झूंठे किसान प्रमाणपत्रों के सहारे भाजपा नेता महेश सुखारामानी के नेतृत्व में चल रहा है ज़मीन खरीद-फरोख्त का गोरखधंधा 


अकृषक जमीन को कॄषक जमीन के तौर पर स्टैम्प ड्यूटी भर सरकार का लगाया करोड़ों का चूना : विशाल गुप्ता


रिपोर्ट : प्रमोद कुमार


कल्याण : कल्याण तहसील के ग्रामीण परिसर में झूंठे बनावटी किसान प्रमाण पत्रों एवं भूमि प्रमाणपत्र को ही किसान प्रमाण पत्र बताकर उसके सहारे भाजपा नेता महेश सुखारामानी उर्फ महेश ऐसिट  के नेतृत्व में जमीन खरीद-फरोख्त का गोरखधंधा चल रहा है जिसमें जहां एक तरफ गरीब आदिवासी किसानों की पुस्तैनी ज़मीन झूंठे किसान प्रमाणपत्र के सहारे खरीदकर हड़पली गई और गरीब, आदिवासी, किसानों को जमीन से बेदखलकर दिया गया है वहीं एक कंपनी की अकृषक (एन.ए.प्लॉट) जमीन को कॄषक जमीन के तौर पर स्टैम्प ड्यूटी भरकर करोड़ों रुपयों के सरकारी राजस्व का घोंटला किया गया है जिसका पर्दाफास सारे दस्तावेजी सबूतों के साथ एक पत्रकार परिषद में परिहित चेरीटेबल सोसायटी के अध्यक्ष विशाल कुमार गुप्ता ने किया है।


कल्याण मुरवाड रोड पर स्थित संस्था के कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद के दौरान झूंठे किसान प्रमाणपत्र के सहारे जमीन  हड़पने के गोरखधंधे का पर्दाफास करते हुए परिहित चेरिटेबल सोसायटी के अध्यक्ष विशाल गुप्ता ने पत्रकारों से कहा कि जहां एक तरफ पीएम मोदी ना खाऊंगा और ना ही खाने दूंगा का स्लोगन देकर भ्रष्ट्राचार मुक्त भारत बनाने की बात कहते है वहीं उनकी ही पार्टी भाजपा के स्थानीय नेता महेश सुखारामानी उर्फ महेश ऐसिट  के नेतृत्व में कल्याण मुरवाड रोड पर झूंठे बनावटी किसान प्रमाणपत्रों एवं भूमिप्रमाण को ही किसान प्रमाणपत्र बताकर सर्वे नंबर 120/1,121/1 सेंचुरी कंपनी के अकृषक (एन.ए.प्लॉट) जमीन को कॄषक जमीन के तौर पर स्टैम्प ड्यूटी भरकर खरीदा जिसमें करोड़ों का भृष्टाचार किया गया और सरकारी राजस्व का घोंटला हुआ, विशाल गुप्ता ने बताया कि झूंठे प्रमाणपत्र के सहारे भाजपा नेता महेश पहलाजराय सुखारामानी,सुरेश जयरामदास तलरेजा और सतीश रमेशलाल तुनिया ने सर्वे नंबर 15/7 की जमीन लेने को जो किसान होने के प्रमाण 7/12  दिए वह आरटीआई के दौरान संबधित कार्यालय से पता करने पर सभी झूंठे साबित हुए, वहीं भाजपा नेता महेश सुखारामानी की म्हारालगांव स्थित सरकार जमा हो चुकी जमीन के ही दस्तावेज के सहारे महेश के पार्टनर लाल नोतनदास तनवानी उक्त सर्वे नंबर 120/1,121/1 की जमीन लेने के लिए सर्वे नंबर 15/7 की जमीन के दस्ताबेज सबमिट किये जो कि पहले से ही अवैध थे, प्रकाश रेवांचन्द बुधरानी लाल नोतनदास तनवानी,नरेश रोशनलाल भाटिया,यश रावलानी आदि सभी ने झूंठे 7/12 के आधार पर  कांबा वरप गांव में सर्वे नंबर 120/1,121/1 की जगह ली जो सेंचुरी कंपनी की अकृषक जमीन एन.ए.प्लॉट होते हुए भी कॄषक जमीन की स्टैम्प ड्यूटी जमाकर कर ली गई यही नही उक्त जमीन की कई बार खरीद-फरोख्त की गई जिसमें करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ और करोड़ो का सरकार को चुना लगाया गया फिर भी स्थानीय तहसीलदार, प्रांतअधिकारी और ठाणे जिलाधिकारी अनेकों शिकायतें मिलने पर भी खामोश रहे और भष्टाचारियों का साथ देते हुए भृष्टाचार को बढ़ावा दिया साथ ही झूंठे किसान प्रमाणपत्रों के सहारे आदिवासी,किसानों की खरीद कर हड़पी गई जमीन के मामले में भी आदिवासी,किसानों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देश के बाद भी न्याय नहीं दिलाया गया जिससे तहसीलदार,प्रांत अधिकारी और जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है, क्यों कि पिछले वर्ष  पत्रकारों का एक प्रतिनिधि मंडल झूंठे एवं फर्जी दस्तावेजों के साथ तहसीलदार दीपक आकड़े मिला था तब तहसीलदार दीपक आकड़े ने खुद यह कहा था कि इस जमीन मामले सभी दस्तावेज वरिष्ठों को भेज दिए गए है वह प्राप्त होते ही संबंधित जमीन सरकार जमा की जाएगी किन्तु सालभर बाद वही फिर दुहरा रहे है जिससे यह साबित होता कि जमीन हड़पने वाले भूमाफियां से तहसीलदार आकड़े की भी मिलीभगत है क्यों कि सरकार द्वारा  दी गई प्रददत्त शक्ति और अधिकार का प्रयोग क्यों नही कर रहे है। राष्ट्रीय आयोग के यहां विचाराधीन मामला होते हुए भी सर्वे नंबर 120/1,121/1 भूखंड पर जिलाधिकारी के स्थगन और ग्राम पंचायत के नोटिस के बाद भी निर्माण कार्य धड़ल्ले से हो रहा है, जबकि कॄषक जमीन अधिनियम 1948 की धारा 84(क) के अनुसार  उक्त सर्वे नंबर की जमीन सरकार के अधीन जमा होनी चाहिए, विशाल गुप्ता ने  राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अनुरोध किया है कि राष्ट्रीय आयोग के निर्देश के अनुसार अपने अधीनस्थ राज्य प्रशासन एवं जिला प्रशासन को  कार्रवाई करने का निर्देश दें और गरीब आदिवासी किसानों को न्याय दिलाएं, विशाल गुप्ता कहा कि  देर है अंधेर नही हमें कानून पर पूरा भरोसा है हमें यानी गरीब आदिवासी,किसानों को न्याय मिलेगा और सफेद पोश भूमाफियाओं के चेहरों से नकाब हटेगा और बेनकाव होकर कानूनी शिकंजे में आएंगे और  सलाखों के अंदर जाएंगे  इसके लिए हमें गरीब आदिवासी, किसानों के साथ  मुंबई मंत्रालय या फिर दिल्ली जंतरमंतर एवं संसद के सामने ही अनिश्चित कालीन  धरना, प्रदर्शन,भूंखहड़ताल आंदोलन ही क्यों ना करना पड़े वह भी करेंगे।


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