Unnao : न्याय की भीख मांग रही एक बेबस बेटी


रिपोर्ट : तनवीर खान 


उन्नाव, (उ0प्र0) : जैसे सामाजिक घृणित अपराध के आरोप में  संवेदना की भावनाओं में बहकर बिना पीड़िता के बयानों की सत्यता को कसौटी पर परखे जब न्याय का निर्णय लिया जाता है तो निर्दोष व्यक्ति भी दोषी न होते हुए भी जब सजा का भागीदार बन जाता है तो वह तथा उसका  पूरा परिवार किन मानसिक यातनाओं से गुजरता है इसका एहसास इस बेटी से बेहतर कौन समझ सकता है जो इसी मानसिक यातना के बीच अपने निर्दोष पिता के लिए जो दोषी न होते हुए भी दुष्कर्म के आरोपो की सजा भुगत रहे है के लिए दर बदर न्याय की गुहार लगा रही है एक बेबस बेटी!


न्याय की भीख मांग रही यह बेबस बेटी है उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद से चार बार निर्वाचित विधायक जो अब दुष्कर्म के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर जिसने आंखों में आंसुओ का सैलाब लिए हुए बताया कि उनके पिता को उनके राजनैतिक विरोधियों ने जो जनता में उसके पिता की लोकप्रियता को परास्त नही कर पाए अपराधियों के गिरोह के साथ खड़यँत्र रचकर उन्हें फंसा कर झूठे बयानों के आधार पर सजा दिलवा दी। अपने पिता के राजनैतिक जीवन पर चर्चा करते हुए ऐश्वर्या बताती है उन्नाव जनपद की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत माखी से निर्विरोध ग्रामप्रधान निर्वाचित होने के बाद जनपद के गरीब, कमजोर की मदद बिना किसी जाति, धर्म के करते हुए अपना जीवन समाज के प्रति समर्पित किया तो उन्नाव जनपद के एक लोकप्रिय जननायक के रूप में प्रतिस्थापित हो गए लगातार चार बार अजेय रहकर भिन्न भिन्न विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए जनता रूपी आशिर्वाद से उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष का पद मेरी माता जी को तत्कालीन सत्ता से संघर्ष कर हासिल किया ग्राम प्रधान से लेकर ब्लाक प्रमुख के पदों पर जनपद के हर क्षेत्र में मेरे पिता जी के समर्थकों को ही उन्नाव की जनता अपना आशीर्वाद देती है यह बात मेरे पिता के राजनैतिक विरोधियों को हजम नही हो पा रही थी। मेरे पिता के रहते उनकी राजनैतिक जमीन खिसकती नजर आने लगी तो उन्नाव जो साहित्य, शौर्य एवं राजनैतिक परिपक्वता की माटी मानी जाती रही वहाँ के इतिहास में पहली बार किसी जननेता के खिलाफ घिनोनी साजिशों की ब्यूह रचना तैयार कर फंसाया गया !


ऐश्वर्या बताती है कि उनके पिता की ननिहाल माखी गांव जिसमे मेरे पिता के नाना बाबू सिंह जो एक लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्ति तथा आजीवन ग्राम प्रधान रहे उनके कोई पुत्र न होने से मेरे पिता जी की माता जी ही उत्तराधिकारी थी  इसलिए बचपन से वह माखी गांव में ही पले बढ़े इसी गांव में मंगल सिंह का परिवार रहता है जिनके तीन लड़के गुड्डू सिंह,सुरेंद्र सिंह उर्फ पप्पू सिंह,महेश सिंह जो आपराधिक प्रवत्ति के थे मेरे पिता के सामाजिक जीवन मे आने से पूर्व हत्या,लूट,डकैती,जहरखुरानी अवैध वसूली में संलिप्त रहते थे कई थानों के हिस्ट्रीशीटर सूची बद्ध रहे जिसमे गुड्डू सिंह की लूट के दौरान जनता ने पीट पीटकर हत्या कर दी थी जबकि पप्पू तथा महेश अपराध में संलिप्त रहे इन लोगो ने वर्ष 2000 पंचायत चुनाव में मेरी दादी चुन्नी देवी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे शिशुपाल सिंह के पक्ष में बूथ कैप्चरिंग करने के दौरान चाचा अतुल सिंह पर जानलेवा हमला किया जिसका मुकदमा दर्ज हुआ महेश सिंह न्यायालय के अभिलेखों में व्हाइटनर का प्रयोग कर दूसरे का नाम दर्ज करके फरार हो गया तथा दिल्ली में नाम पता बदलकर पप्पू सिंह के साथ रहते हुए अपराधों में संलिप्त रहकर कुछ सम्पति बना ली जबकि माखी थाने का यह भगोड़ा अपराधी था दिल्ली में इसके सम्बन्ध वहाँ के कुछ राजनेताओं से हो गए जिससे महेश की महत्वाकांक्षा राजनीति में आने की बढ़ गई लेकिन मेरे पिता जी के रहते उसे यह दुष्कर लग रहा था !


इधर मेरे परिवार के राजनैतिक विरोधी रहे शिशुपाल सिंह जिनका परिवार भी अपराधी प्रवत्ति का है उनके साथ मिलकर महेश ने  मेरे पिता के राजनैतिक विरोधियों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश की व्यूहरचना बनानी शुरू की इस बीच महेश की भतीजी तथाकथित पीड़िता 12 जून 2017 को गांव के भूतपूर्व सैनिक हरिपाल सिंह के ड्राइवर नरेश तिवारी के साथ प्रेमप्रसंग में चली जाती है जिसे यह लोग जब खोजकर लाते है तो दबाव बनाते है कि हरिपाल अपने बेटे शुभम के साथ तथाकथित पीड़िता की शादी कर ले लेकिन शुभम जब राजी नही हुआ तो शुभम उसकी माँ शशि तथा बहन आदि के खिलाफ 20 जून 2017 को माखी थाने में अपराध संख्या 316/17 में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया जिसमे 21 जून एवं 22 जून को उन्नाव के सक्षम न्यायालय में 161 तथा 164 के बयान तथाकथित पीड़िता के दर्ज हुए जिसमे कही भी  चार जून की घटना तथा मेरे पिता के नाम का जिक्र नही किया तथाकथित पीड़िता को उसका चाचा दिल्ली ले गया जहां से योजनाबद्ध तरीके से मेरे पिता के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायतें करनी शुरू कर दी जिसके पीछे शातिर दिमाग अपराधी महेश एवं उनके साथियों का दिमाग काम कर रहा था जो अपराधी होने के नाते न्यायतंत्र की कमजोरियों से वाकिफ़ थे यह जानते थे दिल्ली की निर्भया कांड के बाद पीड़िता का बयान ही सर्वोपरि माना जाता है न्यायालय में इसी को आधार बनाते हुए एक फुलप्रूफ योजना बनाई तथाकथित पीड़िता सिर्फ अपने अपराधी चाचा का मोहरा है!


ऐश्वर्या सेंगर बताती है तथाकथित पीड़िता ने जिस चार जून 2017 की घटना जिक्र कर अपने बयानों में आरोप लगाया उस समय हमारे पिता द्वारा प्रयोग लाए जा रहे मोबाइल की लोकेशन सुरक्षाकर्मियों तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य घटनास्थल पर मौजूदगी प्रदर्शित नही कर रहे है मेरे पिता की लोकेशन घटनास्थल से 17 किलोमीटर दूर थी यही नही तथाकथित पीड़िता तथा उसके परिजनों ने फर्जी उम्र प्रमाणपत्र लगाया जिसका मुकदमा उन्नाव न्यायालय में  अब भी चल रहा है तथाकथित पीड़िता ने अपने समय समय पर दिए गए शिकायती प्रथानपत्रो में कई बार समय मे भी परिवर्तित किया! ऐश्वर्या बताती है उनके पिता ने मीडिया तथा जांच एजेंसी से अपना नार्को टेस्ट अथवा झूठ पकड़ने के किसी भी साधन से आरोपी होते हुए भी गुजारने का अनुरोध किया जबकि तथाकथित पीड़िता  एवं इसका परिवार इससे इंकार करता रहा क्योंकि इसे भय था उसका झूठ पकड़ जाएगा!


पिता के निर्दोष होते हुए भी दोषी करार दिए जाने से आहत बेटी का कहना है अपराधियों का यह गिरोह जानता था कि न्यायालय में झूठ को सच और सच को झूठ कैसे साबित किया जाता है यह गिरोह जानता था कि बलात्कार का आरोप लगते ही संवेदनाएं  पीड़िता के पक्ष में चाहे न्यायतंत्र हो या जांच एजेंसी अथवा समाज विशेषकर मीडिया की जुड़ जाती है इसी आधार पर दोषी न होते हुए भी रची साजिश दर साजिश में हमारे पिता उस अपराध के लिए दोषी करार दे दिए गए जो उन्होंने किया ही नही उनका सच झूठ में बदल गया तथाकथित पीड़िता का झूठ सच मान लिया गया माननीय न्यायाधीश ,जांच एजेंसी, मीडिया ने संवेदनाओं में बहकर तथाकथित पीड़िता के झूठ को सच मान सजा सुना दी जबकि असली पीड़ित हम हमारा परिवार तथा हमारे पिता है जो बिना दोष के सजा भुगत रहे है हमारे सच पर किसी ने गौर नही किया  मेरे पिता का सत्तापक्ष का विधायक होने का दंश भी हम सभी को झेलना पड़ा मीडिया ने तो  दोष प्रमाणित होने से पूर्व ही दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर कर दिया था मीडिया के इसी दबाव में न्यायतंत्र ने न्याय का गला घोंट दिया हम किस मानसिक यातना को झेल रहे है किसी ने ध्यान नही दिया! मानसिक यातना झेल रही पिता की एक मात्र सहारा बेबस बेटी ऐश्वर्या चाहती है कि न्यायतंत्र, जांच एजेंसी मीडिया संवेदनाओं से हटकर उसके साथ न्याय करे सच्चाई के हर पहलू पर साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला हो न कि झूठ की बुनियाद पर तैयार बयानों पर।


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