रावधान हैं, अभी हाल में ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में दो संतानों तक वाले अभिभावक को चुनाव लड़ने की छूट रहेगी ऐसा मुद्दा भी चर्चा में हैं, बेशक क़ाबिले तारीफ भी है ऐसा कानून लेकिन ऐसे कानून केवल पंचायत स्तर पर ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा चुनाव और बाकी सरकारी सुविधाओं में भी समय-सीमा (कानून बनने के बाद जिनके ज्यादा संतानें होंगी उनको इन सब सुविधाओं से वंचित किया जाएँ, कानून के पूर्व जिनके संतानों की संख्या ज्यादा हो उन्हें सुविधाएँ पूर्व की भांति मिलती रहे ) के साथ लागू होना चाहियें।


जनसंख्या नियंत्रण कानून चीन ही नहीं बल्कि बहुत के देशों ने यही कानून बनायें , उदाहरण के रूप में ईरान को ही ले लिजिये 1990 में वहाँ के तत्कालीन राष्ट्रपति ख़ुमैनी साहब ने हम दो हमारे दो का कानून लाएँ, जिसके आधार पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने करुणाकरण समिति का गठन किया, जिस समिति ने काफी अध्ययन के बाद ये स्वीकार किया भारत में भी ईरान जैसा जनसंख्या नियंत्रण कानून का जरुरत हैं कानून की जरुरत हैं, वो अलग बात हैं की किस राजनीतिक कारणवश वो कानून अभी तक नहीं बन पाया यदि नियम उस समय लागू हो गया होता तो आज हमारे देश की जनसंख्या सवा सौ करोड़ होती, साल 1975-76 में जनसंख्या नियंत्रण हेतुं नसबंदी जैसे तानाशाही कानून तो आया जिसमें अविवाहित पुरुषों को भी पकड़कर नसबंदी किया गया था, जिससे लोगो के बीच एक गलत सन्देश गया।


22 फरवरी, 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी  ने न्यायमूर्ति एम एन वेंकटचलैया (जिन्होंने राइट टू फूड, राइट टू एजुकेशन और मनरेगा जैसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान किया) की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग का गठन किया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर 4 जज, 2 सांसद और कई बड़ी हस्ती थे, इस आयोग ने दो साल के विस्तृत अध्ययन के बाद कहा कि संविधान में अनुच्छेद 47A को जोड़िये और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाइये दुर्भाग्य से कुछ राजनीतिक समीकरणों के वजह से इस कार्य का भी शुभ आरम्भ नहीं हो पाया।


आज देश के विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर सभी राजनीतिक दलों को राष्ट्रहित में साथ आना होगा और सामाजिक संगठनों, धार्मिक गुरूओं, शिक्षित और युवा वर्गों को चाहिए की लोगों को  जनसंख्या विस्फोट पर अंकुश के लिए जागरूक करें।


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