लॉकडाउन का खुलेआम फायदा उठा रहे हैं राशनिंग दुकानदार, धड़ल्ले से हो रही है राशन की कालाबाजारी


मुंबई : कोरोना महामारी के कारण देश भर में चल रहे लॉकडाउन के चलते जहां लोगों का कामकाज ठप्प पड़ा हुआ है, जिससे आम और खास दोनों ही वर्ग के लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे संकट की घड़ी में केंद्र सरकार की ओर से सरकारी राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं को पिछले चार माह से मुफ्त राशन वितरण करने का अभियान शुरू किया है। लेकिन मुंबई की अनेक झोपड़पट्टियों में राशन दुकानदारो द्वारा धड़ल्ले से खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी की जा रही है। उसके बाद भी राशनिंग विभाग के अधिकारियों की आंख और कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मार्च महीने में मुंबई में कोरोना के कारण लॉकडाउन शुरू हो गया। उसके बाद केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल महीने में सरकारी राशन दुकानों के जरिए राशन कार्ड धारकों को प्रति व्यक्ति पांच किलो मुफ्त में चावल, गेहूँ और एक किलो दाल देने का निर्णय लिया। लेकिन बड़ी संख्या में राशन दुकानदारो की ओर से राशन कार्ड धारकों को यदि चावल दिया गया तो गेहूं नहीं दिया गया है। जिसके कारण झोपड़पट्टियों की जनता राशनिंग दुकानदारों की इस तरह की कालाबाजारी से त्रस्त हो चुकी है। अखिल भारतीय उत्कर्ष कामगार संगठना के अध्यक्ष ज्ञानोबा राजगुरु ने बताया कि चेम्बूर के वासिनका, कस्तूरबा नगर, प्रयाग नगर, गड़कडी खदान, माहुल गांव, ट्रॉम्बे के चीता कैम्प, महाराष्ट्र नगर, मानखुर्द मंडाला, जाकिर हुसैन नगर घाटकोपर के रमाबाई कॉलोनी, नेताजी नगर, कामराज नगर, तिलक नगर के आम्बेडकर नगर और कुर्ला के साबले नगर तथा क्रांति नगर झोपड़पट्टियों में राशन दुकानदारों की ओर से उपभोक्ताओं को समय से खाद्य पदार्थ नहीं बांटे जाने से उनमें आक्रोश व्याप्त है। अखिल भारतीय उत्कर्ष कामगार संगठना के अध्यक्ष ज्ञानोबा राजगुरु के अनुसार बड़ी संख्या में झोपड़पट्टियों से लोग अपने गांव चले गए हैं, ऐसे में राशन दुकानदारो की ओर से खुले आम खाद्य पदार्थों की कालाबजारी की जा रही है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि लॉकडाउन के पहले तक राशन दुकानों पर मशीन में अंगठा लगाकर खाद्य पदार्थ बांटा जाता था, लेकिन कोरोना महामारी के बाद से मशीन में अंगठा लगाने की कार्य बंद कर दिया गया है जिससे कालाबजारी को बढ़ावा मिल रहा है।


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