Mirzapur : जिले में मनाया जायेगा बाल पोषण माह 


नौ माह से लेकर पांच वर्ष तक के 325000 हजार बच्चों को दिया जायेगा विटामिन ए खुराक, शरीर को मिलता है बीमारियों से लड़ने का ताकत


रिपोर्ट : टी0सी0विश्वकर्मा


मीरजापुर, (उ0प्र0) : बच्चों को कुपोषण से दूर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग 9 अगस्त से 5 सितम्बर तक बच्चों को विटामिन ए की खुराक देने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। यह अभियान सुरक्षा पोषण माह के रूप में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले के 325000 बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जायेगी, इसके साथ ही कुपोषित बच्चों का भी चिन्हाकंन किया जायेगा।


एएनएम द्वारा दवा दी जायेगी


अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर नीलेश श्रीवास्तव ने बताया कि बाल सुरक्षा पोषण माह में जिले के पांच साल तक के 325000 बच्चों को विटामिन ए- की खुराक दी जायेगी, इसके साथ ही कुपोषित बच्चों का चिन्हाकंन किया जायेगा और उन्हें पुर्नवास पोषण केंन्द्र भेजा जायेगा, बाल सुरक्षा पोषण माह में कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए, महीने के बुधवार और शनिवार को आयोजित होने वाले वीएचएनडी (ग्रामीण स्वास्थ्य पोषण दिवस) और यूएचएनडी (शहरी स्वास्थ्य पोषण दिवस) पर ही बच्चों को एएनएम द्वारा विटामिन ए की खुराक देने का कार्य किया जायेगा।


खुराक से आयेगी रोगों में कमी


जिला कार्यक्रम प्रबन्धक अजय सिंह ने बताया कि बाल सुरक्षा पोषण माह के सफलता के लिये सुनिश्चित किया जायेगा कि जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर तैनात एएनएम के पास बैनर इत्यादि के साथ विटामिन ए की पर्याप्त दवा उपलब्ध रहें, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नौ माह से पांच वर्ष की आयु के बच्चों में रोगों में कमी लाना हैं।


जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग के अलावा बाल विकास विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। जिले के सभी 2668 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर होने वाले बुधवार और शनिवार को आयोजित होने वाले वीएचएनडी (ग्रामीण स्वास्थ्य पोषण दिवस) और यूएचएनडी (शहरी स्वास्थ्य पोषण दिवस) पर अपने कार्यरत क्षेत्र के लोगों को विटामिन ए की खुराक के लिए प्रोत्साहन करने के साथ ही केन्द्रों पर ले जाने का कार्य किया जायेगा।


अभियान का मुख्य उद्देश्य :



  • पांच वर्ष तक को बच्चों में मृत्यु दर में कमी लाना।

  • रतौंधी से बचाव, कुपोषण से बचाव और उपचार करना।

  • आयोडीनयुक्त नमक के प्रयोग से बच्चों में शारीरिक एवं विकृतियों की कमी को दूर करना है।

  • बच्चों के वजन और छह माह तक स्तनपान, छह महीने बाद पूरक आहार को बढ़ावा देना है।

  • आयोडीन युक्त नमक के प्रयोग के लिए समुदाय को जागरूक करना इस अभियान का उद्देश्य हैं।  


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