एएससीआई ने गुमराह करने वाले विज्ञापनों से बचाने के लिये अपनी ऐड मॉनिटरिंग को 3,000 डिजिटल प्लेटफॉर्म्‍स तक विस्‍तारित किया


 


मुंबई : द एडवरटाइजिंग स्टैण्डर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) अब टीएएम (टैम) मीडिया रिसर्च के साथ भागीदारी कर डिजिटल प्‍लेटफॉर्म्‍स पर दिए जाने वाले विज्ञापनों पर भी अपनी पैनी नज़र रखेगा। गौरतलब है कि एएससीआइ संभावित रूप से गुमराह करने वाले विज्ञापनों की पहचान के लिये अपनी नेशनल एडवरटाइजिंग मॉनिटरिंग सर्विस (एनएएमएस) के अंतर्गत पहले से ही प्रिंट और टेलीविजन मीडिया पर नजर रख रहा है। शुरूआत में, एएससीआई डिजिटल मीडिया पर फूड एंड बेवरेज, हेल्थकेयर और एज्युकेशन सेक्टर्स के विज्ञापनों पर अपनी नज़र रखेगा, क्योंकि पिछले साल एएससीआई को इनसे जुड़ी 79 प्रतिशत शिकायतें मिली हैं।


इसके साथ ही एएससीआई अब एक मीडिया होरिज़ोन की निगरानी करेगा, जिस पर भारत में विज्ञापनों का 80 प्रतिशत से ज्यादा खर्च होता है।


मीडिया पर होने वाले कुल खर्च का 30 प्रतिशत अब डिजिटल एडवरटाइजिंग में होता है, और यह तेजी से बढ़ रहा है, इसलिये यह इस समय की जरूरत थी। इन प्लेटफॉर्म्‍स में सर्च इंजन, वीडियो साइट्स, न्यूज पोर्टल्स और रुचियों वाली वेबसाइट्स, जैसे ज्योतिष और ऑटोमोबाइल्स शामिल हैं। यह एएससीआई की उन जिम्मेदारियों का स्वाभाविक विस्तार है, जिसे वह विज्ञापन जगत में नैतिकता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने और उसमें उपभोक्ता का भरोसा बढ़ाने के लिये उठाता है।


एएससीआई के चेयरमैन रोहित गुप्ता ने कहा, ‘‘हम ऐसी दुनिया में रहते हैं, जो दिन-ब-दिन ज्यादा डिजिटल हो रही है और इसलिये बहुत सी मार्केटिंग इन प्लेटफॉर्म्‍स पर हो रही है। एक स्व-विनियामक निकाय के लिये अपनी निगरानी को ऑफलाइन स्पेस से बढ़ाकर ऑनलाइन स्पेस तक ले जाना उचित है। मेरे अनुसार एएससीआई विश्व का एकमात्र स्व-विनियामक संस्‍थान है, जो एडवरटाइजिंग की ऐसी विस्तृत और सतत् निगरानी करता है। इसके लिये हमें टीएएम से बेहतर भागीदार नहीं मिल सकता था- उसकी प्रतिष्ठा और व्यापक अनुभव एडवरटाइजिंग पर भरोसा बढ़ाने और हमारी नैतिक संहिता का अनुपालन सुनिश्चित करने के हमारे मिशन में हमारी मदद करेगा।’’


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