कोरोना से ज्यादा घातक दवा कंपनियों और आई टी कम्पनियों की साजिश घातक


एक ही व्यक्ति का एक ही दिन हुए टेस्ट में अलग-अलग रिपार्ट! आखिर क्या है चक्कर ?


आरोग्य सेतु ऐप क्यों कर रहा दगाबाजी ?


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : कई स्थानों पर एक व्यक्ति का एक ही दिन RT-PCR मशीन से अलग-अलग लैब में जांच हुई तो एक पॉजीटिव तो एक निगेटिव रिपोर्ट आई । आखिर यह मिलावटी मामला क्यों है?


संख्या को लेकर उठ रहे सवाल


एक ही व्यक्ति का दो, तीन या चार बार जांच होती है तो जांच के अनुसार व्यक्ति की संख्या अंकित किए जाने का आरोप है। जबकि व्यक्ति एक ही है।


सब धान 22 पसेरी


यह मुहावरा कोरोना जाँच में लागू हो रहा है। वर्षों पुराना कोरोना जो फ्लू बीमारी कही जाती थी, बीच में सार्स महामारी फैली या कोविड-19 सबका पॉजिटिव रिपोर्ट आ रही है ? आखिर ऐसा क्यों ? जबकि सामान्य फ्लू वाली बीमारी में क्वारन्टीन आदि का प्राविधान कभी नहीं था ।


डेंगू, टीबी, मलेरिया के वक्त भी कोरोना टेस्ट ?


इन दिनों हर बीमारी/आपरेशन में कोरोना टेस्ट हो रहा है। अलग अलग बीमारी में पॉजीटिव रिपोर्ट आ गई और बिना कोई अंतर किए कोरोना भी पॉजिटीव आ गया तो फिर किस बीमारी को प्रमुख मानकर इलाज होगा। मलेरिया और टीबी मरीज भी L-1 हॉस्पिटल में क्वारन्टीन होगा? इस पर सही जवाब नहीं मिल रहा है।


अंतरराष्ट्रीय दवा, IT कम्पनियों और न्यूज चैनलों की भूमिका पर नजर रखी जाए


अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों पर अंगुली उठ रही है कि उनके दबाव से इस मुद्दे को भयानक बना दिया गया । इसी के साथ ढेरों न्यूज चैनलों ने भय का माहौल बनाया। इलेक्ट्रॉनिक कम्पनियों की भी बिक्री उछाल पर है। स्कूल की पढ़ाई, अधिकारियों की विडियो कांफ्रेंसिंग, वर्चुअल मीटिंगों के चलते लैपटॉप, एंड्रॉयड फोन, इंटरनेट डाटा पर निर्भरता बढ़ी है। इस काम में लगी कम्पनियों की डिमांड अधिक हो रही है।


मास्क पर प्रश्न-चिह्न !


अभी तक तो यही होता रहा कि योग करिए। अधिक आक्सीजन लेना और शरीर का विषाक्त गैस बाहर निकालना चाहिए। लेकिन इन दिनों पूरे-पूरे दिन मास्क लगाने से इस प्रक्रिया पर तो असर पड़ेगा ही । यदि कोई पाजिटिव है तो मास्क की वजह से उसके शरीर के वायरस तो अंदर ही रहकर बढ़ते रहेंगे ही ।


कोरोना में प्रशासनिक अधिकारी फ्रंट पर और डॉक्टर हुए दोयम


प्रशासनिक और आईटी कंपनियों, साफ्टवेयर कम्पनियों के मालिकान कोरोना नियंत्रण में फ्रंट लाइन पर देखे जा रहे जबकि डॉक्टर पिछली लाइन में। यह कैसी रीति है ? लोग समझ नहीं पा रहे हैं।


क्या हुआ आरोग्य सेतु एप का


WHO पर उंगली उठ चुकी है। दावा किया गया था कि यह एप बता देगा कि आपके पीछे कोरोना लगा है। लेकिन फिल्मवाले अमिताभ से लेकर बड़े बड़े मंत्री, राज्यपाल, आफिसर, दरोगा, सांसद, विधायकों के साथ यह ऐप दगाबाजी कर गया या इन्होंने डाउनलोड ही नहीं किया ? फिर निरीह लोगों को ही बाध्य क्यों किया गया।


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