पेट की आग बुझाने के लिये मुंबई के सार्वजनिक जगहों पर गरीब मजदूर वर्ग की नाबालिग लड़कियां वैश्य वृत्ति व्यवसाय का ले रही है सहारा !

मुंबई की लाईफ लाइन कही जाने वाली मुंबई लोकल के शुरू न होने का परिणाम


मुंबई : मुंबई की लाईफ लाईन  कही जाने वाली लोकल ट्रेन  बंद होने का गहरा असर मुंबई के झुग्गियों झोपड़पट्टियों में रहने वाले गरीब मजदूरों के परिवारों की आर्थीक तौर पर स्थिति पूरी तरीके से चरमराई के तौर पर देखी जा रही है । 
परिणाम स्वरूप लॉक डाउन के पूरे 3 महीनों में जरूरतमंद जनता को मुंबई के सिगनलों पर खाने के डिब्बों के लिये भीड़ लगते देखाई देती परंतु वर्तमान समय मे पेट की आग बुझाने के लिये वैश्य वृत्ति वैश्य करने को मजबूर है पैसों के खातिर सार्वजनिक जगहों पर शाम 7 बाजये के बाद देर रात आंधेरे में नशेड़ी बड़ी बाप के बर्बाद लड़कों के झुंड के बीच मंडराते दिखाई दे जायेंगी ।ऐसे मामले आपको शिवाजीनगर मानखुर्द विधानसभा क्षेत्र के हर गलियों चौराहे से होते हुए मुंबई के विभिन्न झुग्गियों झोपड़पट्टियों में इंदिनों खुले आम देखने को मिलेगा ।


उल्लेखनीय तौर पर इतनी बड़ी ज्वलंत समस्या को लेकर  आज पूछ रही है राज्य की जनता की कौन है गरीब मजदूरों वर्ग की दिहाड़ी जनता जो रोजना कमाई पर निर्भर रहने वाले कुंवा खोदकर पानी पीने वाली जनता को ऐसे दयनीय  हालात में पहुंचाने का जिम्मेदार  कोरोना लॉक डाउन के  नाम पर बढ़ा-बढ़ा कर बेरोजगारी और भुखमरी बढ़ाने का काम क्यों  कर रही  राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार  ?
मुंबई के बुदजीव वर्ग के अनुसार क्यों नहीं राज्य की उद्धाव सरकार गरीब मजदूर वर्ग की 6 महीनो के लॉक डाउन समय मे जमा पूंजी खत्म होने के बाद  जीवन निर्वाह करने के लिये आर्थीक सहयोग करती है।वैसे भी पूरे कोरोना लॉक डाउन काल मे राज्य की जनता की मदद करने में विफल उद्धाव सरकार पहले से ही बदनामी का दाग लिए घूम रही है ।


 कहा जाता है कि मुंबई की लाईफ लाईन कही जाने वाली लोकल ट्रैन कोरोना अनलॉक  4.0 पर भी शुरू न होने से देश की आर्थीक राजधानी कही जाने वाले मुंबई महानगरी के झुग्गी झोपड़पट्टियों में हालात बेकाबू होते जा रहे है ।मुंबई के बुदजीव वर्ग ने पहले ही चेता दिया है कि केंद्र की बीजेपी सरकार से लेकर राज्य की विभिन्न सरकारे अगर समय रहते कोई ठोंस कड़े कदम नहीं उठायेंगे तो भारत देश सीरिया ,लीबिया , युगांडा  जैसे ग्रह युद्ध से ग्रस्त दरिद्र देशों की कतार में शामिल हो जायेगा ।


बताया जाता है कि महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार के राज में राज्य की  गरीब मजदूर वर्ग की जनता को जीवन निर्वाह करने के लिये लगने वाले पैसों के खतिर पेट भरने के लिये महिलाओं को अपना जिस्म का सौदा करना पड़ता है ।
उस राज्य के मुख्यमंत्री की लिये कितने बड़ी शर्मिंदगी की बात है ।राज्य के ऐसे मुक्यमंत्री को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिये जो हालात सुधारने के नाम पर जनता को भूखे रखकर सिर्फ अपनी और अधिकारियों की जेबे भरने में संलिप्त सक्रिय तौर पर दिखाई दे रहे है ।


कहा जाता है कि भारत देश मे ऐसे भी लोग है जिनका कोरोना लॉक डाउन बढ़ने से चांदी काटते दिखाई पड़ रहे है ।खाने पीने की चीजों से लेकर अस्ताल डॉक्टर व प्रशासनिक सरकारी महेकामे के नेता और अधिकारी यह सब लोग रुपयो पैसों से   बोरी भरते देखे जा रहे है  । मनमाना ऊंचे महेंगे भाव मे बेचने से लेकर इलाज के नाम पर पैसों की लूट मचाई   है ।कहा जाता है कि सामाज के ऐसे लोग नही  चाहते कि लॉक डाउन खत्म होते ही उनके कमाई का जरिये बंद जाय।इसी के चक्कर मे  किस तरह लॉक डाउन बढ़ सके ,इस पर अधिक जोर दिया जा रहा है ।गौरतलब हो कि मुंबई मनपा का कोरण्टाई न सेंटरों में महापौर किशोरी पेडणेकर ने अपने लड़के की कंपनी को कर्मचारीयो आपूर्ति करने का ठेका देने के भ्रस्टाचार का मामला बीजेपी ने सार्वजनिक तौर पर उजागर किया है ।                 
                


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