बंधन कच्चे धागों का


- माधुरी मिश्रा (वाराणसी)


बन्धन ये कच्चे धागों का।
बहना भाई के वादों का।


जुड़कर फ़िर ये ना टूटे।
क्या कहना है इन नातों का।


ये जनम जनम का नाता है।
मानो कहना इन बातों का।


सजती है सूनी कलाई पर।
शृंगार है राखी हाथों का।।


है प्यार बसा इस राखी में।
त्योहार है ये सौगातों का।


ये आशीर्वाद बहन का है।
और प्यार भरे एहसासो का।।


रक्षा करना तुम बहना की।
बन्धन है कच्चे धागों का।


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