अत्यधिक तनाव के कारण हो रहा है हिस्टीरिया 


रिपोर्ट : टी0सी0विश्वकर्मा


मीरजापुर, (उ0प्र0) : यूं तो हर व्यक्ति किसी न किसी तनाव का सामना हर दिन करता है, लेकिन कुछ लोगों में तनाव इस हद तक बढ़ जाता है कि उसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्यायें जन्म लेने लगती हैं। हिस्टीरिया भी इन्हीं में से एक है। यह समस्या कोरोना काल में अधिक समस्याएं सामने आ रही है।


अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर अजय ने बताया कि कोरोना काल में होम आइसोलेशन के दौरान अधिक तनाव में होने से इस रोग का सामना करना पड़ रहा हैं। इस रोग में व्यक्ति का अचानक दांत भिंचने लगता हैं। इसके अतिरिक्त अचानक हंसना, बेहोशी उल्टी, दम घुटना बोलने में परेशानी ऐंठन, जोर - जोर से चिल्लाना भी हिस्टीरिया बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, जिसका सही समय पर पता लगाकर उपचार किया जाना बेहद आवश्यक हैं।


मण्डलीय चिकित्सालय में सुविधा है उपलब्ध


मानसिक रोगियों की सुविधा के लिए मण्डलीय चिकित्सालय में एक अलग कक्ष बनाया गया है। जिसमें मानसिक रोगियों को सुचारू रूप से इलाज किया जा रहा है इसके लिए चिकित्सालय में 30 बेड का एक अलग से वार्ड बना हैं। जहां पर मानसिक रोग चिकित्सक डाक्टर उमेश की देख रेख में मनसिक रोगियों का उपचार किया जा रहा है। 


जाने होने के मुख्य कारण


हिस्टीरिया एक मानसिक समस्या है, जिसके पीछे का मुख्य कारण तनाव तो ही है, उसके साथ ही कोई गंम्भीर सदमा का लगना, अपने विचारों को दबाना, हादसा, दांपत्य, जीवन में परेशानी व आर्थिक कारण इस बीमारी का मुख्य वजह बनता है।


महिलायें हो रही है अत्यधिक प्रभावित


यूं तो यह मानसिक समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन महिलाएं इससे अत्यधिक प्रभावित होती हैं। उम्र के विभिन्न दौर में न सिर्फ महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होते हैं, बल्कि विवाह होने के बाद नये घर में जाने के बाद या फिर वैवाहिक जीवन में होने वाली परेशानियों के कारण भी महिलाएं इस रोग से ग्रसित हो जा रही है। इसके अतिरिक्त अधिकतर मामलों में देखने में आ रहा हैं कि महिलाएं अपने मन की बात या परेशानियों को किसी से भी नहीं कहती है। जिससे मन ही मन में तनाव बढ़ने लगता है जिसके बाद वह हिस्टीरिया जैसी गम्भीर बीमारी का रूप ले लेता है।


उपचार के मुख्य उपाय


डाक्टर अजय का कहना है कि हिस्टीरिया जैसी गम्भीर बीमारी के इलाज के लिए किसी अच्छे मनोचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए। इसके अलावा अतिरिक्त कुछ उपयों के जरिए इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे स्थिति बिगड़ने पर प्रभावित रोगी को हवादार स्थान पर लेटाएं और उसके कपड़ों को ढीला रखें। इस दौरान मरीज के हाथ पैरों की मालिश करें और पैरों को उपर ही रखें ताकि शरीर में रक्त का प्रभाव सही रहे। इसके अतिरिक्त जो भी व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित हो, उसके अपने तनाव को नियंत्रित करने के उपाय करने चाहिए। इसके लिए योग व मेडिटेशन आदि का सहारा लिया जा सकता है। वहीं काउसिलिंग भी तनाव को कम करने में भी अत्यधिक प्रभावशाली है।



Comments