कोविड-19 के इस दौर में अधिक जोर से बोलना या तेज हंसने की आदत दूसरों के लिये साबित हो सकती है खतरनाक


ऊंची आवाज में बात करने व हंसने से पांच गुना फैलता है ड्रॅापलेट्स


रिपोर्ट : नीलू सिंह/अरूण शुक्ला


ज्ञानपुर/भदोही, (उ0प्र0) : कोरोना वायरस जैसे महामारी के दौरान यदि अधिक जोर से बोलने या तेज हंसने की आदत है तो कोविड-19 के इस दौर में यह आदत दूसरों के लिये खतरनाक साबित हो सकती है। 


मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि कोरोना के चलते सभी लोगों को अपनी आदतों में बदलाव लाने की जरूरत है। क्योंकि ऊंची आवाज में बात करने व हंसने से व्यक्ति के ड्रॅापलेट्स काफी दूर तक जाते हैं। यदि संक्रमित व्यक्ति के ड्रॅापलेट्स दूर तक जाएंगे तो यह अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। ऊंची आवाज में बोलने व हंसने से मुंह से निकलने वाले ड्रॅापलेट्स पांच गुना ज्यादा निकलते हैं और दूर तक जाते हैं। प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किये गये गाइडलाइन में भी इस बात का जिक्र किया गया हैं कि बोलते वक्त लार की अति सूक्ष्म बूंदे एरोसाॅल बनकर निकलती हैं। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित है तो इन बूंदों के साथ वायरस भी निकलता है। मुंह से निकलने वाली बूंदों के साथ वायरस की बूंदे भी बाहरी सतह पर गिरती हैं। इसके बाद उस जगह के सम्पर्क में कोई अन्य व्यक्ति आता है तो उसके हाथों या कपड़ों पर यह वायरस चिपक जाता है। ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति यदि अपने मुंह, नाक या आंख पर हाथ लगाता है तो उसके संक्रमित होने का खतरा काफी अधिक बन जाता है। 


सीएमओ ने बताया कि जिले में पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि कोरोना वायरस के काफी मामले ऐसे थे जिनमें ज्यादा मरीज एसिप्टोमेटिक थे यानि उनके कोई लक्षण नहीं थे। जब सम्बन्धित व्यक्ति ने अपनी जांच कराई तब उसे पता चला कि वह कोरोना वायरस की चपेट में है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति मास्क नहीं लगाया है, ऊंची आवाज में बोल रहा है और इस तरह से उसकी ऊंची आवाज में बोलने की आदत हैं तो जाने अनजाने में संक्रमण फैलाने में काफी हद तक सहायक साबित हो जाता है।  


नियमों का करें पालन 



  • छींकते या खांसते वक्त रूमाल या टिश्यू पेपर का करें प्रयोग

  • छह फुट दूर से ही बात करें

  • छींकते या खांसते वक्त नाक व मुंह को बिल्कुल न छुएं

  • 40 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएँ


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