नन्हे-मुन्ने को स्तनपान विकल्प नहीं, संकल्प है


एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाये जाने का दिशा निर्देश जारी


रिपोर्ट : नीलू सिंह/अरूण शुक्ला


ज्ञानपुर/भदोही, (उ0प्र0) : जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अगस्त माह का प्रथम सप्ताह विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा। इसके लिए चिकित्सालयोंध्स्वास्थ्य केन्द्रों में होने वाले प्रसव में सम्बन्धित चिकित्सक, स्टाफनर्स और एएनएम सहित सभी स्वास्थ्य कर्मियों को स्तनपान के लिये जागरूकता पैदा करने हेतु हिदायत दी गयी है। मां कार्यक्रम के अन्तर्गत जनपद की सभी स्वास्थ्य ईकाइयों को बेबी फ्रेण्डली बनाये जाने हेतु समय-समय पर प्रेरित किया जाता है। यह शिशु को डायरियाए निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 लक्ष्मी सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2016 में स्तनपान व उपरी आहार को बढ़ावा देने के लिये मां कार्यक्रम की शुरूआत की है। मां का अभिप्राय मां का असीम आशिर्वाद है। मां कार्यक्रम का नारा है। स्तनपान विकल्प नहीं संकल्प है। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री ने पोषण अभियान की शुरूआत की गयी है। इस अभियान के अन्तर्गत भी स्तनपान व उपरी आहार को अत्यन्त महत्वपूर्ण हस्तक्षेपों के रूप में देखा जाना स्वाभाविक है। स्तनपान का महत्व कोविड संक्रमण के दौरान और अधिक हो जाता है क्योकि स्तनपान रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन व यूनिसेफ के माध्यम से जारी किये गये दिशा निर्देश इस बात पर बल देते है कि प्रत्येक मां को यहां तक कि कोविड से ग्रसित मां को भी शिशु को स्तनपान करना चाहिये। अभी तक किसी भी शोध से यह नहीं साबित हुआ है कि वायरस मां के दूध से शिशु में पहुंच सकता है। बस मां को सावधानी बरतने की आवश्यकता है जैसे कि दूध पिलाने से पहने स्तनों को और स्वय के हाथ साबुन से कम से कम 40 सेकेण्ड तक साफ करना तथा चेहरे, नाक व मुंह पर मास्क लगाना। यदि मां अपना दूध पिलाने में बिल्कुल समर्थ नहीं है तो उस दशा में परिवार के किसी सदस्य के सहयोग से मां के दूध को एक साफ कटोरी में निकालते हुये उसे चम्मच से पिलाया जा सकता है।


जिला कार्यक्रम प्रबन्धक ने बताया कि एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाये जाने का दिशा निर्देश जारी किया है। कहा है कि मां कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी चिकित्सा ईकाइयों को बेबी फ्रेण्डली बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। इस बात की व्यवस्था सुनिश्चित गयी है कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से मां और समुदाय के साथ सम्पर्क में रहें। जिससे गर्भवती महिलाओं और जन्म के समय से दो साल तक के बच्चों को नियमित रूप से सहयोग मिलता रहे।


 


स्तनपान से मां और शिशु को होने वाले फायदे


 


शिशु के लिए अच्छा और सम्पूर्ण आहार होता है, मां का दूध।


मां और शिशु के बीच में भावानात्मक जुड़ाव पैदा होता है। 


दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। 


शिशु को विभिन्न बीमारियों से बचाता है। 


शिशु की शारीरिक और मानसिक वृद्धि में बेहतर विकास होता है।


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