पितृ-विसर्जनी अमावस्या, 17/9 को


DM और पालिकाध्यक्ष से मांग


घाटों पर सफाई, सेनिटाइजेशन और फिजिकल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था हो


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मीरजापुर, (उ.प्र.) : वर्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धार्मिक पर्व है *पितृ-विसर्जनी अमावस्या*। मान्यता है कि देवताओं की कठिन आराधना के बजाय पितरों को सिर्फ श्रद्धापूर्वक श्राद्ध और तर्पण कर दिया जाए तो पूरे वर्ष कुशलता अधिक मिलती है। इसीलिए देवपूजा से अधिक वरीयता पितृपूजा के लिए दी गई है।


गंगा-घाट की सफाई, सेनिटाइजेशन और फिजिकल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था हो - विन्ध्याचल के रामगया घाट सहित नगर के नारघाट, गंगाराम घाट, बाबाघाट,  सुन्दरघाट, ओलियरघाट एवं बरियाघाट आदि  कतिपय अन्य घाटों पर अमावस्या तिथि, 17 सितंबर को प्रातः काल से ही श्राद्ध और पिंडदान आदि के लिए लोग जुटेंगे । इसलिए इन घाटों पर हर हालत में 16 सितंबर की शाम तक सफाई, सेनिटाइजेशन आदि की व्यवस्था होनी चाहिए ।


शारीरिक अंतराल (फिजिकल डिस्टेंसिंग) हो - वैसे तो घाट पर श्राद्ध और तर्पण से भी अधिक महत्ता घर के आंगन में किए जाने का उल्लेख है। घर पर व्यवस्था होने के बावजूद जो घाट पर करते हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम पुण्य मिलता है। घाट पर ज्यादा भीड़ की वजह से कोरोना काल में पुलिस ड्यूटी और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगे और वे फिजिकल डिस्टेंसिंग के लिए माहौल जरूर बनाएं ।


नापितों (नाइयों) के लिए व्यवस्था - श्राद्ध में लोग बाल और दाढ़ी कटवाते हैं, इसलिए नाइयों को भी चाहिए कि वे मास्क लगाकर और कैंची, कपड़ा तथा छुरी (ब्लेड) आदि सेनिटाइज करते रहें।


DM निर्देश दें और निगरानी अधिकारी नियुक्त करें - पर्वों पर जनता को अधिक सुविधा के लिए अब तक बराबर सजग रहने वाले DM सुशील कुमार पटेल से प्रबद्ध नागरिकों ने मांग की है कि कोरोना नियंत्रण के लिए इस पर्व पर घाटों की निगरानी की वे व्यवस्था जरूर कराएं। पुरोहितों, श्रद्धालुओं और नापितों को मास्क लगाने के लिए पुलिस ड्यूटी जरूर लगवाएं। इसी क्रम में नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष मनोज कुमार जायसवाल जो ऐसे पर्वों पर सफाई और चूना आदि विशेष रूप से छिड़कवाते हैं, वे उन घाटों पर जहां बाढ़ घटने से सीढ़ी पर बालू है, उसे हटवाने का निर्देश दें तथा सफाई की व्यवस्था शाम तक अवश्य कराएं।


गिफ्ट पर ज्यादा ध्यान - जिस संचारतंत्र को इस ओर दो-चार दिन पहले से आवाज उठानी चाहिए थी, वे व्यावसायिक फर्मों, राजनीतिज्ञों के गिफ्ट में ही प्रायः उलझे रहते हैं। यहां तक कि इन दिनों धार्मिक आश्रमों से आटा-पिसान, दाल-चावल, घी-तेल मसाला के चक्कर में फंस गए हैं, इसलिए उनकी नजर इधर नहीं गई। बहराल बुधवार शाम तक व्यवस्था हो जाए तो सुविधा होगी लोगों को।


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