विश्व साक्षरता दिवस- "विकास के लिए साक्षरता जरूरी"


- गोपाल कृष्ण पटेल


आज विश्व के सामने कई मुसीबतें मुंह खोले खड़ी हैं। इंसानों की जरा-सी लापरवाही किसी भी पल विकराल मुसीबतों को दावत दे सकती है। पर्यावरण संकट, प्रदूषण, जनसंख्या, बेरोजगारी, बीमारी, अकाल, प्राकृतिक आपदाओं से पूरा विश्व घिरा हुआ है। इन सब मुसीबतों से अगर विश्व को कोई चीज अब तक बचाए हुए है तो वह है इंसानों की सूझबूझ और तकनीक। सूझबूझ और तकनीक को बिना शिक्षा के प्राप्त करना कितना मुश्किल होता है यह सब जानते हैं। आज तकनीक और विकास के इस दौर में शिक्षा ही मनुष्य की सबसे बड़ी सहयोगी है। शिक्षा एक ऐसा धन है जो मनुष्य के साथ हमेशा रहती है, जो ना बांटने से कम होती है और ना ही इसे कोई चुरा सकता है। देश और समाज के लिए शिक्षा बहुत जरूरी होती है। साक्षरता का अर्थ है शिक्षित होना अर्थात् पढने और लिखने की क्षमता से संपन्न होना।


शिक्षा एक चाय वाले को देश का आईएएस ऑफिसर बना देती है जो आगे चलकर देश के विकास में अहम योगदान देता है। शिक्षा के महत्व का अगर बखान किया जाए तो हो सकता है एक आर्टिकल भी कम पड़ जाए। शिक्षा के महत्व को समझते हुए ही विश्व का हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए सभी तरह के तिकड़म अपनाता है।


मानव विकास और समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। सफलता और जीने के लिए साक्षरता बेहद महत्वपूर्ण है। जिस देश और सभ्यता ने ज्ञान को अपनाया है, उसका विकास अनोखी गति से हुआ है और इतिहास इस बात का साक्षी है। शिक्षा के महत्व का शब्दों में वर्णन करना बहुत मुश्किल है और इसलिए हर साल आठ सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है।


निरक्षरता अंधेरे के समान है और साक्षरता प्रकाश के समान है। इसलिए व्यक्ति का साक्षर होना अतिआवश्यक है, जिससे व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान हो और वह समाज के प्रति अपने अधिकारों और दायित्व का निर्वाहन भली-भांति कर सके साथ ही सभ्य समाज के लिए लोगों का शिक्षित होना बेहद जरूरी है। साक्षरता आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। इसका सामाजिक एवं आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था।


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