गर्भवती के लिए उपयुक्त पोषाहार है सहजन, पोषण वाटिका में सहजन को पौधे लगाने पर जोर


हरी साग सब्जियों में सबसे गुणकारी है सहजन


रिपोर्ट : टी0सी0विश्वकर्मा


मीरजापुर, (उ0प्र0) : पोषण माह में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग सहित तमाम विभागों के साथ पोषण माह सम्बन्धी कार्यक्रमों के साथ सभी गतिविधियों का सुचारू रूप से संचालन किया जा रहा है। इस माह में शासन द्वारा चलायी जा रही है। योजनाओं के माध्यम पुष्टाहार व अन्य हरी साग सब्जियां देकर कुपोषण को दूर किया जा रहा है। वही पोषण माह के अंतर्गत पोषण वाटिका लगाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें सहजन , गिलोय और तुलसी का पौधा लगाने पर जोर दिया जा रहा है। इन पौधों में सहजन का पौधा कुपोषण को दूर भगाने में अहम भूमिका है।


सीटी ग्रामीण के बाल विकास परियोजना अधिकारी विमलेश ने बताया कि पोषण माह के दौरान विभाग में कार्यरत सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने में जुटी है। वहीं कुपोषण को समाप्त करने के लिए लोगों को जागरूक करने का भी काम कर रही है।


जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान समय जिले में 2668 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित किये जा रहे है। इन केन्द्रों पर कम से कम एक सहजन के पौधे को रोपित किया जा रहा है। हर परियोजना में पांच-पांच पोषण वाटिका के हिसाब से 70 पोषण वाटिका लगाने की विभाग द्वारा तैयारी की जा चुकी है। पौधों के वृक्ष बनने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सहजन खाने से गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर होने के साथ ही नवजात शिशु भी कुपोषण से मुक्त होगे। नियमित रूप से सब्जी व फल भोजन में प्रयोग करने से शरीर स्वस्थ्य रहता है। वहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाता है। भोजन में पोषक तत्वों की कमी ही मुख्य रूप से कुपोषण का कारण है। कुपोषण से सुपोषण की ओर जाने के लिए पोषण वाटिका अत्यन्त जरूरी है।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शान्ति त्रिपाठी ने बताया कि केन्द्रों पर सहजन के पौधों को लगवाने का मुख्य उद्देश्य गर्भवती व कुपोषित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य पर बल देना है।  


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