महिलाओं में संकल्प शक्ति बढाता है हरितालिका तीज का व्रत : ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री

हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं।


यह आमतौर पर अगस्त–सितम्बर के महीने में ही आती है. इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते है। भगवान शिव और पार्वती को समर्पित इस व्रत को लेकर इस बार उलझन की स्थिति बनी हुई है। व्रत करने वाले इस उलझन में हैं कि उन्हें किस दिन यह व्रत करना चाहिए। इस उलझन की वजह यह है कि इस साल पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है यानी पंचांग में तृतीया तिथि का मान ही नहीं है।


आपको बता दें कि इस विषय पर ना सिर्फ व्रती बल्कि ज्योतिषशास्त्री और पंचांग के जानकर भी दो भागों में बंटे हुए हैं। एक मत के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत २१ अगस्त को करना शास्त्र सम्मत होगा क्योंकि यह व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है जो २१ अगस्त को है। २१ अगस्त को ११:०२ए एम मिनट तक तृतीया तिथि होगी।  जिससे व्रत के लिए २१ सितंबर का दिन ही सब प्रकार से उचित है। २० अगस्त को  द्वितीया तिथि  ०२ बजकर १३ मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसके बाद से तृतीया यानी तीज शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी २१ अगस्त को  से  ११ बजकर ०२ मिनट पर तृतीया समाप्त होकर चतुर्थी शुरू हो जाएगी।


हरितालिका व्रत पूजा मुहूर्त



  • प्रातः काल हरितालिका पूजा मुहूर्त – 21 अगस्त, शुक्रवार – सुबह  05 बजकर 54 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 30 मिनट तक

  • प्रदोष काल हरितालिका पूजा मुहूर्त – 21 अगस्त, शुक्रवार – शाम 06 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 06 मिनट तक

  • हरितालिका तिथि आरंभ – 21 अगस्त, शुक्रवार – सुबह 02 बजकर 13 मिनट से

  • हरितालिका तिथि समाप्त – 21 अगस्त, शुक्रवार – रात 11 बजकर 02 मिनट तक


खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गया हैं।


विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से जहाँ कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है।


हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी एवम गणेश जी की पूजा का महत्व हैं।  यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता हैं। शिव जैसा पति पाने के लिए कुँवारी कन्या इस व्रत को विधि विधान से करती हैं।


हरितालिका तीज का व्रत महिला प्रधान है।इस दिन महिलायें बिना कुछ खायें -पिये व्रत रखती है।यह व्रत संकल्प शक्ती का एक अनुपम उदाहरण है। संकल्प अर्थात किसी कर्म के लिये मन मे निश्चित करना कर्म का मूल संकल्प है।इस प्रकार संकल्प हमारी अन्तरीक शक्तियोंका सामोहिक निश्चय है।इसका अर्थ है-व्रत संकल्प से ही उत्पन्न होता है।व्रत का संदेश यह है कि हम जीवन मे लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प लें ।संकल्प शक्ति के आगे असंम्भव दिखाई देता लक्ष्य संम्भव हो जाता है।माता पार्वती ने जगत को दिखाया की संकल्प शक्ति के सामने ईश्वर भी झुक जाता है।


अच्छे कर्मो का संकल्प सदा सुखद परिणाम देता है। इस व्रत का एक सामाजिक संदेश विषेशतः महिलाओं के संदर्भ मे यह है कि आज समाज मे महिलायें बिते समय की तुलना मे अधिक आत्मनिर्भर व स्वतंत्र है।महिलाओं की भूमिका मे भी बदलाव आये है ।घर से बाहर निकलकर पुरुषों की भाँति सभी कार्य क्षेत्रों मे सक्रिय है।ऎसी स्थिति मे परिवार व समाज इन महिलाओं की भावनाओ एवं इच्छाओं का सम्मान करें,उनका विश्वास बढाएं,ताकि स्त्री व समाज सशक्त बनें।


इस व्रत में मुख्य रूप से माता पार्वती और शिवजी की पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री के अनुसार इस दिन अगर कुछ खास उपाय किए जाएं तो कुंवारी लड़कियों को उनका मनचाहा पति मिल सकता है। विवाहित महिलाएं ये उपाय करेंगी तो उनके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। ये उपाय इस प्रकार हैं...



  • हरितालिका तीज की शाम को शिव-पार्वती के मंदिर में जाकर पूजा करें और शुद्ध घी के 11 दीपक लगाएं। इस उपाय से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा जीवनसाथी मिल सकता है।

  • कुंवारी ब्राह्मण कन्या को उसके पसंद के कपड़े दिलवाएं और साथ में कुछ उपहार भी दें।

  • माता पा‌र्वती को हल्दी की 11 गठान चढ़ाने से लड़की के विवाह के योग बन सकते हैं।

  • भगवान शिव-पार्वती का अभिषेक दूध में केसर मिलाकर करें। इससे भी पति-पत्नी में प्रेम बना रहता है।

  • इस दिन पति-पत्नी सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद किसी शिव-पार्वती मंदिर में जाएं और लाल फूल अर्पित करें।

  • हरितालिका तीज पर पूजा करने के बाद देवी पार्वती को खीर का भोग लगाएं।


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