Mirzapur : वामन जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ और हवन संपन्न


रिपोर्ट : सलील पांडेय


मीरजापुर, (उ0प्र0) : सत्ययुग में सत्याचरण की रक्षा के लिए राजा बलि के अहंकार को नष्ट करने के निमित्त वामन रूप धरे नारायण ने पहला पग विंध्यक्षेत्र में ही रखा था । इसी कारण विंध्यवासिनी के पास पुण्यौघा नदी (ओझला) तट पर नारायणघाट और नगर से 30 किमी पूर्व चुनार का चरणाद्रि क्षेत्र नामकरण हुआ । अहंकारशमन का धाम विंध्यभूमि है ही। अहंकार से उन्मत्त होकर सूर्य का मार्ग अवरुद्ध करने पर गुरु अगस्त्य को आना पड़ा था । उनके आदेश पर विन्ध्यपर्वत झुका तो झुका ही रह गया है अबतक।


इसी धाम क्षेत्र के गैबीघाट में बाल-रूप हनुमान जी का मंदिर है जहां वामन द्वादशी पर इस बार भजनसंध्या तो नहीं हुई लेकिन लॉकडाउन नियमों के तहत वर्चुअल तरीके से 11 हजार हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। शाम को डिस्टेंसिंग सिस्टम से सुंदरकांड पाठ के बाद हवन किया गया । मन्दिर व्यवस्था से जुड़े लोगों के साथ आसपास कार्यकर्ताओं ने प्रसाद जाकर लोगों को दिया ।


व्यवस्था महात्मा रामानुजदास के अलावा पुरोहित पिंटू शुक्ल, पूर्व सभासद संजय यादव, विजय निषाद, कंचन सेठ, हरिश्चंद यादव, विंध्यवासिनी केसरवानी, हार्दिक केसरवानी, संगीता, सलिल पांडेय आदि शामिल थे ।


बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए छोटी उम्र के बच्चों को वामन भगवान की महत्ता से अवगत कराया गया।


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