Mirzapur : पुलिसिया उत्पीड़न के विरोध में पत्रकारों ने सौंपा जिलाधिकारी को ज्ञापन


ललई छठ की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार की आईडी और माइक छीनने के विरोध में पत्रकारों ने जताया कड़ा विरोध


रिपोर्ट : बृजेश गोंड


मीरजापुर, (उ0प्र0) : जिले में बढ़ रहे पत्रकारों के उत्पीड़न खासकर पुलिसिया उत्पीड़न के विरोध में एकजुट होकर पत्रकारों ने सोमवार को जिलाधिकारी तथा प्रभारी पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से चलकर जिला मुख्यालय पर पहुंचे पत्रकारों ने जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन द्वारा समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया जा रहा है, बल्कि उनके कार्य में बाधा भी उत्पन्न किया जा रहा है। जिससे कहीं ना कहीं पत्रकारों को अपमानित होने के साथ ही साथ लेखन कार्य में परेशानियों का सामना करना पड़ जा रहा है। पत्रकारों ने रविवार को विंध्याचल निवासी युवा पत्रकार प्यारे मोहन के साथ अष्टभुजा पहाड़ी पर विंध्याचल थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की।


बताते चलें कि एक टीवी चैनल के पत्रकार प्यारे मोहन शनिवार को ललई छठ पर्व पर विंध्य पर्वत स्थित देवी मंदिर पर समाचार संकलन हेतु गए हुए थे, जहां मौजूद विंध्याचल थाने के कांस्टेबल ओंकारनाथ राय राकेश यादव द्वारा न केवल उनके साथ अभद्रता पूर्ण व्यवहार किया गया, बल्कि उनकी माइक, आईडी को भी छीन लिया गया। इस बात की भनक जैसे अन्य साथी पत्रकारों को भी वह तत्काल मौके पर पहुंच गए और विंध्याचल कोतवाली प्रभारी से वार्ता कराएं। पत्रकारों का आरोप है कि इस दौरान भी उक्त दोनों कांस्टेबल अपने पुलिसिया रौब में पत्रकारों से पेश आए। इस दौरान पत्रकारों ने आरोप लगाया कि जिले में पत्रकार उत्पीड़न की घटनाएं आम होती जा रही हैं। पुलिस पूरी तरह से निरंकुश हो गई है, खासकर पत्रकारों के मामले में पुलिस का रवैया संतोषजनक नहीं है।



जिलाधिकारी को बताया गया कि पूर्व में एक टीवी चैनल के पत्रकार पवन तिवारी के साथ शहर कोतवाली के दरोगा द्वारा किया गया दुर्व्यवहार, शहर कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर पोखरी निवासी मान्यता प्राप्त पत्रकार के घर में ताक झांक करने के मामले में दबंगों के खिलाफ दी गई तहरीर के बावजूद पुलिस द्वारा बरती जा रही नरमी तथा मामूली धाराओं में विपक्षियों को पाबंद करते हुए पुलिस द्वारा कर्तव्यों की कि गई इतिश्री कर ली गई, जबकि इस समूचे प्रकरण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था, बावजूद पुलिस ने दबंगों के खिलाफ दी गई तहरीर को हल्के में लेते हुए कागजी कोरम पूर्ण कर लिया, इसी प्रकार हलिया के एक पत्रकार के ऊपर फर्जी ढंग से लादे गए मुकदमे की भी चर्चा करते हुए पत्रकारों ने पत्रकार उत्पीड़न के मामलों की निष्पक्ष जांच कराते हुए त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की।


पत्रकारों ने कहा कि पूरे लॉकडाउन अवधि में पत्रकारों ने अपनी जान जोखिम में डाल शासन और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करते हुए बिना किसी संसाधन और सुरक्षा के जनमानस को सचेत करने का कार्य किया है, बावजूद इसके पत्रकार उत्पीड़न की बढ़ रही घटनाओं से चतुर्थ स्तंभ के पहरूओं को गहरा आघात पहुंच रहा है। पत्रकारों ने जिलाधिकारी के साथ ही प्रभारी पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की जिस पर दोनों अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा है कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए तथा उनके सम्मान का भी ख्याल रखा जाएगा। इस दौरान मंगल तिवारी, मनोज शुक्ला, संजय दुबे, मंगला पति द्विवेदी, जेपी पटेल, संतोष देव गिरि, पवन तिवारी, प्रभात मिश्रा, संगम राज पांडे, रामानंद तिवारी, रामलाल साहनी, हेमंत शुक्ला, प्रभा शंकर दुबे, विवेक कुमार, सुधीर सिंह, अभय कुमार मिश्रा, अशोक सिंह मुन्ना, शमशाद खान, जयप्रकाश दुबे, राजन राज शर्मा इत्यादि पत्रकार मौजूद रहे।


 


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