कोरोना चैंपियंस की जुबानी कोरोना की कहानी


कोरोना उपचाराधीन का तिस्कार न करें बल्कि उनका सम्मान व सहयोग करें


रिपोर्ट : टी0सी0विश्वाकर्मा


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : जिले में पिछले कुछ दिनों में कोरोना उपचाराधीन के मामले बढ़े हैं। ऐतिहात रखने के बाद भी नगर से ग्रामों में कई लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिले के बसही स्थित चिकित्सालय में मरीजों का रात दिन ईलाज चल रहा है। जहां पर डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मी रात-दिन मरीजों के ईलाज व देखभाल में जुटे हैं। उनका यही उत्साह जिले के अधिकांश मरीज कोरोना से सफल जंग जीत कर अपने घर वापस लौट चुके हैं। हांलाकि इस जंग में हमारे कई डाक्टर योद्धाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को भी कोरोना वायरस जैसी महामारी का शिकार होना पड़ा है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम कोरोना से जंग जीत चुके और उसमें जुटे सभी योद्धाओं का सम्मान करें और उसमें जुटे सभी योद्धाओं का सम्मान करें और उनका मनोबल बढ़ाएं। उनके प्रति या उनके परिवार वालों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। कोरोना उपचाराधीन, संभावित संक्रमण वाले व्यक्ति व स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति भेदभाव न किया जाए, इसके लिए भी सरकार लोगों को जागरूक कर रही है। कोरोना से जंग जीत चुके डॉक्टर  बता रहे हैं  कि इस मुश्किल व्यक्ति में हमें किन चीजों का ध्यान देना चाहिए।


वायरस भेदभाव नहीं करता, आप भी न करें : डाक्टर अजय


मंण्डलीय चिकित्सालय के एसआईसी आलोक सिंह करीब 20 दिन पहले कोरोना से उपचाराधीन हुए। इसके  बाद वह तुरन्त बसही स्थित चिकित्सालय में तुरन्त भर्ती हो गये। इसके बाद दोबारा जांच कराने पर उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्होंने बताया कि कोविड-19 का लक्षण आम सर्दी जुकाम से भी जटिल होते हैं। इसलिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखकर और सब सावधानियां रखकर ही इस कोरोना वायरस जैसे महामारी से लड़ा जा सकता है। आइसोलेशन में रहने के दौरान सकारात्मक रवैया रखें। समय को बिताने के लिए अपनी पसंद के अनुसार किताब पढ़ना, संगीता सुनना आदि कर सकते हैं। इससे किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव  न हो। ऐसे एक जरूरी ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना वायरस किसी के प्रति कोई भेदभाव नहीं करता है। यह आज किसी और को हुआ है तो कल आपको भी हो  सकता है। इसलिए कोरोना उपचाराधीन का तिरस्कार कर उससे दूरी न बनाएं। बल्कि उनका सम्मान और सहयोग करें। इससे मरीजों को बीमारी से लड़ने की ताकत मिलेगी।


कोरोना हुआ है तो घबरायें नहीं


भगेसर गांव के रहने वाले मनोज कुमार को 22 जून को कोरोना पांजिटिव हो गये थे। उसके बाद उन्होंने अपने आपको कोरोंटाइन करते हुये पड़री स्थित चिकित्सालय में भर्ती हो गये। करीब दस दिनों तक उन्होंने इलाज कराया और दोबारा टेस्ट कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्होंने बताया कि कोरोना पांजिटिव होने के बाद एक बार बिल्कुल निराश हो गया था


Comments