Mirzapur : वीरों की तरह लड़ रहे कोरोना से जंग, न सेवाभाव न उत्साह हुआ कम


जिले के चिकित्सक मरीजों की सेवा में जुटे हैं दिन-रात


रिपोर्ट : टी0सी0विश्वकर्मा


मीरजापुर, (उ0प्र0) : कोरोना वायरस के डर से जब लोग घरों से निकलने में संकोच कर रहे हैं, ऐसे में बिना भय के मरीजों की सेवा में जिले के चिकित्सक वारों की तरह सेवा में लगे हुये हैं। कोरोना के दौरान में जिले के डाक्टर भगवान के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। लोगों की जिंदगी बचाने के लिए डाक्टर वीरों की तरह दिन-रात अपने कार्यो में लगे हुए हैं। ऐसी स्थिति में कई बार ऐसा समय आया कि डाक्टर खुद भी कोरोना से संक्रमित हो गये। फिर भी उनका न तो उत्साह और न ही उनके कार्यो में किसी भी प्रकार की कोई कमी आई है। ऐसे सभी डाक्टरों का सम्मान करना हमारा फर्ज होता है उनके इसी उत्साह से जिले के तमाम कोरोना के मरीज के अलावा तमाम लोग उनको सलाम कर रहे है। 


चिकित्सकों के लिए कोरोना काल है परीक्षा की घड़ी 


जनपद में एल-1 व एल-2 के कोविड के चिकित्सालय मंडलीय चिकित्सालय में स्थापित किया गया हैं। कोविड-19 चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर नीलेश श्रीवास्तव कोरोना के खिलाफ जंग में दिन रात एक किये हुये हैं। इनका कहना है कि कोरोना के शुरूआत में ही कोरोना के प्रति सावधान हो गया था। विभाग की सक्रियता के कारण ही जनपद में काफी हद तक कोरोना संक्रमण से बचा रहा।


डाक्टर नीलेश ने बताया कि उन्होंने बीते छह माह से एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया है। कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों का इानाल करने के साथ-साथ उपचार करने वाले डाक्टरों की सुरक्षा भी अति महत्वपूर्ण है, हमने उसका पूरा ध्यान रखा है। इसीलिए डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को भी पीपीकिट उपलब्ध कराया गया है। हम लोग एक ऐसे शत्रु से लड़ रहे हैं जो कभी दिखता ही नहीं है। ऐसी परिस्थिति में हम लोगों को ज्यादा सक्रिय रहने की आवश्यकता है। उन्होने बताया कि कोरोना काल में भी चिकित्सालयों में किलकारी भी गूंजी।


बेदौली कलां ग्राम की गर्भवती महिला साधना जो कि एक साधारण से परिवार की रहने वाली है। वह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य कछवां लाया गया जहां पूरी सावधानी के साथ चिकित्सकों की देखरेख में प्रसव कराया गया। महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया। अब मां व बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कछवां के प्रभारी डाक्टर प्रदीप के प्रयासों से ही आज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एक आदर्श केन्द्र के रूप में जिले में जाना जा रहा हैं।


डाक्टरी पेशा नहीं मिशन है


मंडलीय चिकित्सालय में तैनात डाक्टर प्रदीप कुमार कोरोना काल में मरीजों का इलाज कर रहे है। यहां आने वाले मरीजों की जांच करना और उन्हे बीमारी के प्रति जागरूक करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। कोरोना के दौर में कभी भी छुट्टी पर नहीं गये है। वह चिकित्सालय में लगातार अपने कार्यो व मरीजों को देखने का कार्य कर रहे हैं। यह तो एक परीक्षा का अवसर है। कई बार ऐसा होता है कि जांच करते-करते चिकित्सक खुद भी कोरोना से संक्रमित हो जाते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के साथ भी ऐसा बराबर होता रहा है। चूंकि यह स्टाफ भी लगातार मरीजों के सम्पर्क में होते हैं। उन्होंने यह कहा कि  परीक्षा देना अत्यन्त जरूरी है। क्योंकि यह ड्यूटी का एक हिस्सा है।


कोरोना दौर एक परीक्षा है, इसकों पास करना जरूरी है


कोविड-19 के डाक्टर अजय जिला सर्विलांस अधिकारी है। जिले में कोरोना वारियर्स के रूप में काम करने के चलते इनके पास जिले के सभी संदिग्धों के सैंपल लेने से लेकर मरीजों के इलाज करवाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हैं। इसलिए पिछले कुछ दिनों से 16-16 घंटे काम करना पड़ रहा है। परिवार को इस माहमारी से बचाने के लिए पिछले तीन माह से वह परिवार से भी दूरी बनाये हुये है। जिससे परिवार को संक्रमण से बचाया जा सके।


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