कोरोना पीड़ितों का इलाज बेहद कम कीमतों में किया मुमकिन


निजी हॉस्पिटल निःस्वार्थ का उपक्रम, अब तक 1100 मरीजों को कर चुके है कोरोनामुक्त


मुंबई : देश में कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। कोरोना से ग्रसित लोगो के लिए इलाज के दौरान आनेवाले खर्चे की चिंता भी है जो लाखो में है। शासन की सख्ती और कोरोना इलाज की तय रकम होने के बावजूद भी देश भर में निजी अस्पतालों का बिल लाखो में आ रहा है।   इसी के मद्देनज़र निजी हॉस्पिटल निःस्वार्थ के संचालक डॉ महाबली सिंह और उनकी पत्नी डॉ ज्योति सिंह ने इलाज में दौरान होनेवाले खर्च की लागत को बेहद ही सिमित कर दिया है।  डॉ सिंह कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज महज 20 से 50 हज़ार की बेहद कम कीमत में कर रहे है। 


कोरोना काल के इस दौर में डॉ. दंपति अपने बेटो से दूर अप्रैल महीने की शुरुवात से ही कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे है। डॉ महाबली सिंह द्वारा अपने 2 हॉस्पिटल; निःस्वार्थ हॉस्पिटल ओर स्टार हॉस्पिटल को अप्रैल महीने के शुरुवाती दिनों से ही मनपा आयुक्त से कहकर कोरोना इलाज के लिए बतौर कोविड सेंटर रिज़र्व करवा दिया है।  डॉ महाबली सिंह अपने साथी डॉक्टरों के साथ अपने तीसरे लाइफ केयर हॉस्पिटल में भी कोरोना से पीड़ित मरीजों का इलाज कर रहे है। 


विरार (पश्चिम) के मंगलमूर्ति लेन में स्थित निःस्वार्थ हॉस्पिटल में आनेवाले मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल में आ रही पीपीई किट की कोई कीमत नही रखी गयी है। मरीजों को रोज़ाना चेक कर रहे डॉक्टरो की विजिट भी अस्पताल की तरफ से निशुल्क रखी गयी है। 


कोरोना के लक्षण वाले मरीज जिनकी अवस्था गंभीर है और जिन्हे ऑक्सीजन देना पड़े, ऐसे मरीजों से प्रतिदिन महज 3500 रपये लिये जा रहे है, 10 दिनों तक ऑक्सीजन के इस्तेमाल पर मरीजों को महज 35 हज़ार का भुगतान करना पड़ रहा है। राज्य स्वास्थ विभाग की गाइड लाइन्स के अनुसार निजी अस्पताल ऐसे केस में प्रतिदिन 7000 तक चार्ज कर सकते है।  यानी 10 दिन दिन के 70000 रपये। 


कोरोना मरीज जिन्हे वेंटीलेटर की जरुरत हो उनसे अस्पताल द्वारा प्रतिदिन केवल 5000 लिए जा रहे है, 10 दिनों तक वेंटीलेटर के इस्तेमाल पर मरीजों को महज 50000 हज़ार का भुगतान करना पड़ रहा है। राज्य स्वास्थ विभाग की गाइड लाइन्स के अनुसार वेंटीलेटर की जरुरत होने पर निजी अस्पताल प्रतिदिन 9000 रुपये चार्ज कर सकते है ! यानी 10 दिन के 90000। Asymptomatic मरीजों को डॉ महाबली सिंह घर ही में क्वारंटाइन रहने की सलाह दे रहे है। मामूली लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज के खर्च की सीमा १० से १५ हज़ार के बीच है, जो डेंगू, मलेरिया और टाइफोइड के इलाज में आने वाले खर्च की तरह है। 


डॉ सिंह की माने तो वो इन मरीजों का इलाज कम कीमत में करके महज अपने मनुष्य और चिकित्सक धर्म का पालन कर रहे है।  हॉस्पिटल में काम करनेवाले तमाम कर्मचारियों को कोरोना काल के भयपूर्ण माहौल में मरीजों के इलाज व सेवा में कार्यरत रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। डॉ महाबली सिंह और उनकी पत्नी कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की कॉउन्सिलिंग भी कर रहे है, ताकि कोरोनामुक्त हो चुके मरीज जिनके शरीर में एंटीबॉडी हो वो गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों को प्लाज़्मा दान कर अपना महत्वपूर्ण किरदार अदा कर सके। 


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